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जल गया दैत्य निशुंभ का 'वध स्थल', नवरात्र में जले प्राचीन मंदिर में होती है तिब्बती देवता की पूजा!

उत्तराखंड के जिला बागेश्‍वर के बदियाकोट में स्थित प्राचीन मां भगवती मंदिर में आग लगने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस मंदिर का इतिहास बेहद रोचक है और राक्षस निशुंभ के वध से जुड़ा है.

जल गया दैत्य निशुंभ का 'वध स्थल', नवरात्र में जले प्राचीन मंदिर में होती है तिब्बती देवता की पूजा!
Image Credit: मान्‍यता है कि यहीं मां दुर्गा ने राक्षस निशुंभ का वध किया था. (Photo: AI and X)

16 अक्‍टूबर को उत्तराखंड के बागेश्‍वर के बदियाकोट मंदिर में आग लग गई, नवरात्र के दौरान देवी मंदिर में आग लगने को लेकर कई लोग किसी संकट की आशंका से जोड़कर देख रहे हैं. यह मंदिर बेहद प्राचीन है और लकड़ी से बना था. लकड़ी पर बेहद खूबसूरत नक्‍काशी करके बनाया गया यह देवी मंदिर तिब्‍बती देवताओं की पूजा का भी स्‍थल है.

इस मंदिर का बड़ा धार्मिक महत्‍व है. इसे राक्षस निशुंभ का वध स्‍थल माना जाता है. इस ऐतिहासिक मंदिर में नवरात्र के दौरान आग लगना भक्‍त अशुभ मान रहे हैं. आग में मंदिर के मुख्‍य ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा है. यह मंदिर पहाड़ों की पारंपरिक स्‍थापत्‍य कला को सहेजे बेहद सुंदर कलाकृति की पहचान रही है. 

देवी ने राक्षस का किया था वध

पौराणिक कथाओं के अनुसार, राक्षस शुंभ और निशुंभ ने ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्‍त किया था कि उन्‍हें न तो कोई पुरुष मार सकता है, न देवता और न दानव. यह वरदान मिलते ही उन्‍होंने आतंक मचा दिया और तीनों लोकों पर अधिकार जमा दिया. तब देवताओं ने माता पार्वती से उसका अंत करने की प्रार्थना की. फिर माता पार्वती के शरीर के तेज से एक देवी का प्रकट हुईं, जो बेहद सुंदर थीं. उनका नाम महागौरी/चंडिका था. देवी मां और शुंभ-निशुंभ के बीच भयंकर युद्ध हुआ था. फिर देवी मां ने त्रिशूल निशुंभ की छाती चीर कर वध कर दिया.

बदियाकोट ही है वो स्‍थान?

धार्मिक मान्‍यता है कि आज जहां बदियाकोट में मां भगवती का प्राचीन मंदिर है, वहीं देवी मां ने निशुंभ का वध किया था. इसलिए यहां देवी मां के भक्‍त उनकी कृपा पाने के लिए आते हैं. खासतौर पर नवरात्र में काफी संख्‍या में भक्‍त इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं.

तिब्‍बती देवता, मां के धर्म भाई

इस मंदिर में तिब्‍बती देवता हूण और लाटू की भी पूजा होती है. उन्‍हें देवी भगवती का धर्मभाई माना जाता है. इस तरह यह स्‍थान हिंदुओं के साथ-साथ तिब्‍बतियों का भी आस्‍था स्‍थल है. इस मंदिर को आदि बद्री भगवती माता मंदिर भी कहा जाता है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक प्रसंग स्थानीय परंपराओं पर आधारित हैं. इनकी ऐतिहासिक पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं की गई है.)

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About the Author

Shraddha Jain

Shraddha Jain

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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