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आश्विन पूर्णिमा कब है? व्रत और गंगा स्‍नान से धन-सौभाग्‍य बढ़ने की है मान्‍यता

आश्विन महीने की पूर्णिमा को साल की सबसे खास पूर्णिमा में से एक माना गया है. अक्‍टूबर के आखिर सप्‍ताह में यह पूर्णिमा तिथि पड़ रही है. जानिए पूर्णिमा पर स्‍नान करने, व्रत रखने की सही तारीख और पूजा मुहूर्त.

Written By Shraddha Jain
Published: Oct 23, 2026, 07:33 AM IST | Updated: Oct 23, 2026, 07:42 AM IST
Image Credit: आश्विन पूर्णिमा की रात को जागकर भगवान विष्‍णु और मां लक्ष्‍मी का स्‍मरण करें, मंत्र जाप करें. (Photo:AI)
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Ashwin Purnima Vrat 2026: साल में 12 पूर्णिमा तिथि आती हैं, इनमें से सभी का अपना अलग महत्‍व है. इनमें से कुछ को विशेष माना गया है, जिसमें आश्विन पूर्णिमा शामिल है. यह पूर्णिमा तिथि आध्‍यात्मिक उन्‍नति देने के साथ-साथ भौतिक सुख, समृद्धि भी देने वाली है. साथ ही आरोग्‍य बढ़ता है. इसलिए इस पूर्णिमा की रात को विशेष माना गया है और लोग रात को घंटों चांदनी रात में खुले आसमान के नीचे बिताते हैं. वहीं इस पूर्णिमा पर व्रत रखने और गंगा स्‍नान करने का भी खूब पुण्‍य मिलता है. जानिए यह पवित्र दिन इस साल किस तारीख को पड़ रहा है.

आश्विन पूर्णिमा तिथि 2026

द्रिक पंचांग के अनुसार, 25 अक्‍टूबर 2026, रविवार की सुबह 11:55 बजे से आश्विन पूर्णिमा तिथि प्रारंभ होगी और 26 अक्‍टूबर 2026, सोमवार की सुबह 09:41 बजे समाप्‍त होती है. पूर्णिमा व्रत उस दिन रखा जाता है, जिस रात को पूर्णिमा तिथि व्‍याप्‍त रहे, जो कि 25 अक्‍टूबर की रात को रहेगी. लिहाजा पूर्णिमा व्रत 25 अक्‍टूबर को रखना उचित होगा.

आश्विन पूर्णिमा पर गंगा स्‍नान मुहूर्त

पूर्णिमा तिथि पर गंगा, यमुना, नर्मदा आदि पवित्र नदियों में स्‍नान का विशेष महत्‍व है. चूंकि स्‍नान मुहूर्त शुभ के होते हैं, लिहाजा आश्विन पूर्णिमा पर स्‍नान की पूर्णिमा 26 अक्‍टूबर को रहेगी.

पूर्णिमा स्‍नान का ब्रह्म मुहूर्त : 26 अक्टूबर 2026 को सुबह 4:46 बजे से 5:38 बजे तक

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 6:29 बजे से सुबह 7:53 बजे तक रहेगा.

(यह भी पढ़ें: शरद पूर्णिमा की रात सोए तो गरीब हो जाओगे, जागे तो मिलेगा धन! क्‍यों कहा जाता है ऐसा?) 

भगवान विष्‍णु और माता लक्ष्‍मी की पूजा

आश्विन पूर्णिमा तिथि पर व्रत रखें और भगवान विष्‍णु और माता लक्ष्‍मी की पूजा करें. संभव हो तो रात में जागकर माता लक्ष्‍मी के मंत्रों का जाप करें. मान्‍यता है कि इस दिन मां लक्ष्‍मी धरती पर भ्रमण करती हैं और सुख, सौभाग्‍य, समृद्धि का वरदान देती हैं.

साथ ही इस पूर्णिमा पर गंगा स्‍नान करने से आध्‍यात्मिक उन्‍नति होती है. जीवन में सुख-शांति बढ़ती है. इस पूर्णिमा की रात को चंद्रमा 16 कलाओं से युक्‍त होता है, जिसकी रोशनी में बैठने से आरोग्‍य बढ़ता है. इसलिए इस रात खुले आसमान के नीचे खीर रखी जाती है. शरद पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा पर्व मनाया जाता है.

आश्विन पूर्णिमा व्रत के दिन चंद्रोदय समय : शाम 05:00 बजे

आश्विन पूर्णिमा व्रत-पूजा विधि और नियम

सुबह जल्‍दी उठकर स्‍नान करें. साफ कपड़े पहनकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का स्‍मरण करते हुए व्रत और पूजा का संकल्‍प लें. फिर विधि-विधान से पूजा करें. भगवान विष्‍णु को धूप, दीप, गंध, पुष्प, तुलसी दल आदि अर्पित कर पूजन करें. मां लक्ष्‍मी को अक्षत, रोली, कमल का फूल आदि अर्पित करें. मंत्र जाप करें, व्रत कथा पढ़ें, आरती करें. इस दिन सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ करना अत्‍यंत शुभ माना गया है.

शाम को फिर से पूजा करके खीर का भोग लगाएं. रात को चंद्रमा को अर्घ्‍य दें, खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखें. पूर्णिमा व्रत का पारण कई लोग रात को चंद्रमा की पूजा के बाद करते हैं, वहीं कुछ लोग अगले दिन करते हैं. लिहाजा अपने परिवार की परंपरा और आचार्य के कहे अनुसार व्रत का पारण करें. भोग की खीर का प्रसाद ग्रहण करें.

(Disclaimer: यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)

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पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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