अक्टूबर से दिसंबर तक... अन्नप्राशन के लिए कितने शुभ मुहूर्त, यहां देखें लिस्ट
Annaprashan Muhurat 2026: हिंदू धर्म में अन्नप्राशन संस्कार का विशेष महत्व माना जाता है. इस समय बच्चे को पहली बार सात्विक और पौष्टिक भोजन कराया जाता है. इससे अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुखमय जीवन की कामना पूरी होती हैं.
Annaprashan Muhurat 2026: हिंदू धर्म में बताए गए 16 संस्कारों में से एक अन्नप्राशन संस्कार का बड़ा महत्व है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अन्नप्राशन संस्कार में बच्चे के जन्म के लगभग छठे या फिर सातवें माह में पहली बार उन्हें अन्न ग्रहण करवाया जाता है. इस शुभ कार्य को पूरे विधि-विधान के साथ और शुभ संयोग व मुहूर्त में करने का विधान है. अन्नप्राशन के खास मौके पर सभी बड़े-बुजुर्ग बच्चे की सुख-समृद्धि और उनकी अच्छी सेहत की भगवान से प्रार्थना करते हैं और उपहार देते हैं. बच्चे को दीर्घायु और सुखमय जीवन पाने का आशीर्वाद देते हैं. साल 2026 अब अपने समापन की ओर हैं. आइए जानें इस साल अक्टूबर, नवंबर दिसंबर में अन्नप्राशन संस्कार के लिए कितने मुहूर्त हैं, कैसे अन्नप्राशन संस्कार करते हैं और इसका महत्व क्या है.
अन्नप्राशन के लिए अक्टूबर 2026 का मुहूर्त
12 अक्टूबर, सोमवार - सुबह 06:50 से लेकर 07:19 बजे तक.
12 अक्टूबर, सोमवार- सुबह 11:57 से लेकर दोपहर 02:01 बजे तक.
21 अक्टूबर, बुधवार - सुबह 06:56 से लेकर दोपहर 07:30 बजे तक.
21 अक्टूबर, बुधवार - सुबह 11:22 से लेकर दोपहर 01:26 बजे तक.
26 अक्टूबर, सोमवार - सुबह 06:59 से लेकर सुबह 08:44 बजे तक.
30 अक्टूबर, शुक्रवार - सुबह 07:03 से लेकर सुबह 08:27 बजे तक.
अन्नप्राशन के लिए नवंबर 2026 का मुहूर्त
11 नवंबर, बुधवार - सुबह 07:11 से लेकर सुबह 07:41 बजे तक.
11 नवंबर, बुधवार - सुबह 09:59 से लेकर दोपहर 12:03 बजे तक.
11 नवंबर, बुधवार - दोपहर 12:03 से लेकर दोपहर 12:08 बजे तक.
16 नवंबर, सोमवार - सुबह 07:15 से लेकर सुबह 07:21 बजे तक.
16 नवंबर, सोमवार - सुबह 09:40 से लेकर सुबह 11:43 बजे तक.
अन्नप्राशन के लिए दिसंबर 2026 का मुहूर्त
14 दिसंबर, सोमवार - सुबह 07:49 से सुबह 09:42 बजे तक.
14 दिसंबर, सोमवार - सुबह 11:36 से दोपहर 01:03 बजे तक.
16 दिसंबर, बुधवार- सुबह 07:42 से सुबह 09:46 बजे तक.
16 दिसंबर, बुधवार-सुबह 09:46 से सुबह 10:38 बजे तक.
अन्नप्राशन संस्कार का महत्व
अन्नप्राशन का मतलब है अनाज का सेवन करने की शुरुआत करना. इस दिन शिशु को विधि-विधान से पहली बार अन्न खिलाया जाता है. अन्नप्राशन संस्कार का एक शिशु के जीवन में बहुत ही गहरा महत्व है. मान्यता है कि माता के माता के गर्भ में रहकर शिशु में मलिन भोजन के जो भी दोष होते हैं उनका नाश अन्नप्राशन संस्कार करने हो जाता है.
कब और कैसे अन्नप्राशन संस्कार करते हैं
जब शिशु 6-7 महीने का होता है तो उसमें इतनी पाचनशक्ति आ जाती है कि वह अन्न को पचा सकता है. ऐसे में जब शिशु 6 या 7 माह का होता है तो उसका अन्नप्राशन संस्कार किया जाता है.