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Ahoi Ashtami 2026: इस साल कब रखा जाएगा अहोई अष्टमी व्रत, क्या है माता अहोई की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त?

Ahoi Ashtami 2026: अहोई अष्टमी का व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और उनके सुख-समृद्धि की कामना पूर्ति के लिए रखती हैं. माताएं अहोई माता की पूजा कर तारों को अर्घ्य देती हैं. आइए जानें अहोई अष्टमी की सही डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि क्या है.

Written By Padma Shree Shubham
Published: Oct 22, 2026, 08:23 PM IST | Updated: Oct 22, 2026, 08:28 PM IST
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Ahoi Ashtami 2026 Date and Muhurat: अहोई अष्टमी पर माताएं इस दिन सुबह से ही व्रत रखती हैं और शाम के समय अहोई माता की उपासना कर संतान की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं. यह व्रत संतान की लंबी उम्र, उसके अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना पूर्ति के लिए किया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अष्टमी तिथि पर रखने का विधान है. इस पर्व पर माताएं तारों को अर्घ्य देती हैं. आइए जानें इस साल यानी 2026 में अहोई अष्टमी व्रत कब रखा जाएगा, माता अहोई की पूजा विधि क्या है और इस दिन किसी शुभ मुहूर्त में पूजा की जाएगी.

अहोई अष्टमी 2026 कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण अष्टमी तिथि की शुरुआत 1 नवंबर 2026, रविवार को दोपहर के समय 02 बजकर 51 मिनट पर होगी और तिथि का समापन 2 नवंबर 2026 को दोपहर 01 बजकर 10 मिनट पर होगा. अहोई अष्टमी पर प्रदोष काल में पूजा करने का विधान है. इस दिन शाम के समय तारों के दर्शन करके व्रत खोला जाता है. ऐसे में अष्टमी तिथि में 1 नवंबर को शाम का समय पड़ रहा है तो अहोई अष्टमी व्रत 1 नवंबर 2026, रविवार को रखना मान्य होगा.

अहोई अष्टमी 2026 शुभ मुहूर्त

अहोई अष्टमी व्रत कब रखा जाएगा- 1 नवंबर 2026, रविवार के दिन.
अष्टमी तिथि प्रारंभ कब होगी- 1 नवंबर को दोपहर के 02:51 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त कब होगी- 2 नवंबर को दोपहर के 01:10 बजे
पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है- शाम के 4:59 बजे से लेकर शाम के 06:15 बजे तक
तारों के दर्शन का समय क्या है- शाम के 05:22 बजे के आसपास का समय.
चंद्रोदय का समय क्या है- रात के 11:05 बजे के आसपास का समय.

अहोई अष्टमी की पूजा विधि

सुबह स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें.
अब अहोई अष्टमी व्रत करने का संकल्प करें.
शाम के समय पूजा स्थल को साफ कर गंगाजल छिड़क दें.
अहोई माता की प्रतिमा को एक चौकी पर स्थापित करें.
मां को रोली, अक्षत, फूल आदि अर्पित करें.
माता को फल, मिठाई और घर में बने पकवानों का भोग चढ़ाएं.
इसके बाद तारे निकल जाएं तो अर्घ्य दें.
अहोई माता की कथा पढ़ें और माता को प्रणाम करें.
अब पारिवारिक परंपरा के अनुसार तारों के दर्शन या चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करें.

अहोई अष्टमी व्रत का धार्मिक महत्व

अहोई अष्टमी का पर्व संतान के प्रति प्रेम और मातृत्व को समर्पित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अहोई माता की पूजा और व्रत रखने से संतान के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है और बच्चों की लंबी उम्र की कामना पूर्ण होती है. उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है.

(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)

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About the Author

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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