1000 साल पहले बिना चूने के कैसे बना मोढेरा सूर्य मंदिर? जानिए गर्भगृह, सूर्यकुंड और यूनेस्को लिस्ट की पूरी कहानी
गुजरात के मेहसाणा में स्थित मोढेरा सूर्य मंदिर 1000 साल पुराना है. ये मंदिर बिना चूने के बना है और अपनी खास मरु-गुर्जर शैली के साथ-साथ सुबह सूर्य की पहली किरण सीधे पड़ने की वजह से जाना जाता है.
भारत में आपने कई ऐसे मंदिरों के बारे में सुना होगा, जिसके इंजीनियरिंग का लोहा पूरी दुनिया मानती है. ऐसा ही एक मंदिर गुजरात के मेहसाणा जिले में देखने को मिलता है. मंदिर का नाम मोढेरा सूर्य मंदिर है, जो करीब 1000 साल पुराना है.
अब इस मंदिर के खासियत की बात करें तो इसे बनाने में चूने या सीमेंट का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं हुआ है. पत्थरों को इंटरलॉकिंग तकनीक से जोड़कर इसे इतना मजबूत बनाया गया कि ये सदियों से सीना ताने खड़ा है.
इसके साथ ही सुबह सूर्य की पहली किरण सीधे मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचती है. सोलंकी शैली का ये अद्भुत ढांचा हमारी प्राचीन कला और खगोलीय ज्ञान की अद्भुत कहानी बयान करता है.
सोलंकी वंश के राजा ने 1026 ईस्वी में कराया था निर्माण
इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण सोलंकी वंश के प्रतापी राजा भीमदेव प्रथम ने 1026-27 ईस्वी के आसपास कराया था. सोलंकी राजवंश सूर्यदेव को अपना कुलदेवता मानता था.
इसलिए राजा ने अपने कुलदेवता की पूजा के लिए इस भव्य मंदिर को बनवाया. पूरा मंदिर मुख्य रूप से तीन बड़े हिस्सों में बंटा हुआ है.
इसमें सबसे आगे सूर्य कुंड, बीच में सभा मंडप और अंत में गर्भगृह स्थित है. ये तीनों हिस्से पूर्व से पश्चिम दिशा में एक दम सीधी रेखा में बने हैं. इसमें धार्मिक आस्था के साथ-साथ गणित का भी बेहतरीन इस्तेमाल किया गया है.
52 स्तंभ बताते हैं साल के हफ्ते और 24 पिलर दिखाते हैं घंटे
मंदिर के सामने बने सूर्य कुंड के चारों तरफ 108 छोटे-बड़े मंदिर बने हैं. कुंड के ठीक बाद सभा मंडप आता है, जिसकी दीवारों और खंभों पर बहुत बारीक नक्काशी की गई है.
सभा मंडप में 52 नक्काशीदार स्तंभ बने हैं. ये खंबे साल के 52 हफ्तों का प्रतीक माने जाते हैं. इन पर रामायण और महाभारत के प्रसंगों को सुंदर तस्वीरों में उकेरा गया है.
मंदिर के सबसे अंदरूनी हिस्से में गर्भगृह है, जहां सूर्यदेव की मुख्य प्रतिमा विराजमान थी. गर्भगृह में बने 24 स्तंभ दिन के 24 घंटों को दर्शाते हैं.
ब्रह्म पुराण में जिक्र और भगवान राम से जुड़ी पौराणिक कथा
मोढेरा की इस पावन भूमि का उल्लेख ब्रह्म पुराण और स्कंद पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार लंकापति रावण का वध करने के बाद भगवान श्रीराम पर ब्रह्म हत्या का पाप लगा था.
इस पाप से मुक्ति पाने के लिए प्रभु राम खुद इस स्थान पर आए थे. उन्होंने यहां आकर विशेष पूजा की और स्नान किया था.
यही वजह है कि श्रद्धालु आज भी मकर संक्रांति के पावन पर्व पर यहां पहुंचते हैं. लोग सूर्य कुंड के पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगाते हैं.
देश के तीन प्रमुख सूर्य मंदिरों में से एक है मोढेरा
भारत में वैसे तो कई धार्मिक स्थल हैं, लेकिन मुख्य सूर्य मंदिर केवल तीन जगहों पर ही स्थित हैं. पहला उड़ीसा का विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर है. दूसरा जम्मू में स्थित मार्तंड सूर्य मंदिर है और तीसरा गुजरात का यह मोढेरा सूर्य मंदिर है.
मोढेरा के इस मंदिर की वास्तुकला इतनी शानदार है कि हर साल जनवरी के महीने में गुजरात सरकार यहां उत्तरार्ध महोत्सव मनाती है. इस दौरान देश भर के नामी कलाकार मंदिर परिसर में शास्त्रीय नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियां देते हैं.
यूनेस्को की सूची में शामिल और ASI कर रहा देखभाल
इस प्राचीन मंदिर के अभूतपूर्व महत्व को देखते हुए यूनेस्को ने दिसंबर 2022 में इसे विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची में शामिल किया था. वर्तमान में इस ऐतिहासिक धरोहर की देखरेख और संरक्षण की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) संभाल रहा है.
1000 साल का लंबा समय बीत जाने के बाद भी ये मंदिर भारतीय वास्तुकला का लोहा मनवा रहा है. अपनी अनोखी बनावट के कारण यह मंदिर आज भी दुनिया भर के पर्यटकों और शोधकर्ताओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
(Disclaimer): यह रिपोर्ट ऐतिहासिक तथ्यों, पुराणों में वर्णित संदर्भों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की आधिकारिक जानकारियों पर आधारित है.
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