आग बुझी, लेकिन सवाल सुलग रहे: सेठी कॉम्प्लेक्स में फायर NOC से 3.87 करोड़ के सिस्टम तक उठे 3 बड़े सवाल
Rajasthan News: सेठी कॉम्प्लेक्स की आग बुझ गई, लेकिन फायर सेफ्टी पर बड़े सवाल छोड़ गई. पुरोहितजी के कटला में तारों के जाल, अतिक्रमण और फायर सिस्टम की खामियां सामने आईं. अब फायर NOC की जांच और करोड़ों के सिस्टम की जांच होगी.
Jaipur News: सेठी कॉम्प्लेक्स की आग बुझ गई, लेकिन इसने पुरोहितजी के कटला के फायर सिस्टम से लेकर दुकानों की फायर एनओसी, तारों के जाल और रास्तों के अतिक्रमण तक कई सवाल सुलगा दिए हैं. शनिवार को स्वायत्त शासन सचिव रवि जैन मौके पर पहुंचे तो व्यापारियों ने उन्हें बाजार की हकीकत दिखाई. कहीं बेतरतीब बिजली के तार थे, कहीं रास्तों में अतिक्रमण और फायर हाइड्रेंट सिस्टम की हालत भी सवालों में थी. इसके बाद नगर निगम को सेठी कॉम्प्लेक्स, पुरोहितजी के कटला और आसपास के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में फायर NOC की जांच का अभियान चलाने के निर्देश दिए गए. जिन प्रतिष्ठानों के पास जरूरी फायर NOC नहीं मिलेगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी. साथ ही प्रतिष्ठानों में जरूरी अग्निशमन इंतजाम सुनिश्चित कराने को कहा गया है. लेकिन इस अभियान के बीच बड़ा सवाल उस 3.87 करोड़ रुपए के फायर फाइटिंग सिस्टम का भी है, जिसे आग जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए ही तैयार किया गया था. इसकी लाइन सिर्फ पुरोहितजी के कटला तक सीमित नहीं है, बल्कि बापू बाजार, जौहरी बाजार और नेहरू बाजार तक फैली हुई है. यानी सेठी कॉम्प्लेक्स की आग में सामने आई कमियां अकेले एक बाजार का मुद्दा नहीं हैं, इससे परकोटे के तीन अन्य प्रमुख बाजारों की फायर सेफ्टी भी जुड़ी है.
टेस्टिंग में लीकेज और प्रेशर की समस्या, फिर सिस्टम हैंडओवर कैसे हुआ?
फायर सिस्टम को लेकर सबसे अहम सवाल इसकी टेस्टिंग और हैंडओवर पर खड़ा हो रहा है. सिस्टम की टेस्टिंग के दौरान लाइन में लीकेज की समस्या सामने आई थी. इसे ठीक करने के बाद दोबारा टेस्टिंग की गई तो पर्याप्त प्रेशर नहीं बनने की समस्या बताई गई, क्योंकि लाइन अलग-अलग जगह से लीकेज थी. प्रोजेक्ट की योजना ही इस उद्देश्य से बनाई गई थी कि परकोटे में आग लगने पर दमकलों को पानी भरने के लिए ट्रैफिक से गुजरकर घाटगेट फायर स्टेशन तक नहीं जाना पड़े. कटले में बने सिस्टम से दमकलों को भी पानी उपलब्ध कराया जा सकता था. इससे आग लगने और उस पर प्रभावी कार्रवाई के बीच का समय कम होना था. अब दो अधिकारियों पर कार्रवाई के बाद सवाल यह भी उठ रहा है कि प्रोजेक्ट की प्लानिंग, टेंडर, निर्माण, टेस्टिंग और हैंडओवर के दौरान इसकी निगरानी किस स्तर पर हुई और पहले सामने आई तकनीकी कमियों के बावजूद सिस्टम किस स्थिति में सौंपा गया? तीन सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट में इन सवालों के जवाब भी अहम होंगे.
कटले में तारों का जाल देख निर्देश- इन्हें जल्द व्यवस्थित करो
स्वायत्त शासन विभाग के सचिव रवि जैन के साथ पूरी टीम के निरीक्षण के दौरान पूरे बाजार में बेतरतीब बिजली के तार दिखाई दिए. रवि जैन ने इन्हें जल्द व्यवस्थित कराने के निर्देश दिए. रास्तों में स्थायी और अस्थायी अतिक्रमण हटाने को भी कहा गया है. खास बात यह है कि अतिक्रमण हटाने के बाद दोबारा कब्जा नहीं हो, इसके लिए गार्ड लगाने के निर्देश भी दिए गए. रवि जैन ने आग लगने वाले स्थान का भी जायजा लिया. व्यापारियों ने उन्हें आग के दौरान आई परेशानियां बताईं. अधिकारियों से कहा गया कि पूरे फायर सिस्टम को दुरुस्त किया जाए और उसके बाद मॉकड्रिल कर यह भी परखा जाए कि वास्तविक आपात स्थिति में सिस्टम कितना कारगर है. इसकी जरूरत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि पुरोहितजी के कटला में प्रतिदिन हजारों लोग आते हैं. जिस दिन आग लगी, उस समय सुबह होने के कारण अधिकांश दुकानें बंद थीं. ऐसे में सवाल है कि यही हादसा बाजार के पीक टाइम में होता तो संकरे रास्तों, अतिक्रमण और तारों के जाल के बीच हालात क्या होते?
18 दुकानों में नुकसान, दो अधिकारी सस्पेंड, अब जांच रिपोर्ट का इंतजार
प्रशासन के मुताबिक अग्निकांड में 18 दुकानों में नुकसान हुआ है. आग लगने वाले ब्लॉक को फिलहाल बंद रखा गया है. घटना के बाद मुख्य अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र मीणा और सहायक अग्निशमन अधिकारी कुलदीप माणतवाल को निलंबित किया जा चुका है. पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है. निरीक्षण के दौरान निगम आयुक्त ओम कसेरा सहित डीएलबी और नगर निगम के अधिकारी मौजूद रहे.
दिवाली का माल राख में, व्यापारी तलाशते रहे बचा हुआ सामान
एक तरफ अधिकारी सिस्टम की खामियां तलाश रहे थे, दूसरी तरफ आग से प्रभावित व्यापारी जली दुकानों से बचा हुआ माल समेटते दिखाई दिए. त्योहार से पहले कई व्यापारियों ने बड़ी मात्रा में स्टॉक भरा था. किसी ने बैंक से कर्ज लिया तो किसी ने उधार माल मंगाया था. जिस बाजार में कुछ सप्ताह बाद दिवाली की रोशनी और ग्राहकों की भीड़ होनी थी, वहां कई दुकानों में अभी जले सामान और राख के ढेर हैं. व्यापारियों के सामने अब कारोबार दोबारा खड़ा करने की चुनौती है. सेठी कॉम्प्लेक्स की आग ने इसलिए सिर्फ दुकानों का नुकसान नहीं किया है. उसने एक साथ तीन सवाल खड़े कर दिए हैं-दुकानों के पास फायर NOC थी या नहीं, करोड़ों का फायर सिस्टम आपात स्थिति के लिए कितना तैयार था और जिन खामियों का पता टेस्टिंग में चल गया था, वे आग लगने से पहले दूर क्यों नहीं हुईं? अब जांच की असली कसौटी इन्हीं सवालों के जवाब होंगे.