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जोधपुर में मूक-बधिर बच्चों का अनोखा गरबा: बिना संगीत सुने डांडिया की ताल पर थिरके कदम, उत्साह देख हर कोई हुआ भावुक

Jodhpur Garba: जोधपुर में नवरात्र के दौरान मूक-बधिर बच्चों का अनोखा गरबा उत्सव आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. पोलो पावटा क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 100 से 150 बच्चे संगीत सुने बिना लय और कंपन महसूस करते हुए गरबा और डांडिया किए. खास बात यह है कि बच्चों ने आपसी सहयोग से आयोजन की जिम्मेदारी भी संभाली.

Edited By Aman Singh
Published: Oct 15, 2026, 11:20 PM IST | Updated: Oct 16, 2026, 01:56 PM IST
Image Credit: JODHPUR NEWS
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Jodhpur Garba: नवरात्र में मां दुर्गा की भक्ति, शक्ति और आराधना के लिए शहरभर में गरबे के पांडाल सजे हैं. कहीं ढोल की थाप है, तो कहीं डांडिया की खनक, लेकिन सूर्यनगरी जोधपुर में एक ऐसा गरबा पांडाल भी है, जहां न तो बच्चों को संगीत की आवाज सुनाई देती है और न ही वे अपनी खुशी को शब्दों में बयां कर सकते हैं. इसके बावजूद मां दुर्गा की भक्ति में इन बच्चों का उत्साह देखते ही बनता है. इनकी मुस्कान, कदमों की लय और डांडिया की ताल हर किसी का दिल जीत रही है.

साउंड सुनाई नहीं देता, फिर भी ताल पर थिरकते हैं बच्चे

ज़ी मीडिया की टीम जब पोलो पावटा क्षेत्र में आयोजित इस अनूठे गरबा उत्सव में पहुंची, तो नजारा देखकर हर कोई हैरान रह गया. यहां करीब 100 से 150 मूक-बधिर बच्चे गरबा करते नजर आए. ये बच्चे संगीत को सुन नहीं सकते, लेकिन उसकी लय और कंपन को महसूस करते हुए एक-दूसरे के साथ कदम मिलाकर नृत्य कर रहे हैं. कोई गरबा की गोलाकार लय में घूम रहा है, तो कोई साथी के साथ डांडिया खेलकर अपनी खुशी जाहिर कर रहा है.

इन बच्चों के चेहरों पर खिलती मुस्कान और गरबे के प्रति उत्साह इस बात का अहसास कराता है कि खुशियां महसूस करने के लिए आवाज सुनना या शब्दों में अपनी बात कहना जरूरी नहीं है. जरूरत है तो बस जज्बे, आत्मविश्वास और अपनों के साथ की.

बच्चों ने खुद संभाली आयोजन की जिम्मेदारी

इस आयोजन की खास बात यह भी है कि गरबे का पूरा कार्यक्रम बच्चों ने आपसी सहयोग से आयोजित किया. अपनी सीमाओं को पीछे छोड़कर इन बच्चों ने साबित किया कि इच्छाशक्ति हो, तो हर चुनौती का सामना किया जा सकता है. गरबे के दौरान बच्चे एक-दूसरे के इशारों को समझते हुए तालमेल बनाते हैं और पूरे उत्साह के साथ उत्सव का आनंद लेते हैं.

परिजनों और समाज का मिल रहा साथ

इस आयोजन में धीरज सुथार, रेखा शर्मा और नवनीत कुमार महेश गहलोत रवि शर्मा सहित अन्य सहयोगी बच्चों का हौसला बढ़ा रहे हैं, उनके बच्चे भी इस आयोजन में शामिल हैं. परिजनों और आसपास के लोगों के सहयोग से बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने और समाज के साथ उत्सव मनाने का अवसर मिल रहा है.

भक्ति में शब्द नहीं, भावना जरूरी

नवरात्र के इस माहौल में इन बच्चों का गरबा समाज को एक खास संदेश दे रहा है. मां दुर्गा की आराधना के लिए न आवाज जरूरी है, न शब्दों की अभिव्यक्ति. सच्ची भक्ति दिल से महसूस की जाती है. पोलो पावटा का यह गरबा पांडाल सिर्फ नृत्य और डांडिया का आयोजन नहीं, बल्कि हौसले, समानता और खुशियों का उत्सव बन गया है. इन बच्चों के थिरकते कदम बता रहे हैं कि जिंदगी का संगीत कानों से नहीं, दिल से महसूस किया जाता है.

REPORTER- RAKESH KUMAR BHARDWAJ

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About the Author

जून 2023 से ज़ी राजस्थान के साथ कार्यरत अमन लगातार अपनी क्रिएटिविटी और प्रोफेशनल स्किल्स के जरिए पाठकों तक तेज, सटीक और भरोसेमंद खबरें पहुंचा रहे हैं. वे उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले हैं, अमन ने जौनपुर से ही अपनी इंटरमीडिएट तक की शिक्षा पूरी की. इसके बाद उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया. डिजिटल पत्रकारिता में गहरी समझ, तेज खबर पकड़ने की क्षमता के कारण अमन सिंह एक उभरते हुए और भरोसेमंद मीडिया प्रोफेशनल के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहे हैं.
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