राजस्थान में पर्यटन को सुरक्षित बनाने और देशी-विदेशी पर्यटकों को बेहतर सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए पुलिस विभाग पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है. इस योजना में स्वर्ण नगरी जैसलमेर में भी पुलिस द्वारा पर्यटक पुलिस थाना खोलने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है.
सितंबर 2026 में राजस्थान पुलिस मुख्यालय में हुई समीक्षा बैठक के बाद जैसलमेर में पर्यटक पुलिस थाने स्थापित करने के प्रस्तावों पर आगे कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए. अब इस प्रस्ताव को लेकर सरकार भी चिंतन और मंथन कर रही है. आने वाले समय में जैसलमेर में जल्द ही पर्यटक पुलिस थाना खोलने का अनुमान लगाया जा रहा है, जिससे जैसलमेर में प्रतिवर्ष यहां आने वाले देसी व विदेशी पर्यटकों को आने वाली समस्याओं से निजात मिलेगी. वहीं इस पर्यटक पुलिस थाने के स्थापित करने से पर्यटक स्थलों पर लपकागिरी के साथ ही अन्य कई समस्याओं से पर्यटकों को निजात मिलने की उम्मीद है.
जैसलमेर को स्वर्णनगरी के नाम से जाना जाता है. यहां सोनार दुर्ग, गड़ीसर झील, पटवों की हवेली, सम के रेतीले धोरों, खुहड़ी और तनोट माता मंदिर जैसे पर्यटन एवं धार्मिक स्थल हैं. पर्यटन सीजन में यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. ऐसे में पर्यटक पुलिस थाना स्थापित होने से पर्यटकों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई, पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा और पर्यटकों को स्थानीय स्तर पर पुलिस सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है.
जैसलमेर टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण पुरोहित ने बताया कि अगर जैसलमेर में पर्यटक पुलिस थाना स्थापित होने से पर्यटन क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलाव आ सकते हैं. इस पर्यटक पुलिस थानों की स्थापना से पर्यटक सहायता केंद्र, सीसीटीवी कैमरे, महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती और आपातकालीन सहायता जैसी व्यवस्थाओं पर जोर दिया जा रहा है.
पर्यटकों को होटल, टैक्सी, कैंप, सफारी या अन्य पर्यटन सेवाओं के नाम पर कथित रूप से ठगी का सामना करना पड़ता है, तो वे पुलिस से शिकायत कर सकेंगे. पर्यटक पुलिस की प्रभावी व्यवस्था शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई में मदद कर सकती है.
जैसलमेर में पर्यटकों को अनावश्यक रूप से घेरने, होटल या कैंप में ठहरने के लिए दबाव बनाने अथवा कमीशन के लिए परेशान करने की शिकायतों पर निगरानी और कार्रवाई की जा सकती है. हालांकि, केवल पर्यटक थाना खुलने से लपकागिरी पूरी तरह समाप्त होने की गारंटी नहीं है. इसके लिए नियमित गश्त, शिकायतों पर कार्रवाई और नियमों का प्रभावी पालन भी जरूरी होगा.
विदेशी पर्यटकों को भाषा, स्थानीय रास्तों, परिवहन और पुलिस प्रक्रिया को समझने में परेशानी हो सकती है. प्रशिक्षित पुलिसकर्मी और बहुभाषी सहायता उपलब्ध होने से उन्हें आसानी होगी. महिला पर्यटकों के साथ छेड़छाड़, पीछा करने या अन्य दुर्व्यवहार की शिकायतों पर त्वरित सहायता उपलब्ध कराने में विशेष व्यवस्था मददगार हो सकती है. राजस्थान पुलिस ने पर्यटन स्थलों पर महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती पर भी जोर दिया है.
पर्यटकों को शिकायत दर्ज कराने या मदद लेने के लिए सही पुलिस थाने की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा. बशर्ते पर्यटक थाने की सीमा, संपर्क नंबर और कार्यप्रणाली स्पष्ट रूप से निर्धारित हो. सुरक्षित माहौल बनने से पर्यटकों का भरोसा बढ़ सकता है. इससे होटल, रेस्टोरेंट, ट्रैवेल एजेंसी, टैक्सी संचालक, टूर गाइड और डेजर्ट कैंप जैसे व्यवसायों को भी लाभ मिल सकता है. जैसलमेर में पर्यटक पुलिस थाना खुलने से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का अवसर मिलेगा, लेकिन पर्यटकों की सुरक्षा केवल एक थाने पर निर्भर नहीं करती. राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने पर्यटन स्थलों के सुरक्षा ऑडिट, सीसीटीवी कवरेज, पर्यटक सहायता केंद्र और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने के निर्देश भी दिए हैं.
राजस्थान में पर्यटक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में जैसलमेर और सवाई माधोपुर में पर्यटक पुलिस थाने स्थापित करने के प्रस्तावों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं. जैसलमेर में यह व्यवस्था लागू होने पर लपकागिरी, पर्यटकों से कथित ठगी और पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा संबंधी शिकायतों से निपटने में मदद मिल सकती है.
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जैसलमेर में पर्यटक पुलिस थाने को अंतिम स्वीकृति कब मिलेगी, यह कहां स्थापित होगा और इसके लिए कितने पुलिसकर्मियों की नियुक्ति होगी. इन बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी के लिए राजस्थान पुलिस मुख्यालय या जिला पुलिस प्रशासन का आधिकारिक आदेश आवश्यक है.