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टोंक का अनोखा मंदिर: लाल फूल गिरने पर पूरी होती है मनोकामना, गुरु द्रोणाचार्य ने की थी यहां तपस्या!

टोंक जिले के दूनी गांव में स्थित 900 साल से अधिक पुराने दूणजा माता मंदिर में नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. मान्यता है कि यहां देवी मां को शराब का भोग लगाया जाता है और माता की प्रतिमा सुरापान करती है. भक्तों का विश्वास है कि लाल फूल गिरने पर उनकी मनोकामना पूरी होती है.

Written By Zee Rajasthan Web Team
Published: Oct 18, 2026, 09:01 PM IST | Updated: Oct 18, 2026, 09:06 PM IST
Image Credit: दूणजा माता मंदिर
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नवरात्रि चल रहे हैं. इस दौरान कई जगहों पर शराब की दुकानें बंद करने की लगातार मांग उठ थी रहती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि राजस्थान में एक ऐसा मंदिर है, जहां देवी मां को भोग में शराब चढ़ाई जाती है. यहां देवी सुरापान करती हैं. इस दौरान पूरा मंदिर भक्तों के जयकारों से गूंज उठता है. 

प्रदेश का यह दूणजा माता मंदिर बहुत ही प्राचीन है. मान्यता है कि इसी जगह पर गुरु द्रोणाचार्य ने कभी तपस्या की थी. वैसे तो सालभर मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ती है लेकिन नवरात्रों में 9 दिनों तक यहां का नजारा अलग ही होता है.

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चमत्कारी दूणजा माता को लगता है शराब का भोग
दूणजा माता का यह मंदिर टोंक जिले के दूनी गांव में है. यहां माता को शराब का भोग लगाया जाता है. मां की प्रतिमा से अलग लाल फूल गिर जाए तो समझिए कि भक्त की हर मुराद देवी पूरी कर देंगी. लोगों का मानना है कि दूणजा माता मंदिर में सालों से चमत्कार होता आया है. यही वजह है कि बड़ी तादात में भक्त यहां अपनी मुराद लेकर पहुंचते हैं. सुरापान करने वाली दूणजा माता के मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई है.

माता को ऐसे चढ़ाई जाती है शराब
इस प्राचीन मंदिर में भक्त अपनी अर्जी पूरी होने के बाद शराब की बोतल लेकर पहुंचते हैं. मंदिर में पुजारी के हाथों पीपल के पत्ते के सहारे माता जी के मुंह पर शराब की धार लगाई जाती है. मान्यता है कि दूणजा माता की चमत्कारी प्रतिमा शराब का भोग ग्रहण करने लगती है. यह परंपरा यहां सालों से चली आ रही है.

दूणजा माता का मंदिर टोंक जिले के दूनी गांव में प्राचीन तालाब के किनारे मौजूद है. इस मंदिर में चैत्र और शारदीय नवरात्रों में भक्तों की भीड़ भारी संख्या में उमड़ती है. इस मंदिर से लोगों की आस्था जुड़ी होने के साथ ही यहां चमत्कार भी देखने को मिलते हैं. यह मंदिर सुरापान करने वाली दूणजा माता जी के नाम से प्रसिद्ध है.

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मंदिर का 900 साल से ज्यादा पुराना इतिहास
मंदिर ट्रस्ट के सत्यनारायण शर्मा बताते हैं कि यहां बारह महीने श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. यह प्राचीन दूणजा माता मंदिर का इतिहास महर्षि द्रोणचार्य की साधना-तपोबल से जुड़ा हुआ है. दूनी कस्बे का नाम पहले द्रोणनगरी था. इस प्राचीन मंदिर का इतिहास करीब 900 साल से ज्यादा पुराना है. इस मंदिर में चार फीट की दूणजा माता की प्रतिमा स्थापित है.

खुद अवतरित हुई थी मां की प्रतिमा 
लोक कथाओं के अुनसार माता स्वयं पाषाण की प्रतिमा में परिवर्तित हुई थीं. इस मंदिर के चमत्कार को देखकर अंग्रेज अफसरों ने माता के मंदिर में प्रतिमा के सुरापान की जांच के लिए खुदाई करवाई थी, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला. दूणजा माता मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष भंवरलाल जाट के अनुसार मंदिर के चढ़ावे की राशि से मंदिर के विकास के प्रयास लगातार जारी हैं, जिसके चलते अब धर्मशाला और बरामदों का निर्माण किया जा रहा है.

टोंक जिले का यह प्राचीन मंदिर सैकड़ों सालों से लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहां तक कि गांवों के झूठ सच से जुड़े कई मामलों को लेकर भी लोग कहते है कि तू सच्चा है तो माता के दरबार में चलकर कसम खा. माना जाता है कि झूठ बोलने वाले और अन्यायी को माता रानी खुद दंड देती हैं.

Report-Bhupendra Singh Solanki

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