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250 से ज्यादा बसें, 5 हजार यात्री रोजाना कर रहे सफर, Deputy CM के निर्देशों के बाद भी नहीं सुधरी टोंक बस स्टैंड की हालत

Tonk Roadways Bus Stand: टोंक रोडवेज बस स्टैंड पर दो साल से टिकट काउंटर बंद है. रोजाना 250 से अधिक बसों और 5 हजार से ज्यादा यात्रियों की आवाजाही के बावजूद रोशनी, साफ-सफाई और सुरक्षा जैसी सुविधाओं की कमी है. उपमुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद भी सुधार का इंतजार है.

Written By Ansh Raj
Published: Oct 21, 2026, 12:13 PM IST | Updated: Oct 21, 2026, 12:15 PM IST
Image Credit: Tonk Roadways Bus Stand
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टोंक जिले के केंद्रीय रोडवेज बस स्टैंड पर मूलभूत सुविधाओं की कमी यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है. कभी खूबसूरत बस स्टैंड के रूप में पहचान रखने वाला यह बस स्टैंड आज टिकट बुकिंग, साफ-सफाई, रोशनी और अन्य जरूरी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है. यहां रोजाना 250 से अधिक बसों का आवागमन होता है और 5 हजार से ज्यादा यात्रियों की आवाजाही रहती है. इसके बावजूद बस स्टैंड की व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है.

टोंक रोडवेज बस स्टैंड पर पिछले करीब दो साल से टिकट काउंटर बंद होने की समस्या सामने आ रही है. टिकट बुकिंग की सुविधा नहीं मिलने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. खासकर बुजुर्ग यात्रियों को सीट की अग्रिम बुकिंग नहीं होने के कारण असुविधा होती है. यात्रियों का कहना है कि बस स्टैंड पर नियमित टिकट बुकिंग व्यवस्था बहाल की जानी चाहिए, ताकि यात्रा के दौरान होने वाली परेशानी कम हो सके. रोजाना हजारों यात्रियों की आवाजाही वाले बस स्टैंड पर टिकट काउंटर बंद होने से सुविधा का अभाव महसूस किया जा रहा है. यात्रियों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग इस समस्या पर ध्यान देकर टिकट बुकिंग व्यवस्था शुरू करेगा.

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रात में अंधेरा, महिला यात्रियों को असुरक्षा
बस स्टैंड परिसर में रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने की शिकायत भी सामने आई है. अंधेरे के कारण यात्रियों को परेशानी होती है. रात में बसों का इंतजार करने वाली महिला यात्रियों को भी असुरक्षा महसूस होती है. ऐसे में परिसर में पर्याप्त लाइटें लगाने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है. यात्रियों की सुविधा के लिए बस स्टैंड परिसर में रोशनी की समुचित व्यवस्था जरूरी है. रात के समय बसों का इंतजार करने वाले लोगों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने के लिए भी व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता है.

गंदगी और आवारा पशुओं से बढ़ रही परेशानी
बस स्टैंड परिसर में जगह-जगह गंदगी और आवारा श्वानों व गायों की आवाजाही भी यात्रियों की परेशानी बढ़ा रही है. यात्रियों के आने-जाने वाले स्थानों पर साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बस स्टैंड की छवि प्रभावित हो रही है. परिसर में नियमित सफाई और आवारा पशुओं की समस्या का समाधान किए जाने की जरूरत है. रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही को देखते हुए बस स्टैंड पर साफ-सुथरा वातावरण बनाए रखना जरूरी है.

उपमुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद भी सुधार का इंतजार
बताया जा रहा है कि उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के दौरे के दौरान बस स्टैंड की व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए गए थे. इसके बावजूद यात्रियों को अब तक अपेक्षित सुधार का इंतजार है. ऐसे में बस स्टैंड की व्यवस्थाओं को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. यात्रियों की समस्याओं को देखते हुए टिकट काउंटर शुरू करने, पर्याप्त रोशनी उपलब्ध कराने, नियमित साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है. बस स्टैंड पर इन सुविधाओं की उपलब्धता से यात्रियों को राहत मिल सकती है.

कब सुधरेगी टोंक बस स्टैंड की हालत?
टोंक रोडवेज बस स्टैंड पर रोजाना 250 से अधिक बसों और 5 हजार से ज्यादा यात्रियों की आवाजाही होती है. इसके बावजूद टिकट बुकिंग, रोशनी, साफ-सफाई और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर समस्याएं सामने आ रही हैं. उपमुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद भी सुधार का इंतजार बना हुआ है. अब सवाल यह है कि संबंधित विभाग इन समस्याओं पर कब ध्यान देगा और यात्रियों को जरूरी सुविधाएं कब मिलेंगी. यात्रियों को उम्मीद है कि बस स्टैंड की व्यवस्थाओं में सुधार कर इसे फिर से बेहतर बनाया जाएगा, ताकि यहां आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े.

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अंश राज Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर उनकी पैनी नजर रहती है. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर से जुड़ी खबरों में उनकी खास दिलचस्पी है. नई चीजों को सीखने की फिराक में रहते हैं. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनावों और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बड़े बयान तक, अंश राज खबरों की नब्ज पर नजर रखते हैं. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करना और किसी भी स्टोरी को ज्यादा प्रभावी और रोचक अंदाज में पेश करना उनकी खासियत है. खबर को सिर्फ लिखना नहीं, बल्कि उसे बेहतर तरीके से पैकेज कर दर्शकों तक पहुंचाना उनके काम का अहम हिस्सा है.  डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव रखने वाले अंश राज इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है. खबरों की गंध को सबसे पहले पहचानना, उसकी तह तक पहुंचना और उसे सबसे पहले, सबसे तेज और सबसे बेहतर तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना... यही अंश राज की पहचान है.
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