Tarang Shakti 2026: 30 हजार किमी दूर से जोधपुर पहुंची फ्रांसीसी टुकड़ी, तेजस में उड़ान भर बोले- मिराज-2000 की आई याद
जोधपुर एयरबेस पर चल रहे बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास तरंग शक्ति 2026 में भारत और फ्रांस के एयरक्रू ने अपने ऑपरेशनल अनुभव साझा किए. भारतीय तेजस के साथ उड़ान भरने के बाद फ्रांस के एयर डिफेंस एंड एयर ऑपरेशनल कमांड के डिप्टी कमांडर मेजर जनरल जूलियन सबेने ने कहा कि तेजस ने उन्हें अपने लड़ाकू विमान पायलट के दिनों के मिराज-2000 की याद दिला दी. उन्होंने दोनों देशों के स्वदेशी लड़ाकू विमान विकसित कर उन्हें ऑपरेट करने को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया. अभ्यास के दौरान एयरक्रू को अलग-अलग विमानों, तकनीक और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिला. फ्रांसीसी अधिकारी ने रफाल में हवा से ईंधन भरने की प्रक्रिया का भी अवलोकन किया.
Tarang Shakti 2026: जोधपुर एयरबेस पर चल रहे बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास तरंग शक्ति 2026 में भारत और फ्रांस की वायु सेनाओं के बीच ऑपरेशनल अनुभव साझा करने का सिलसिला जारी है. भारतीय तेजस लड़ाकू विमान के साथ उड़ान भरने के बाद फ्रांस के एयर डिफेंस एंड एयर ऑपरेशनल कमांड के डिप्टी कमांडर मेजर जनरल जूलियन सबेने ने अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने कहा कि तेजस के साथ उड़ान भरने के दौरान उन्हें अपने लड़ाकू विमान पायलट के दिनों के मिराज-2000 की याद आ गई.
मेजर जनरल जूलियन सबेने के मुताबिक, भारत और फ्रांस के बीच वायुसेना का सहयोग लंबे समय से चला आ रहा है. उन्होंने कहा कि फ्रांस की तरह भारत ने भी अपना स्वदेशी लड़ाकू विमान विकसित किया है और उसे खुद ऑपरेट किया है. उनके अनुसार यह दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है. तरंग शक्ति जैसे अभ्यासों के जरिए दोनों देशों के एयरक्रू को एक-दूसरे के विमानों, तकनीकी क्षमताओं और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं को करीब से समझने का अवसर मिलता है.
सबेने ने बताया कि यह उनकी पहली भारत यात्रा है. फ्रांस से करीब 30 हजार किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद उनकी टुकड़ी जोधपुर पहुंची है. उन्होंने भारत और फ्रांस के बीच वायुसेना सहयोग के इतिहास का भी उल्लेख किया. उनके अनुसार भारतीय वायुसेना ने वर्ष 1952 में फ्रांसीसी ऑरागन विमान के जरिए फ्रांसीसी उपकरणों का इस्तेमाल शुरू किया था.
भारत और फ्रांस के लिए रफाल लड़ाकू विमान भी महत्वपूर्ण कड़ी है. दोनों देशों ने रफाल का युद्ध अभियानों में इस्तेमाल किया है. ऐसे में वास्तविक ऑपरेशनल अनुभव और युद्ध से मिले सबक को साझा करना दोनों देशों के लिए उपयोगी माना जा रहा है. अभ्यास के दौरान इसी तरह के अनुभवों और प्रक्रियाओं को समझने पर जोर दिया जा रहा है.
तरंग शक्ति 2026 में अलग-अलग प्लेटफॉर्म और एयरक्रू को एक साथ ऑपरेट करने के साथ-साथ तालमेल और इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है. मेजर जनरल सबेने ने एफ-1 से ऑब्जर्वर के तौर पर उड़ान भरी और इस दौरान रफाल में हवा से ईंधन भरने की प्रक्रिया को देखा. उन्होंने इस प्रक्रिया को सफल बताया.
उन्होंने कहा कि लार्ज-फोर्स एंगेजमेंट जैसे अभ्यास अलग-अलग प्लेटफॉर्म और एयरक्रू के बीच तालमेल को वास्तविक युद्ध जैसे माहौल में परखने का अवसर देते हैं. तरंग शक्ति 2026 के दौरान भारत और फ्रांस के एयरक्रू के बीच यह साझा अनुभव दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच ऑपरेशनल समझ और समन्वय को प्रदर्शित करता है.