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हादसे रोकना मुश्किल! लेकिन जान बचाने की कोशिश तेज, सड़क सुरक्षा फंड से बढ़ेंगी सुविधाएं

Rajasthan Road Safety: राजस्थान में सड़क हादसों की संख्या कम करने के साथ अब हादसों में होने वाली मौतों को रोकने पर भी जोर दिया जा रहा है. परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग ने चिकित्सा विभाग से जुड़े 37.73 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी है. मेडिकल स्टाफ की इमरजेंसी ट्रेनिंग, BLS सेंटर और ट्रॉमा सुविधाओं को मजबूत करने की तैयारी है.

Edited By Ansh Raj
Published: Sep 01, 2026, 04:18 PM IST | Updated: Sep 01, 2026, 04:20 PM IST
Image Credit: Rajasthan Road Accident Deaths
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Rajasthan Road Accident Deaths: राजस्थान में सड़क हादसों पर पूरी तरह लगाम लगाना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है. सड़क सुरक्षा के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन हादसों में कमी नहीं आ पा रही है. ऐसे में अब परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग का फोकस हादसे के बाद घायलों की जान बचाने पर भी है.

इसके लिए सड़क सुरक्षा कोष से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं और ट्रॉमा सुविधाओं को मजबूत करने की तैयारी है. सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ की संचालन समिति ने चिकित्सा विभाग से जुड़े 37.73 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी है. इसके अलावा पहले से चल रहे 7.80 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को भी जारी रखने की अनुमति दी गई है.


500 चिकित्सा कर्मियों को मिलेगी ट्रेनिंग

मुख्यमंत्री आयुष्मान सड़क सुरक्षा योजना के तहत सड़क हादसों में घायल लोगों के इलाज का दायरा बढ़ाया जा रहा है. अब घायलों को सरकारी अस्पतालों के साथ निजी अस्पतालों में भी निशुल्क उपचार की सुविधा मिल रही है. इसके लिए सड़क सुरक्षा कोष से 12.50 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है. वहीं, अस्पतालों की इमरजेंसी सेवाओं में काम करने वाले करीब 500 चिकित्सा कर्मियों को एम्स नई दिल्ली के माध्यम से ट्रेनिंग दिलाई जाएगी. उन्हें इमरजेंसी मैनेजमेंट का प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसके लिए 4.81 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ है.


ट्रॉमा सेंटर और BLS ट्रेनिंग पर जोर

बीकानेर के सरदार पटेल चिकित्सा महाविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर में स्टाफ की ट्रेनिंग के लिए व्यवस्था मजबूत की जाएगी. यहां ATLS और BLS ट्रेनिंग के लिए स्किल लैब बनाई जाएगी और जरूरी उपकरण लगाए जाएंगे. सिविल कार्य और उपकरणों के लिए 3.85 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. संभाग स्तर पर डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को कार्डियक लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. इसके लिए 1.63 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं.


अजमेर में बढ़ेंगी न्यूरो सर्जरी सुविधाएं

जेएलएन मेडिकल कॉलेज अजमेर में न्यूरो सर्जरी और ट्रॉमा सुविधाओं को बेहतर करने की योजना है. इसके लिए हाई क्वालिटी न्यूरोसर्जरी माइक्रोस्कोप खरीदने के लिए 5.50 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है.


मेडिकल कॉलेजों में बनेंगे ट्रेनिंग सेंटर
राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बेसिक लाइफ सपोर्ट यानी BLS की ट्रेनिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है. 54 सरकारी कॉलेजों में BLS ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने के लिए 48.22 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं. अजमेर, बीकानेर, कोटा और उदयपुर के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी BLS ट्रेनिंग सेंटर बनाए जाएंगे. प्रत्येक सेंटर के लिए 25 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई है.


इसके अलावा भरतपुर, सीकर, झालावाड़, डूंगरपुर, भीलवाड़ा और पाली समेत कई मेडिकल कॉलेजों में ट्रेनिंग और ट्रॉमा सुविधाओं के लिए बजट दिया गया है. जयपुर के SMS मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर के लिए भी 13.98 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं.


हादसे के बाद शुरुआती मदद बनेगी अहम
विभाग का मकसद है कि सड़क हादसे के तुरंत बाद घायल व्यक्ति को जरूरी बेसिक लाइफ सपोर्ट मिल सके. इसके लिए ज्यादा से ज्यादा चिकित्सा कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा. माना जा रहा है कि हादसे के शुरुआती समय में सही मदद मिलने से गंभीर घायलों की जान बचाने की संभावना बढ़ सकती है.

 

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About the Author

अंश राज Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर उनकी पैनी नजर रहती है. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर से जुड़ी खबरों में उनकी खास दिलचस्पी है. नई चीजों को सीखने की फिराक में रहते हैं. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनावों और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बड़े बयान तक, अंश राज खबरों की नब्ज पर नजर रखते हैं. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करना और किसी भी स्टोरी को ज्यादा प्रभावी और रोचक अंदाज में पेश करना उनकी खासियत है. खबर को सिर्फ लिखना नहीं, बल्कि उसे बेहतर तरीके से पैकेज कर दर्शकों तक पहुंचाना उनके काम का अहम हिस्सा है.  डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव रखने वाले अंश राज इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है. खबरों की गंध को सबसे पहले पहचानना, उसकी तह तक पहुंचना और उसे सबसे पहले, सबसे तेज और सबसे बेहतर तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना... यही अंश राज की पहचान है.
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