Sikar News: शरीर थकता है, घुटनों में दर्द होता है और रास्ता लंबा होने के बावजूद कदम रुकने का नाम नहीं लेते. सामने मंजिल हो और मन में आस्था हो तो मुश्किलें भी छोटी लगने लगती हैं. श्रीमाधोपुर में देर शाम ऐसा ही आस्था का नजारा देखने को मिला, जब हरियाणा के झज्जर जिले के सुबाणा गांव की रेणु हरिवंशी दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़ती नजर आईं. उनका लक्ष्य खाटूश्यामजी पहुंचकर बाबा श्याम के दरबार में माथा टेकना है.
273 किलोमीटर की कठिन दंडवत यात्रा का संकल्प
रेणु ने 5 जुलाई को अपनी यात्रा शुरू की थी. करीब 15 लोग उनके साथ चल रहे हैं. इस बार उन्होंने 273 किलोमीटर की पूरी यात्रा दंडवत करते हुए बिना गद्दे के पूरी करने का संकल्प लिया है. यह बाबा श्याम के लिए उनकी दूसरी दंडवत यात्रा है. इससे पहले वर्ष 2023 में भी रेणु दंडवत करते हुए खाटू धाम पहुंची थीं. उस दौरान उन्होंने 237 किलोमीटर की दूरी 67 दिनों में पूरी की थी. अब दूसरी यात्रा में दूरी बढ़कर 273 किलोमीटर हो गई है, लेकिन मंजिल वही बाबा श्याम का दरबार है.
2018 से अन्न का त्याग, नारियल पानी के सहारे जीवन
रेणु की कहानी केवल उनकी दंडवत यात्रा तक सीमित नहीं है. उन्होंने वर्ष 2018 से अन्न का त्याग कर रखा है. करीब नौ साल से उन्होंने अन्न का सेवन नहीं किया है. वह नारियल पानी के सहारे अपना जीवन यापन कर रही हैं. कभी गुरुग्राम में एएनएम के तौर पर नौकरी करने वाली रेणु ने वर्ष 2018 में नौकरी से इस्तीफा दे दिया था. उनके पति सिद्धार्थ मल्हान सहकारी बैंक में क्लर्क हैं. सामान्य पारिवारिक और नौकरी की जिंदगी से अलग रेणु ने सेवा, आस्था और अपने संकल्प को जीवन का रास्ता बनाया.
पहली यात्रा में 237 किमी का सफर 67 दिनों में किया पूरा
वर्ष 2023 में रेणु ने पहली बार दंडवत करते हुए खाटूश्यामजी की यात्रा की थी. उन्होंने 237 किलोमीटर का सफर 67 दिनों में पूरा किया था. उस यात्रा के दौरान भी उन्होंने शरीर को आराम देने के लिए गद्दे का इस्तेमाल नहीं किया था. अब दूसरी बार वह इसी तरह कठिन यात्रा पर हैं. इस बार उनका संकल्प 273 किलोमीटर की दूरी दंडवत करते हुए पूरी करने का है. उनका कहना है कि यह यात्रा सिर्फ बाबा श्याम के दर्शन तक सीमित नहीं है.
गौ माता और सनातन धर्म की रक्षा का संदेश
रेणु के अनुसार, उनकी यात्रा का उद्देश्य जनकल्याण, गौ माता की रक्षा और सनातन धर्म की रक्षा का संदेश देना भी है. वह गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करने की दिशा में भी काम कर रही हैं. आस्था की राह पर रेणु पहले भी कई यात्राएं कर चुकी हैं. वह ब्रज चौरासी कोस की चार पैदल यात्राएं पूरी कर चुकी हैं. इस यात्रा में भी करीब 15 लोग उनके साथ चलकर सहयोग कर रहे हैं.
श्रीमाधोपुर में हुआ सम्मान
रात्रि के समय श्रीमाधोपुर बाईपास रोड पर पहुंचने पर श्री श्याम नवयुवक मंडल और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने रेणु का सम्मान किया. अल्का गोयल, कंचन अग्रवाल, निशा गोयल, जितेंद्र गोयल और शंभूदयाल सैनी सहित अन्य लोगों ने उन्हें साफा, माला और दुपट्टा पहनाया. इस दौरान उन्हें मोमेंटो भी भेंट किया गया. कुछ देर के लिए दंडवत करती रेणु के कदम थमे. लोगों ने उनका सम्मान कर हौसला बढ़ाया और इसके बाद वह फिर उसी रास्ते पर आगे बढ़ गईं.
खाटू के बाद सालासर की पदयात्रा
रेणु के लिए 273 किलोमीटर का यह सफर केवल दूरी तय करने की यात्रा नहीं है, बल्कि नौ साल से चले आ रहे उनके संकल्प की अगली कड़ी है. खाटूश्यामजी पहुंचने के बाद वह वहां से सालासर के लिए पदयात्रा भी करेंगी. रेणु की इस दंडवत यात्रा के नवरात्रों तक खाटूश्यामजी पहुंचने की उम्मीद है. मंजिल अभी बाकी है, लेकिन आस्था और संकल्प के साथ वह लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रही हैं.
क्या 9 साल तक कोई वाकई भूखा रह सकता है?
नारियल पानी में पानी, कुछ शर्करा, पोटैशियम और थोड़ी मात्रा में अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं, लेकिन इसमें शरीर की लंबी अवधि की जरूरत के लिए पर्याप्त प्रोटीन, वसा, कैलोरी, विटामिन और कई आवश्यक खनिज नहीं होते. लंबे समय तक केवल नारियल पानी लेने से गंभीर कुपोषण, मांसपेशियों का क्षय, कमजोरी, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और अंगों को नुकसान हो सकता है.
अगर किसी व्यक्ति के बारे में दावा है कि वह 9 साल से केवल नारियल पानी पर जीवित है, तो इसे मानने से पहले यह जानना जरूरी होगा कि-
क्या वह वास्तव में 9 वर्षों से कोई ठोस भोजन नहीं ले रहा है?
क्या वह दूध, जूस, फल, दवाएं या अन्य कैलोरी वाले पदार्थ भी लेता है?
उसका वजन और स्वास्थ्य कैसे बना हुआ है?
क्या इस दावे की स्वतंत्र चिकित्सकीय जांच या विश्वसनीय रिपोर्ट उपलब्ध है?
बता दें कि रेणु हरिवंशी के 9 साल से अन्न न खाने के बारे में हम कोई पुष्टि नहीं करते हैं.