क्यों अटका है RCA चुनाव का परिणाम ?
RCA के चुनाव में कुल 38 जिला संघों के मतदाता चुनाव प्रक्रिया में शामिल थे. 29 सितंबर को मतदान हुआ, लेकिन मतगणना और परिणाम की घोषणा रोक दी गई. विवाद मुख्य रूप से वोटर लिस्ट और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दों को लेकर है. इनमें RCA की चुनावी प्रक्रिया में महिला प्रतिनिधित्व का सवाल और तीन नए जिलों डीडवाना-कुचामन, खैरथल-तिजारा और बालोतरा को वोटिंग अधिकार देने का विवाद प्रमुख है. सुप्रीम कोर्ट के सामने यह भी मुद्दा था कि RCA की मतदाता सूची में एक भी महिला मतदाता या महिला उम्मीदवार नहीं थी.
इसके अलावा जिला क्रिकेट संघों की वैधता और उनके प्रतिनिधियों के वोटिंग अधिकार को लेकर भी अलग-अलग याचिकाएं हाईकोर्ट में लंबित हैं. सवाई माधोपुर जिला क्रिकेट संघ को लेकर दो गुटों के बीच विवाद इसका प्रमुख उदाहरण है. हाईकोर्ट ने सितंबर में सवाई माधोपुर के एक गुट को RCA चुनाव में अस्थायी तौर पर हिस्सा लेने की अनुमति दी थी, जबकि उसके संगठनात्मक चुनाव और सदस्यता को लेकर विवाद अदालत में लंबित है.
अगर हाईकोर्ट ने परिणाम जारी करने की अनुमति दी तो ?
अगर हाईकोर्ट मौजूदा चुनाव प्रक्रिया को वैध मानते हुए सीलबंद मतपेटियां खोलने और मतगणना कर परिणाम घोषित करने का रास्ता साफ करता है, तो 29 सितंबर को डाले गए वोटों की गिनती होगी. इसके बाद अध्यक्ष समेत RCA की नई कार्यकारिणी के छह प्रमुख पदों का परिणाम सामने आ सकेगा. यानी करीब चार साल बाद RCA में निर्वाचित कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
हालांकि ये ध्यान रखना होगा कि परिणाम जारी करने की अनुमति अदालत के आदेश की शर्तों और लंबित याचिकाओं के निपटारे के जुड़ी होगी. इसलिए आज का आदेश RCA के लिए निर्णायक महत्व रखता है.
अगर हाईकोर्ट ने पूरा चुनाव रद्द कर दोबारा कराने को कहा तो ?
दूसरी हालत ये होगी कि हाईकोर्ट मौजूदा चुनाव प्रक्रिया में ऐसी खामियां मानता है, जिन्हें केवल मतगणना से दूर नहीं किया जा सकता. ऐसी स्थिति में अदालत मौजूदा मतदान को निरस्त कर नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश दे सकती है. हालिया रिपोर्टों के अनुसार हाईकोर्ट के सामने एडहॉक कमेटी की भूमिका, महिला प्रतिनिधित्व, नए और पूर्व में निलंबित जिला संघों के वोटिंग अधिकार तथा चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अन्य सवाल भी हैं. ऐसा आदेश आने पर 29 सितंबर को डाले गए वोट प्रभावी नहीं रहेंगे और नई वोटर लिस्ट और पात्रता तय करने के बाद नया चुनाव कार्यक्रम बनाना पड़ेगा. इसका मतलब RCA की नई कार्यकारिणी के गठन में और देरी होगी.
RCA में विवाद की शुरुआत कैसे हुई ?
RCA लंबे समय से एडहॉक व्यवस्था के जरिए चल रहा था. अप्रैल 2026 में हाईकोर्ट ने चुनाव समय पर नहीं कराने को लेकर सवाल उठाए और बाद में एडहॉक कमेटी को हटाकर भास्कर ए. सावंत को प्रशासक की जिम्मेदारी दी गई. अदालत ने चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश दिए थे. इसके बाद 29 सितंबर को चुनाव तो हुआ, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के चलते फैसला रुक गया. अब पूरा मामला फिर हाईकोर्ट के सामने है. लिहाजा आज की सुनवाई में मतपेटी खुलेगी या चुनाव फिर से होगा. दोनों संभावनाओं पर RCA से जुड़े सभी पक्षों की नजर टिकी हुई है. RCA अध्यक्ष पद का मुकाबला मुख्य रूप से धनंजय सिंह खींवसर और बृजकिशोर उपाध्याय के बीच था. धनंजय सिंह खींवसर चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे और जोधपुर जिला क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े हैं. वहीं बृजकिशोर उपाध्याय दौसा क्रिकेट संघ के सचिव रहे हैं और उनके पैनल को बीजेपी संगठन के एक धड़े का समर्थन बताया गया था.
शुरुआत में अध्यक्ष पद की दौड़ में पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह राठौड़ भी शामिल थे. लेकिन मतदान से एक दिन पहले 28 सितंबर को उन्होंने नामांकन वापस लेकर बृजकिशोर उपाध्याय का समर्थन कर दिया था. इसके बाद अध्यक्ष पद का मुकाबला सीधे धनंजय सिंह बनाम बृजकिशोर हो गया.
उपाध्यक्ष पद पर रतन सिंह शेखावत और मोहित यादव, सचिव पद पर पिंकेश जैन और मोहित यादव, संयुक्त सचिव पद पर राजेश सारस्वत और विनोद सहारण, जबकि कोषाध्यक्ष पद पर विष्णु प्रकाश अग्रवाल और आशीष तिवाड़ी मैदान में थे. कार्यकारिणी सदस्य पद पर धर्मवीर सिंह शेखावत के नामांकन वापस लेने के बाद अरिष्ट सिंघवी का निर्विरोध निर्वाचन तय हुआ था.
किसे माना जा रहा था मजबूत दावेदार ?
अध्यक्ष पद पर बृजकिशोर उपाध्याय क़ो मजबूत बताया जा रहा है, क्योंकि उनका पैनल सरकार समर्थित बताया गया. मतदान के दिन भी बड़ी संख्या में वोटर यानि जिला क्रिकेट संघ सचिव एक बस में उनके साथ मतदान करने पहुंचे. हालांकि धनंजय सिंह खींवसर के पक्ष में क्रॉस वोटिंग हुई तो पासा पलटने की संभावना बन सकती है.