SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

राजस्थान की सियासत का वो 'चमकता' चेहरा, जिसने दिग्गजों की नींद उड़ा दी ! रविंद्र सिंह भाटी का Exclusive इंटरव्यू

मारवाड़ की गर्म रेत से उठकर राजस्थान की सियासत के केंद्र में जाने वाले निर्दलीय युवा विधायक रविंद्र सिंह भाटी अपनी अनूठी शैली और बेबाक तेवरों के लिए जाने जाते हैं. ज़ी न्यूज डिजिटल के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के हर तीखे सवाल का सामना किया.

Reported By Pragati Pant Awasthi Written By Pragati Pant Awasthi
Published: Sep 04, 2026, 10:41 AM IST | Updated: Sep 15, 2026, 10:16 AM IST
Image Credit: Ravindra Singh Bhati Exclusive Interview
Join

Ravindra Singh Bhati Exclusive Interview : चाहे बात जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन में आई मर्यादा की सीमाओं की हो या फिर बाड़मेर के गिरल माइंस इलाके में मजदूरों के हक के लिए खुद पर पेट्रोल छिड़कने के सांकेतिक और कड़े कदम की, रविंद्र सिंह भाटी के हर जवाब में एक विद्रोही तेवर के साथ-साथ परिपक्वता दिखी.

राजस्थान के बॉर्डर इलाके की बुनियादी समस्याओं, शिक्षा की बदहाली और यूसीसी (UCC)पर राजनीतिक रोटियां सेंकने वालों को भी भाटी ने नसीहत दी और प्रदेश के तमाम दिग्गज नेताओं पर उनके एक लाइनर रिमार्क्स उनकी बेबाकी को बताने के लिए काफी रहे. भविष्य से जुड़े सवालों को हंसकर टाल देने वाले रविंद्र सिंह भाटी से बातचीत के खास अंश.

सवाल- जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का तरीका क्या सही था?

जवाब- वजह वाजिब थी, छात्र राजनीति से हम लोग भी आए हैं. छात्र जीवन ने हमें बहुत कुछ दिया है. छात्रों की पीड़ा को हम बहुत बेहतर तरीके से समझ सकते हैं. जो मुद्दा था, जो उनकी बात थी, हम उनके साथ में हैं कि पेपर लीक नहीं होने चाहिए, क्योंकि इससे ग्रामीण परिवेश से आने वाले विद्यार्थी-युवा, जो तीन-तीन, चार-चार साल तैयारी करते हैं, खून-पसीने की कमाई कोचिंग इंस्टीट्यूट में लगाते हैं, मेहनत करते हैं, तपस्या करते हैं और जब आखिर में पेपर लीक होता है, तो उनके सारे सपने ढह जाते हैं. ये बड़ी समस्या है युवाओं के साथ में और मैं युवाओं के साथ में हूं, पर जो अमर्यादित चीजें हुई हैं, वो कतई स्वीकार्य नहीं हैं. आपकी सहमति-असहमति हो सकती है, लेकिन चीजें मर्यादित रहनी चाहिए. राजनीति में कहा जाता है कि चाहे किसी से भी कैसी भी कड़वाहट क्यों न रही हो, लेकिन एक गुंजाइश तो रहनी चाहिए कि जब कभी कहीं मिलें तो नजरें न झुकें.

सवाल- आपने बाड़मेर में खुद पर पेट्रोल डाल दिया था? विरोध का ये तरीका सही था?

जवाब- कई लोगों ने वो सिर्फ एक मिनट ही देखा, उसके पीछे की एक महीने या 10 साल की कहानी किसी ने नहीं देखी. वो जगह क्या थी? वो लोग कौन थे? वहां हो क्या रहा था? साल 1994 में मेरे विधानसभा क्षेत्र के गिरल, आंकली, थूमली और इस पूरे क्षेत्र में एशिया की सबसे बड़ी ओपन लिग्नाइट माइंस स्थापित हुई. उस समय इन लोगों की जमीनों को एक्वायर किया गया और कहा गया कि बदले में हम आपको रोजगार देंगे. लेकिन 1994 से लेकर आज तक वो सिर्फ मजदूरी के अलावा कुछ नहीं कर पाए. मैंने इस मुद्दे को सदन में भी रखा कि जहां से आप लोग लाखों-करोड़ों रुपये राजस्व कमाते हैं, आप कम से कम वहां जाकर देखें तो उन इलाकों में रहने वाले लोगों की आयु वहां के प्रदूषण की वजह से 10-10 साल कम हो गई. विकास के नाम पर सिर्फ विनाश हुआ. जब कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई तो मैं उन मजदूरों के साथ धरने पर बैठा. हम लोग वहां पर एक महीने तक बैठे, लेकिन जयपुर में बंद एसी कमरों में बैठकर फैसले लेने वालों के कान तक जूं नहीं रेंगी.

हमारे एक आह्वान पर 10-20 हजार लोग आते हैं, हमारे साथ कूच करते हैं और फिर उन पर प्रशासन की तरफ से कोई भी आंच आए तो ये मेरी जिम्मेदारी है. हम पूरे जिम्मेदार तरीके से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे.  जयपुर में बैठे लोगों को जगाने के लिए ये एक सांकेतिक प्रदर्शन था. मुझे जिस हद तक जाना पड़ेगा, मैं जाऊंगा. वो मेरे लोग हैं.

सवाल- आपकी 'एकला चलो रे' की नीति कब तक चलेगी? राजनीति की मुख्यधारा में कब आएंगे?

जवाब- वर्तमान में जिस पद पर हूं और जहां हूं, उस पद और उस जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा हूं. लेकिन हकीकत बताऊं तो मुझे तो ये भी नहीं लगा था कि कभी विधायक बन पाऊंगा. एक साधारण परिवार से आने वाला विधायक बन जाएगा. मैं जो भी हूं, इन लोगों की वजह से ही हूं. लोगों के आदेश के अनुरूप होगा, जो होगा. सबसे बड़ी ताकत ईश्वर की है. 2019 में निर्दलीय, 2023 में निर्दलीय विधायक बना. 2024 में सांसद का चुनाव, सबसे ज्यादा वोट पाने वाला निर्दलीय विधायक बना. सब ईश्वर की इच्छा से होगा. जो होगा अच्छा होगा. आज जो भी चीजें हो रही हैं, हो सकता है उसके दूरगामी परिणाम अच्छे ही होंगे.

सवाल- सीजेपी के बारे में क्या कहेंगे , स्कूल ठीक करो अभियान और स्कूलों में मीडिया पर पाबंदी पर क्या कहेंगे ?

जवाब- मीडिया को बैन करना, क्या ये सही है? ये बौखलाहट क्यों है? सरकार को सरकारी स्कूलों को ठीक करने पर लगना चाहिए. कितने स्कूल क्रमोन्नत हुए, पर आज भी स्टाफ 8वीं तक का है, स्कूल 12वीं का हो गया है. बॉर्डर इलाके में मेरे गांव का स्कूल झोपड़े में चल रहा है. शिक्षा के नाम पर राजनीति हो रही है.

सवाल- आपका विधानसभा क्षेत्र शिव, मुस्लिम बहुल है. UCC को लेकर क्या राय है, वहां लोगों की और आपकी क्या राय है?

जवाब- उन लोगों को पता ही नहीं है कि हो क्या रहा है. पहले की बात करूं तो मेरे स्कूल में एक ही बेंच पर बैठे रविंद्र को नहीं पता था कि वो किस समुदाय से है, सुरेश का सरनेम नहीं पता था. सब एक बेंच पर बैठते थे. धीरे-धीरे बड़े हुए, फिर यूनिवर्सिटी में तब सरनेम के साथ एक-दूसरे को जानने लगे. फिर मुख्यधारा की राजनीति में आए, फिर वो जाति से हटकर धर्म पर आने लगे. मुझे लगता है कि इन तमाम विषयों पर बात न करके शिक्षा और बाकी चीजों पर काम कर लिया जाता तो शायद इस देश के हालात कुछ और होते.

सवाल- क्या आप UCC के पक्ष में नहीं हैं ?

जवाब- जो भी काम देशहित में हैं, मैं उसके पक्ष में हूं, लेकिन उसके नाम पर राजनीति गलत है.

एक लाइनर रिमार्क्स में दिखा भाटी की बेबाकी

शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने राजस्थान के दिग्गज नेताओं पर अपनी राय संभलकर और बड़ी परिपक्वता के साथ दी. जब पीएम मोदी के बारे में उनसे राय मांगी गई तो रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि मोदी जी अच्छे आदमी हैं और बहुत मेहनत कर रहे हैं. वसुंधरा राजे के बारे में पूछने पर भी सवाल का जवाब वैसा ही था. भाटी ने उन्हें बेहद मेहनती और काबिल कहा. वहीं गोविंद सिंह डोटासरा को फर्राटेदार वक्ता बताया. पूर्व सीएम अशोक गहलोत के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में भाटी ने कहा कि उनसे सीखने की जरूरत है और हर युवा को उनसे सीखना चाहिए कि किस तरीके से राजनीति की जाए. जोधपुर यूनिवर्सिटी के एल्यूमिनाई हैं, हमारे मारवाड़ के हैं. सीएम भजनलाल शर्मा के बारे में रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि वो मेहनत कर रहे हैं और प्रदेश के मुखिया हैं. जब हनुमान बेनीवाल के बारे में पूछा गया तो भाटी ने हंसते हुए जवाब दिया और कहा कि वो मेहनत कर रहे हैं और प्रयास कर रहे हैं, सबको करना चाहिए. हरीश चौधरी को लेकर पूछे गए सवाल पर भाटी ने फिर हंसते हुए कहा कि सबका अपना-अपना काम है, सब अपने-अपने तरीके से सारे लोग काम कर रहे हैं. मानवेंद्र सिंह जसोल के बारे में भाटी ने कहा कि वो बहुत ही संजीदा शख्स हैं.

सवाल- राजनीति में नहीं होते तो क्या कर रहे होते ?

जवाब- वकील होता, जनता के लिए, गरीबों के लिए काम करता. क्या पता जर्नलिस्ट बन जाता. वो तो सारी डेस्टिनी है.

सवाल- 20 साल बाद खुद को आप किस मुकाम पर पाते हैं? मुख्यमंत्री या फिर केंद्रीय मंत्री?

जवाब- बोपू तो आपू ना पता... हम तो निमित्त हैं, करने वाला तो ईश्वर है, सब अच्छा करेगा.

सवाल- लोक गायक छोटू सिंह रावणा के साथ क्या विवाद है ?

जवाब- मेरे भाई हैं, परिवार के ही हैं. कुछ राजनीतिक लोगों ने उनको टूल की तरह इस्तेमाल किया. ये पार्ट ऑफ पॉलिटिक्स है.

सवाल- आपके विधानसभा क्षेत्र शिव में पानी की बहुत बड़ी समस्या थी, क्या कुछ किया गया है अभी तक?

जवाब- JJM से जुड़ी कई खामियां थीं. हम पूरी मॉनिटरिंग कर रहे हैं. कोशिश है कि आने वाले वक्त में नर्मदा-बाड़मेर लिफ्ट कैनाल का काम हो जाए. तो बॉर्डर एरिया के लोगों को फायदा होगा. पलायन रुकेगा. ज्यादातर इलाकों में हैंडपंप का काम भी कर रहे हैं. अभी समस्या है, लेकिन आने वाले वक्त में हम इसे सुधार लेंगे.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

मीडिया की दुनिया में 18 साल का सफर... एंकरिंग से लेकर डिजिटल की स्क्रीन तक, हर नया बदलाव दिल से अपनाया, जो सोचती हूं, वही कहती हूं, बातों को घुमाना मेरी आदत नहीं, दिल की बात जुबां पर रखना पहचान है. फिलहाल 'ज़ी राजस्थान डिजिटल' के साथ सफर जारी है और हर दिन कुछ नया सीखने की ललक बरकरार है और रहेगी. Pragati.Pant@india.com ईमेल के जरिए आप संपर्क कर सकते हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES