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करोड़ों का बजट खर्च, फिर भी नहीं बदली रक्त तलाई की सूरत, शाम होते ही शराबी छलकाते हैं जाम

खमनोर स्थित ऐतिहासिक रक्त तलाई स्मारक प्रशासनिक अनदेखी और रखरखाव के अभाव में बदहाल हो रहा है. 2004 में विकसित इस पार्क और हल्दीघाटी टूरिस्ट सर्किट पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आज यहां खंडहर, झाड़ियां और अव्यवस्था नजर आ रही है.

Reported By Shyam Sundar Goyal Written By Ansh Raj
Published: Nov 04, 2026, 08:04 PM IST | Updated: Nov 04, 2026, 08:05 PM IST
Image Credit: Rakt Talai
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18 जून 1576 को मेवाड़ की स्वाधीनता और महाराणा प्रताप के स्वाभिमान के लिए लड़ा गया ऐतिहासिक युद्ध जिस ‘रक्त तलाई’ (खमनोर) की माटी में दर्ज है, वह पावन धरा आज अपनी बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी पर आंसू बहा रही है. हल्दीघाटी के इस सबसे संवेदनशील और गौरवशाली स्मारक को सहेजने के नाम पर सरकारों ने करोड़ों रुपये का बजट कागज़ों पर बहा दिया, लेकिन धरातल पर देखरेख के अभाव में यह राष्ट्रीय धरोहर आज खंडहर, झाड़ियों और असामाजिक तत्वों का गढ़ बन चुकी है.

2004 में बना था खूबसूरत पार्क, अब रख-रखाव ''जीरो''
इतिहास के पन्नों में दर्ज रक्त तलाई के इस मूल रणभूमि क्षेत्र और सूखे तालाब के हिस्से को सुरक्षित करने के लिए वर्ष 2004 में एक सुंदर पार्क (गार्डन) के रूप में विकसित किया गया था. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन आने वाले इस परिसर के विकास और ''हल्दीघाटी टूरिस्ट सर्किट'' के सौंदर्यीकरण पर अलग-अलग चरणों में 3 करोड़ से लेकर 15 करोड़ रुपये तक का बजट स्वीकृत और खर्च किया गया. लेकिन दो दशकों के भीतर ही उचित रखरखाव न होने से करोड़ों का यह प्रोजेक्ट बदहाली में तब्दील हो चुका है.

हाईकोर्ट ने 16 फरवरी 2026 को लगाई थी कड़ी फटकार- रक्त तलाई की इस दुर्दशा पर राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर मुख्यपीठ) ने भी कड़ा रुख अपनाया था. 16 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई थी.

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: "रक्त तलाई, जिसे हल्दीघाटी युद्ध के चरम और बलिदान का प्रतीक माना गया है, वहां की मौजूदा स्थिति बेहद दयनीय है. महाराणा प्रताप के शौर्य का प्रतीक यह स्थल प्रशासनिक लापरवाही के कारण नष्ट हो रहा है. पवित्र स्थल पर गंदगी, सीवेज, शराब की बोतलें और झाड़ियों का जमावड़ा होना गंभीर लापरवाही बताया और 24 घंटे सुरक्षा प्रहरी तैनात करने और अतिक्रमण हटाने के सख्त निर्देश दिए थे.

आदेश के बावजूद आज की दयनीय स्थिति: लाइटें टूटी, टाइलें बिखरीं- हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी और कड़े निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं . जी राजस्थान न्यूज़ ने ग्राउंड ज़ीरो जाकर हालात जाने तो प्रॉपर घास कटिंग न होने से कभी हरा-भरा दिखने वाला यह परिसर अब बड़ी-बड़ी कंटीली झाड़ियों और बबूल के जंगल में तब्दील हो चुका है. पाथवे पर लगाई गई टाइलें उखड़कर अलग-अलग बिखरी पड़ी हैं. पर्यटकों की सुविधा के लिए लगाई गई लाखों की लाइटें टूटकर जमीन पर पड़ी हैं, जिससे शाम होते ही पूरा परिसर अंधेरे में डूब जाता है.दुर्गंध के कारण पर्यटकों का सांस लेना दुभर हो जाता है.

दिन में प्रेमियों का ठिकाना, रात में शराबियों का अड्डा- स्थानीय निवासियों का कहना है कि असामाजिक तत्व भरपूर फायदा उठा रहे हैं. दिन के समय यह ऐतिहासिक पार्क प्रेमी युगलों का ठिकाना बना रहता है, वहीं शाम ढलते ही यह स्थान शराबियों के अड्डे में तब्दील हो जाता है. पूरे पार्क में जगह-जगह शराब की खाली बोतलें, डिस्पोजल और सिगरेट के पैकेट बिखरे पड़े हैं. देश और विदेश से महाराणा प्रताप के शौर्यगाथा को महसूस करने आने वाले पर्यटक यहाँ की अव्यवस्था और बदहाली देखकर बेहद निराश लौट रहे हैं. पर्यटकों का कहना है कि जब सरकारें करोड़ों रुपये पर्यटन के नाम पर आवंटित करती हैं, तो आखिर इस पवित्र स्मारक की सुरक्षा और सफाई के लिए कोई पुख्ता

इंतजाम क्यों नहीं किए जाते?
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद भी सोया हुआ प्रशासन जागेगा, या शहादत की यह पवित्र धरा यूं ही उपेक्षा का शिकार बनी रहेगी?

 

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About the Author

श्‍याम सुंदर गोयल (Shyam Sundar Goyal)  प्र‍िंट और ड‍िज‍िटल के अनुभवी पत्रकार रहे हैं ज‍िनके पास 16 सालों से ज्‍यादा पत्रकार‍िता का अनुभव है. वर्तमान में, Zee Media में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. उनकी लोकल खबरों पर अच्‍छी पकड़ और समझ है. इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग के साथ खबर के अंदर की गहरी बात को समझने का अनुभव रखते हैं जो रीडर्स के सीधे मतलब की होती है. उनकी शैली लाइव तरह की होती है जैसे वह घटना आपके सामने ही घट‍ित हो रही हो.श्‍याम सुंदर ने ग्‍वाल‍ियर में साइंस कॉलेज से बीएससी के साथ ही पत्रकार‍िता की ड‍िग्री की और बाद में ह‍िस्‍ट्री से एमए क‍िया. ग्‍वाल‍ियर के मूल न‍िवासी श्‍याम सुंदर ने भोपाल में दैन‍िक भास्‍कर के डीबी स्‍टार से र‍िपोर्टर के रूप में 2010 में अपना कर‍ियर शुरू क‍िया. उसके बाद वह भोपाल में ही प्रदेश टुडे और बाद में फ‍िर एक बार दैन‍िक भास्‍कर ड‍िज‍िटल से जुड़े. उसके बाद 2018 में वह भोपाल से द‍िल्‍ली आए और आजतक ड‍िज‍िटल में चीफ सब एड‍िटर के रूप में लोकल खबरों के सेक्‍शन को मजबूती दी. बाद में वह Zee News के नेशनल और MPCG ड‍िज‍िटल, र‍िपब्‍ल‍िक भारत ड‍िज‍िटल में रहे. न्‍यूज नेशन ड‍िज‍िटल में ड‍िप्‍टी न्‍यूज एड‍िटर के रूप में श‍िफ्ट इंचार्ज, सोशल मीड‍िया और खबरों पर भी काम क‍िया.इसके साथ ही वह पूरे भारत को सोलो बाइक राइड से एक्‍सप्‍लोर कर चुके हैं और उसपर एक क‍िताब '100 सीसी' भी ल‍िख चुके हैं जो अमेजन पर रोड ट्रैवल्‍स कैटेगरी में 1 नंबर पर रही है.उनसे shyam.goyal@dnaindia.com, ट्विटर हैंडल @ssgoyalat पर संपर्क कर सकते हैं.
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