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राजस्थान के लिए पानी के 4 बड़े समझौते: बदलेगी पानी की तस्वीर, समझें ERCP-यमुना-नर्मदा और किशाऊ का पूरा खेल

Rajasthan News: राजस्थान में पानी से जुड़े 4 बड़े समझौतों पर CM भजनलाल शर्मा ने बयाना में बात की. ERCP, यमुना, नर्मदा और किशाऊ परियोजना से जुड़े समझौतों से राजस्थान को पानी, सिंचाई और विकास में फायदा मिलने की उम्मीद है.

Written By SAGAR CHAUDHARY
Published: Sep 28, 2026, 09:54 PM IST | Updated: Sep 28, 2026, 09:56 PM IST
Image Credit: Rajasthan 4 Major Water Projects (AI IMAGE)
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ERCP-Yamuna-Narmada and Kishau Project: राजस्थान के बयाना में सोमवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पानी से जुड़े समझौतों को लेकर बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि देश में पानी से जुड़े 10 बड़े समझौतों में 4 राजस्थान से जुड़े हैं. इनमें मध्य प्रदेश के साथ संशोधित पार्बती-कालीसिंध-चंबल (PKC) लिंक को ERCP से जोड़ने का समझौता, हरियाणा के साथ यमुना जल परियोजना, नर्मदा से जुड़े चार राज्यों का समझौता और छह राज्यों के बीच किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना का समझौता शामिल है. इसके साथ ही सीएम ने बिजली उत्पादन, युवाओं को नियुक्ति और ग्रामीण विकास को लेकर भी सरकार के काम गिनाए. बयाना में 993 करोड़ रुपए के 249 विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया गया.

ERCP और मध्य प्रदेश के बीच क्या हुआ?
राजस्थान के लिए सबसे अहम समझौतों में पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना यानी ERCP से जुड़ा समझौता है. इसे मध्य प्रदेश के साथ पार्बती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से जोड़ा गया है. 28 जनवरी 2024 को राजस्थान, मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार के बीच इस परियोजना की योजना और DPR तैयार करने को लेकर MoU हुआ था. इसके बाद 5 दिसंबर 2024 को परियोजना के अमल को लेकर MoA भी साइन हुआ.

इस परियोजना का मकसद चंबल नदी तंत्र के पानी का बेहतर इस्तेमाल करना है. इसमें मध्य प्रदेश के पार्बती, कालीसिंध और कुनो क्षेत्र से जुड़े कामों के साथ राजस्थान की ERCP के कामों को जोड़ा गया है. राजस्थान वाले हिस्से में कई बैराज, बांध, जल परिवहन व्यवस्था और मौजूदा जलाशयों को जोड़ने जैसे काम शामिल हैं. सरकारी दस्तावेज के मुताबिक परियोजना के तहत राजस्थान को 3309.83 MCM पानी का इस्तेमाल करना है, जिसमें 1744.16 MCM पीने के पानी के लिए रखा गया है.

हरियाणा से यमुना का समझौता क्यों अहम?
दूसरा बड़ा समझौता हरियाणा के साथ यमुना के पानी को राजस्थान तक पहुंचाने से जुड़ा है. 17 फरवरी 2024 को राजस्थान और हरियाणा के बीच MoU हुआ था. इसके तहत यमुना के पानी को भूमिगत पाइपलाइन के जरिए राजस्थान के चूरू, सीकर, झुंझुनूं और दूसरे जिलों तक पहुंचाने के लिए संयुक्त DPR तैयार करने पर सहमति बनी. पहले चरण में जुलाई से अक्टूबर के बीच 577 MCM तक पानी पहुंचाने की योजना है.

इस योजना में पहले हरियाणा को हथिनीकुंड पर पश्चिमी यमुना नहर की अपनी क्षमता और दिल्ली के हिस्से का इस्तेमाल करना होगा. इसके बाद राजस्थान के हिस्से का पानी भूमिगत पाइपलाइन से पहुंचाया जाएगा. जून 2026 में दोनों राज्यों के बीच इस परियोजना के निर्माण और अमल को लेकर एक और अहम समझौता हुआ. इसके तहत करीब 580 MCM पानी तीन भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए जुलाई से अक्टूबर के बीच राजस्थान पहुंचाने की बात कही गई है.

नर्मदा समझौते में क्या तय हुआ?
तीसरा समझौता नर्मदा परियोजना से जुड़े चार राज्यों के बीच हुआ. इसमें महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश शामिल हैं. यहां एक बात समझना जरूरी है कि जुलाई 2026 का यह समझौता नया पानी बांटने से ज्यादा पुराने भुगतान और लागत से जुड़े विवाद को खत्म करने के लिए हुआ था.

चारों राज्यों के बीच सरदार सरोवर परियोजना की लागत में हिस्सेदारी और नर्मदा अवॉर्ड से जुड़े पुराने बकाये को लेकर मामला लंबे समय से अटका था. 7 जुलाई 2026 को चारों राज्यों ने एक बार के निपटारे यानी वन-टाइम सेटलमेंट के जरिए लंबित भुगतान के मुद्दे को सुलझाने पर सहमति जताई.

इस समझौते के बाद नर्मदा परियोजना से जुड़े पुराने वित्तीय विवाद को आगे बढ़ाने की स्थिति बनी. राजस्थान को नर्मदा का पानी पहले से ही मिलता है और इससे राज्य के पश्चिमी हिस्से में सिंचाई और पेयजल से जुड़े कामों को फायदा मिला है.

छह राज्यों का किशाऊ समझौता क्या है?
चौथा समझौता किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना से जुड़ा है. इसमें राजस्थान के साथ उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली शामिल हैं. 15 सितंबर 2026 को इन छह राज्यों ने किशाऊ परियोजना का समझौता साइन किया. परियोजना के तहत टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा बांध बनाया जाना है. यह नदी उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा के पास बहती है.

इस बांध की पानी जमा करने की क्षमता 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर होगी. परियोजना से करीब 97 हजार हेक्टेयर जमीन की सिंचाई और 1,476 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है. इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया गया है और करीब 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार उठाएगी, जबकि बाकी 10 प्रतिशत हिस्सा संबंधित राज्य देंगे. इस परियोजना से दिल्ली और यमुना को भी फायदा मिलने की बात कही गई है.

सीएम ने कहा- पहले की सरकारों ने क्यों नहीं किया?
बयाना की सभा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ERCP का जिक्र करते हुए कहा कि पहले की सरकारों ने मध्य प्रदेश के साथ पानी का समझौता क्यों नहीं किया. उन्होंने आरोप लगाया कि पहले की सरकारें राजस्थान की जनता को इसका फायदा नहीं देना चाहती थीं. यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक आरोप है. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक ERCP को संशोधित PKC लिंक के साथ जोड़ने के लिए 2024 में MoU और MoA हो चुके हैं.

बिजली उत्पादन पर भी सीएम ने गिनाए आंकड़े
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के समय पांच साल में करीब 3 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन हुआ, जबकि उनकी सरकार के ढाई साल में 12 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हुआ है. उन्होंने कहा कि पहले राजस्थान दूसरे राज्यों से बिजली लेता था, लेकिन अब बिजली बेचने की स्थिति में है. सीएम ने दावा किया कि 2027 तक किसानों को दिन में बिजली, उद्योगों को पूरी बिजली और उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली देने का लक्ष्य है.

युवाओं और ग्रामीण इलाकों को लेकर क्या कहा?
सीएम ने कहा कि सरकार की ओर से युवाओं को अब तक 1 लाख 89 हजार नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं. 1 लाख 22 हजार पदों की परीक्षाएं हो चुकी हैं, जबकि 1 लाख 25 हजार वैकेंसी निकाली गई हैं. उन्होंने यह भी कहा कि संकल्प पत्र के 392 में से 78 प्रतिशत संकल्प पूरे किए जा चुके हैं.

मुख्यमंत्री ने आने वाले तीन साल में ग्रामीण क्षेत्रों में 50 हजार करोड़ रुपए के काम कराने की बात भी कही. बयाना की सभा में भरतपुर संभाग के 993 करोड़ रुपए के 249 विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया.

वन स्टेट-वन इलेक्शन पर भी बोले सीएम
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के समय हर तीन महीने में कोई न कोई चुनाव होता था, जिससे समय और पैसा खर्च होता था और विकास का काम रुकता था. उन्होंने कहा कि सरकार ने विधानसभा में वन स्टेट-वन इलेक्शन की बात कही थी और अब निकाय चुनाव हो चुका है. आगे ग्राम पंचायत चुनाव को भी इसी व्यवस्था से जोड़ने की बात कही.

सीएम ने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं और सेना का मनोबल गिराने की कोशिश की जाती है.

पानी के समझौतों का राजस्थान के लिए मतलब
इन चारों समझौतों को देखें तो इनका राजस्थान से जुड़ाव अलग-अलग तरह का है. ERCP और MPKC समझौता पूर्वी राजस्थान में पानी के बेहतर इस्तेमाल से जुड़ा है. यमुना समझौते का सीधा फोकस राजस्थान के उत्तरी-पूर्वी जिलों तक पानी पहुंचाने पर है. नर्मदा समझौता चार राज्यों के पुराने वित्तीय विवाद को सुलझाने से जुड़ा है. वहीं किशाऊ परियोजना यमुना बेसिन में पानी जमा करने, सिंचाई, बिजली और नदी में पानी के प्रवाह से जुड़ी है. इसलिए मुख्यमंत्री ने इन्हें राजस्थान से जुड़े बड़े जल समझौतों में गिनाया है.

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सागर चौधरी, अप्रैल 2024 से वे ज़ी न्यूज़ संस्थान का हिस्सा हैं और अपनी मेहनत व काम करने की क्षमता से लगातार टीम में योगदान दे रहे हैं.सागर चौधरी का संबंध हरियाणा के फरीदाबाद से है, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की और मीडिया क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की.
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