Rajasthan Transport Department: राजस्थान परिवहन विभाग में एक और बड़े घोटाले की आशंका जताई जा रही है. राजस्थान में पिछले एक साल में ऐसी बसों का पंजीयन कर दिया गया है, जिनका प्रोटो टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट ही नहीं था. अब परिवहन मुख्यालय के आदेश से प्रदेशभर में आरटीओ-डीटीओ कार्यालयों में हड़कंप मच गया है. दरअसल, 1 सितंबर 2025 से राजस्थान में बसों के पंजीयन को लेकर नए नियम लागू हुए थे. इसकी अधिसूचना केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 6 मार्च 2024 को जारी की थी.
DTO-RTO कार्यालयों में नियमों का उल्लंघन
अधिसूचना के तहत ये कहा गया था कि अब नई बसों के पंजीयन के समय वाहन के लिए टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट अनिवार्य रूप से लेना होगा. इसके साथ ही फॉर्म 22बी को विलोपित करते हुए 22ए के आधार पर पंजीयन करना अनिवार्य किया गया. 1 सितंबर 2025 के बाद नए नियमों के अनुसार ही बसों का पंजीयन होना चाहिए था, लेकिन प्रदेश के कई डीटीओ और आरटीओ कार्यालयों में नियमों का उल्लंघन करते हुए बसों का पंजीयन कर दिया गया है. इसे गड़बड़ी मानते हुए अब परिवहन मुख्यालय ने जांच शुरू कर दी है. परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा के निर्देश पर प्रदेशभर में बसों के पंजीयन की जांच शुरू की गई है.
1 सितंबर 2025 से क्या नियम लागू हुआ
चेसिस पर अलग से बनने वाली बस बॉडी के पंजीयन के लिए नियम. 13 से अधिक सीटर बसों के लिए टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट जरूरी, एआईएस 52 के रिवीजन 2008 के मुताबिक सर्टिफिकेट होना जरूरी, 22 से अधिक क्षमता वाली बसों के लिए एआईएस 153 के नए नियम, एआईएस 153 के मानकों के तहत ही बस का पंजीयन किया जा सकता है.
क्या हुई गड़बड़ी ?
1 सितंबर 2025 से नियम लागू हुए, लेकिन फिर भी बसें पंजीकृत हुई. 1640 बसें प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए पंजीकृत कर दी गई. परिवहन मुख्यालय ने सभी DTOs को सूची भेजकर सूचना मांगी. बसों के पंजीयन की जांच कर सूचना भेजने के निर्देश दिए. नियमों का उल्लंघन होने पर बसों का पंजीयन निरस्त करने को कहा. 15 दिन में कार्रवाई का प्रमाण पत्र भेजने के निर्देश दिए. मुख्यालय ने कहा- पंजीयन निरस्त कर कार्रवाई का प्रमाण पत्र भेजें.
ज्वाइंट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ने भेजा रिमाइंडर
परिवहन मुख्यालय ने 1 अक्टूबर को इस संबंध में सभी आरटीओ-डीटीओ को नियमों का उल्लंघन कर पंजीकृत की गई बसों पर कार्रवाई के लिए लिखा था, लेकिन इसके बावजूद भी ज्यादातर आरटीओ-डीटीओ ने इन बसों पर कोई कार्रवाई नहीं की है. अब ज्वाइंट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर राजेश शर्मा ने रिमाइंडर भेजते हुए कहा कि जिन बसों के पंजीयन में अनियमितता हुई है, उनका पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई की जाए. साथ ही बसों के पंजीयन की जांच और की गई कार्रवाई का प्रमाण पत्र भेजने के भी निर्देश दिए गए हैं. निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई नहीं करने वाले आरटीओ-डीटीओ पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है.