राजस्थान में स्वर्णकार समाज क्यों मांग रहा MBC का दर्जा: OBC से कितना अलग है MBC, जानें आरक्षण और फायदे
Rajasthan News: भीलवाड़ा में स्वर्णकार समाज ने OBC की जगह MBC में शामिल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा. समाज ने पिछड़ा वर्ग आयोग से सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सर्वे कराने की मांग की है.
Rajasthan News: राजस्थान के भीलवाड़ा में स्वर्णकार समाज ने OBC की जगह MBC में शामिल करने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया. समाजजनों ने स्वर्णकार समाज आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले राजस्थान राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा. जिसमें उन्होंने समाज के लिए विशेष सुरक्षात्मक व कानूनी प्रावधान लागू करने की भी मांग रखी. स्वर्णकार समाज अभी OBC सूची में है.
स्वर्णकार समाज के पिछड़ी स्थिति में होने का दावा
स्वर्णकार समाज का कहना है कि बदलती आर्थिक परिस्थितियों और पारंपरिक रोजगार के संकट के कारण वह अब अधिक पिछड़ी स्थिति में हैं. इसलिए उसे OBC से निकालकर MBC की विशेष आरक्षण व्यवस्था में शामिल किया जाए. अगर सरकार यह मांग स्वीकार करती है, तो लागू कानूनी व्यवस्था के अनुसार स्वर्णकार समाज को MBC आरक्षण के तहत सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ मिल सकता है.
स्वर्णकार समाज आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष एडवोकेट सीताराम सोनी ने कहा कि आज स्वर्णकार समाज की स्थिति बेहद चिंताजनक है. जब वर्ष 1993 में सोने-चांदी के भाव काफी कम थे, तो उस समय स्वर्णकार समाज को मंडल आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ओबीसी में शामिल किया गया था. आज सोने और चांदी के भाव आसमान छू रहे हैं. चांदी करीब ढाई लाख रुपये और सोना डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच चुका है.
इमीटेशन ज्वेलरी ने ले ली सोने की जगह
महंगाई और बढ़ते भावों के कारण कारीगरों के हाथ से काम लगातार खत्म होता जा रहा है. पहले महिलाएं बड़ी मात्रा में चांदी के आभूषण पहनती थीं, लेकिन अपराध और लूट की घटनाओं के डर से अब आभूषणों का चलन भी कम हुआ है. सोने की जगह इमीटेशन ज्वेलरी ने ले ली है. वहीं मशीनों और बड़े कारोबारियों के आने से छोटे स्वर्णकार कारीगरों का पारंपरिक काम लगभग समाप्त हो चुका है.
स्वर्णकार समाज को एमबीसी में शामिल करने की मांग
हालात इतने खराब हैं कि कई दुकानदारों के लिए दुकान का किराया निकालना भी मुश्किल हो गया है और उन्हें दूसरा काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. हमारी मांग है कि ओबीसी आयोग स्वर्णकार समाज की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष सर्वे करवाने के लिए टीम गठित करे और रिपोर्ट सरकार को सौंपे. जिससे स्वर्णकार समाज को एमबीसी में शामिल कर संवैधानिक प्रावधान और आरक्षण का लाभ मिल सके.
चोरी के मामलों में स्वर्णकारों को जबरन आरोपी बनाए जाने का आरोप
एडवोकेट सीताराम सोनी ने यह भी कहा कि आज चोरी के मामलों में स्वर्णकारों को जबरन आरोपी बनाए जाने की समस्या भी गंभीर है. यदि कोई आरोपी केवल स्वर्णकार का नाम ले देता है, तो कई बार बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के ही स्वर्णकार पर कार्रवाई कर दी जाती है. हमारी मांग है कि सुप्रीम कोर्ट की डी.के. बसु गाइडलाइन का पालन किया जाए. पहले नोटिस देकर उससे जवाब और दस्तावेज लिए जाएं. इसके बाद निष्पक्ष जांच की जाए और उसके बाद ही आवश्यक कार्रवाई की जाए.
OBC और MBC में अंतर
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में ऐसे समुदाय शामिल होते हैं, जिन्हें सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा माना गया है. वहीं अति पिछड़ा वर्ग (MBC), OBC के मुकाबले अधिक पिछड़े माने जाने वाले समुदायों के लिए बनाई गई एक विशेष श्रेणी है.
राजस्थान में OBC एक व्यापक श्रेणी है, जबकि MBC के लिए अलग आरक्षण व्यवस्था लागू है. MBC का उद्देश्य ऐसे समुदायों को आरक्षण का लाभ देना है, जिनका सरकारी नौकरियों और शिक्षा में प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम रहा है और जिन्हें सामाजिक-शैक्षणिक रूप से अधिक पिछड़ा माना जाता है.
MBC में शामिल होने की प्रक्रिया और फायदे
किसी समाज को MBC में शामिल करने से पहले सरकार उसकी सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति की जांच करवाती है. इसके लिए पिछड़ा वर्ग आयोग सर्वे करके अपनी रिपोर्ट सरकार को देता है. इसके बाद सरकार नियमों के तहत फैसला लेती है. MBC में शामिल होने पर सरकारी नौकरी और सरकारी शिक्षण संस्थानों में मिलने वाले MBC आरक्षण का लाभ मिल सकता है.
मौजूदा MBC समाजों के साथ आरक्षण के लिए मुकाबला बढ़ सकता है. इससे आरक्षण में हिस्सेदारी को लेकर विवाद भी हो सकता है. इसके अलावा MBC में शामिल होने से मिलने वाला वास्तविक लाभ सरकार के अंतिम फैसले और लागू नियमों पर निर्भर करेगा.