अग्निपथ योजना पर सरकार का बड़ा तोहफा! 75% अग्निवीरों का बढ़ा कार्यकाल, शेखावाटी के युवाओं में जोश हाई
केंद्र सरकार के अग्निपथ योजना में बदलाव के फैसले से राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के युवाओं में सेना भर्ती को लेकर उत्साह बढ़ने की उम्मीद है. अब 75% अग्निवीरों को चार साल बाद दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार मिलेगा. युवाओं और डिफेंस एकेडमी संचालकों ने फैसले का स्वागत करते हुए अग्निपथ योजना को फिर से नियमित भर्ती व्यवस्था बनाने की मांग की है.
केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना में बड़ा बदलाव करते हुए अग्निवीरों के लिए सेना में सेवा का अवसर बढ़ा दिया है. अब चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाले 75 प्रतिशत अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार दिया जाएगा. वहीं, पहले की व्यवस्था के तहत 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सेना में शामिल किया जाएगा.
'सेकेंड टूर ऑफ ड्यूटी' के तहत मिलेगा एक और मौका
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने 4 नवंबर को कैबिनेट के इस फैसले की जानकारी दी. अतिरिक्त दो वर्षों के कार्यकाल को 'सेकेंड टूर ऑफ ड्यूटी' नाम दिया गया है. दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल पूरा होने के बाद इच्छुक अग्निवीरों को नियमित सेना में शामिल होने का एक और अवसर मिलेगा. इसके लिए निर्धारित चयन प्रक्रिया और पात्रता मानदंडों को पूरा करना होगा.
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शेखावाटी के युवाओं में बढ़ेगा सेना भर्ती का रुझान
गौरतलब है कि अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच का चार साल का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 में पूरा होने जा रहा है. ऐसे में सरकार के इस फैसले से हजारों अग्निवीरों को सेना में अपनी सेवाएं जारी रखने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा.
राजस्थान के शेखावटी इलाके से सबसे ज्यादा युवा देश की सेना में भर्ती होते हैं. ऐसे में सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे वहां के युवाओं का कहना है कि इस फैसले युवाओं का दोबारा सेना में भर्ती होने का रूझान बढ़ेगा, जो पहले 4 साल नौकरी के फैसले के बाद कम हो गया था. साथ ही उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कि इसे पहले की तरह नियमित नौकरी कर दी जाए. इधर, डीडवाना के कुछ डिफेंस एकेडमी चलाने वाले प्रबंधकों ने कहा कि इस फैसले से युवाओं में रूझान बढ़ेगा.
2022 में लागू हुई थी अग्निपथ योजना
बता दें कि 14 जून 2022 को केंद्र सरकार ने सेना में भर्ती की पुरानी व्यवस्था में बदलाव करते हुए अग्निपथ योजना लागू की थी. इसके तहत युवाओं को चार साल के निश्चित कार्यकाल के लिए अग्निवीर के रूप में सेना में भर्ती किया जाने लगा. इसके बाद सेना की तैयारी करने वाले युवाओं में कमी आई थी.