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23 अक्टूबर से 16 नवंबर तक घोषित जिला परिषद, पंचायत समिति और पंच-सरपंच चुनाव का शेड्यूल, मानों एआई ने ड्राफ्ट कर दिया हो. जिसमें सिर्फ तारीखों का तालमेल देखा गया है, त्योहारों के बारे में सोचा तक नहीं गया. दीपावली जैसे बड़े त्योहारों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया. एक तरफ शिक्षक पहले ही अर्धवार्षिक परीक्षाओं के दबाव में हैं, तो दूसरी तरफ सैकड़ों किलोमीटर दूर ड्यूटी लगने के चलते, अब वे अपने परिवार के साथ त्योहार मनाने की खुशियों से भी दूर हो जाएंगे.
करवा चौथ (29 अक्टूबर) पर मतदान: करवा चौथ का व्रत जिसमें महिलाएं दिनभर निर्जला उपवास रखती हैं. इस दिन दूसरे चरण का मतदान रखना, महिला मतदाताओं के साथ-साथ चुनावी ड्यूटी में लगी महिला कर्मचारियों के लिए बेहद मुश्किल और अव्यावहारिक साबित होगा.
धनतेरस (6 नवंबर) पर चुनाव: दीपावली से ठीक दो दिन पहले धनतेरस से ही पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत हो जाती है. लोग खरीदारी,घर की साफ-सफाई और पारिवारिक तैयारियों में व्यस्त होते हैं. ऐसे दिन पंच-सरपंच का चुनाव रखना, आम जनजीवन और खरीदारी में सीधे तौर पर परेशानी डालेगा.
दिवाली (8 नवंबर) के आसपास चुनावी सरगर्मी: दीपावली साल का सबसे बड़ा त्योहार होता है. जब दूर-दराज के शहरों और राज्यों में रहने वाले लोग अपने घरों और गांवों जाते हैं. त्योहार के ठीक आगे-पीछे (14 और 16 नवंबर को वोटिंग है) लोग अपने परिवारों के साथ सुकून के पल नहीं बिता पाएंगे और चुनावी तनाव का असर पूरे दीपोत्सव के माहौल पर पड़ेगा.
दो बड़े नुकसान
पहला, त्योहार की तैयारियों और व्यस्तता के कारण मतदान प्रतिशत (Voter Turnout) में भारी गिरावट भी आ सकती है और दूसरा, चुनावी ड्यूटी में तैनात सरकारी कर्मचारियों और पुलिस बल को अपने परिवारों से दूर रहकर काम करना पड़ेगा, जिससे उनकी त्योहारों की खुशियां छीन जाएंगी.
अब इस बात को समझिए की जब शिक्षा विभाग ने अपना वार्षिक कैलेंडर (शिविरा पंचांग) बहुत पहले ही जारी कर दिया था और उसमें 4 से 15 नवंबर तक की छुट्टियां बतायी गयी थी, तो चुनाव आयोग को तारीखें तय करते वक्त इस बात ध्यान रखा जाना चाहिए था.अब धनतेरस और दीपावली पर चुनाव ड्यूटी का फरमान शिक्षकों के लिए किसी सजा से कम नहीं है. सरकार, चुनाव आयोग और शिक्षा विभाग को जल्द से जल्द एक मेज पर बैठकर इस समस्या का समाधान निकालना चाहिए.

शिक्षक संघ प्रदेशाध्यक्ष, विपिन शर्मा कहते हैं. पहले तो 15 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक अर्धवार्षिक परीक्षा है और दीवाली की छुट्टियां 4 से 15 नवंबर है. ऐसे में कैसे कोई बाड़मेर में पोस्टेड टीचर, अलवर में आकर अपने परिवार के साथ दिवाली मना पाएगा. सरकार को अर्धवार्षिक परीक्षा और दीवाली की छुट्टियों को छोड़कर चुनाव कराने चाहिए. हम इस मामले को लेकर सीएम भजनलाल शर्मा से मिलेगें और अपनी समस्या बताएंगे. हमें उम्मीद है कि सनातनी सरकार हमारी बात को समझेगी.