राजस्थान पंचायत चुनाव: गांव के मुखिया के लिए उमड़ा जनसैलाब, सरपंच चुनाव में 83% पार वोटिंग
राजस्थान पंचायत चुनाव के पहले चरण में सरपंच चुनने के लिए मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. 104 पंचायत समितियों में पंचायत समिति सदस्य चुनाव के दौरान 63.36% मतदान हुआ, जबकि सरपंच चुनाव में यह बढ़कर 83.05% पहुंच गया.
गांव की सरकार चुनने में वोटरों ने दिलचस्प तस्वीर दिखाई है. पहले चरण में ईवीएम के मुकाबले बैलेट पेपर पर ज्यादा वोट बरसे. 104 पंचायत समितियो में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य चुनने के लिए 63 फीसदी वोटिंग हुई लेकिन दो दिन बाद ही जब बात गांव का मुखिया चुनने की आई तो मतदान 83 फीसदी पार पहुंच गया. यानी करीब 20 प्रतिशत अंक ज्यादा मतदान. साफ है कि गांव की चौधर के चुनाव में वोटरों का जोश अलग ही नजर आया. अब सवाल ये है कि जिस उत्साह से ग्रामीणों ने अपना मुखिया चुना, क्या उसी रफ्तार से गांव की सड़क, पानी और विकास की समस्याएं भी दूर होंगी?
सरपंच चुनाव में 83.05% मतदान, पंचायत समिति से 19.69 अंक ज्यादा
गांव की सरकार चुनने के लिए ग्रामीण मतदाताओं का उत्साह दो अलग-अलग चुनावों में अलग-अलग नजर आया. जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए ईवीएम का बटन दबाने वाले मतदाताओं ने दो दिन बाद सरपंच चुनने के लिए बैलेट पेपर पर कहीं ज्यादा मतदान किया. प्रदेश के 16 जिलों में 104 पंचायत समितियों के पहले चरण के आंकड़े यही तस्वीर दिखा रहे हैं. पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव में जहां 63.36 फीसदी मतदान हुआ, वहीं सरपंच चुनाव में यह आंकड़ा बढ़कर 83.05 फीसदी पहुंच गया. यानी गांव के मुखिया के चुनाव में 19.69 प्रतिशत अंक ज्यादा मतदान दर्ज किया गया.
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पिछले चुनाव के मुकाबले भी बढ़ा मतदान प्रतिशत
वहीं, पिछले चुनाव की तुलना करें तो इस बार पहले चरण में सरपंच पद के लिए 83.05 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि पिछले चुनाव में 81.28 प्रतिशत वोटिंग हुई थी. इस तरह पिछले चुनाव के मुकाबले मतदान में 1.77 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है. मतदान के इन आंकड़ों ने ग्रामीण लोकतंत्र की एक दिलचस्प तस्वीर सामने रखी है. पंचायत समिति सदस्य चुनने की तुलना में सरपंच चुनने के लिए ज्यादा मतदाता मतदान केंद्रों तक पहुंचे. इसकी एक वजह सरपंच पद का गांव की रोजमर्रा की समस्याओं और स्थानीय फैसलों से सीधा जुड़ाव भी हो सकता है. सड़क, पानी, सफाई, नालियां और गांव के विकास से जुड़े मुद्दों पर ग्रामीणों का सबसे सीधा संपर्क सरपंच से होता है. हालांकि, मतदान प्रतिशत के आधार पर मतदाताओं की प्राथमिकताओं का निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता.
सरपंच चुनाव में पड़े 15.44 लाख ज्यादा वोट
प्रदेश में पहले चरण के पंचायत समिति चुनाव में करीब 53.66 लाख मतदाताओं ने मतदान किया था. इसके मुकाबले सरपंच चुनाव में करीब 69.10 लाख वोट पड़े. दोनों चुनावों में पड़े मतों की संख्या में करीब 15.44 लाख का अंतर रहा. इस तुलना की खास बात यह भी है कि पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के लिए मतदान ईवीएम से हुआ, जबकि सरपंच और वार्ड पंच के लिए मतदाताओं ने बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया. बैलेट पेपर से मतदान की प्रक्रिया अलग होने के बावजूद सरपंच चुनाव में मतदान प्रतिशत काफी अधिक रहा. जयपुर जिले की आठ पंचायत समितियों में भी यही रुझान सामने आया.
झोटवाड़ा में 89.70%, दूदू में 88.66% मतदान
जयपुर जिले की पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव में झोटवाड़ा में 72.02 फीसदी मतदान हुआ था, जबकि सरपंच चुनाव में यह बढ़कर 89.70 फीसदी पहुंच गया. यानी 17.68 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई. इसी तरह दूदू में पंचायत समिति चुनाव के 69.87 फीसदी के मुकाबले सरपंच चुनाव में 88.66 फीसदी मतदान हुआ. चौमूं में यह आंकड़ा 67.84 से बढ़कर 87.19 फीसदी पहुंच गया.
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जयपुर की भी आठ पंचायत समितियों में सरपंच चुनाव में ज्यादा वोटिंग
जयपुर की आठों पंचायत समितियों में सरपंच चुनाव का मतदान प्रतिशत पंचायत समिति सदस्य चुनाव से ज्यादा रहा. इससे स्थानीय स्तर पर सरपंच पद के चुनाव में अधिक मतदाता भागीदारी की तस्वीर सामने आई. वहीं, बाड़मेर की सेड़वा पंचायत समिति क्षेत्र में सरपंच चुनाव के लिए 93.03 फीसदी मतदान हुआ, जबकि पंचायत समिति सदस्य चुनाव में 71.10 फीसदी वोट पड़े थे. यहां 21.93 प्रतिशत अंक का अंतर रहा. पाली की रानी स्टेशन पंचायत समिति में पंचायत समिति सदस्य चुनाव के दौरान महज 40.02 फीसदी मतदान हुआ था. सरपंच चुनाव में यह बढ़कर 57.63 फीसदी पहुंच गया. हालांकि, यहां सरपंच चुनाव में मतदान का प्रतिशत अन्य कई क्षेत्रों की तुलना में कम रहा.
अब नई पंचायत सरकार के सामने विकास की चुनौती
बहरहाल, अब गांव की सरकार के गठन के साथ ग्रामीणों की निगाहें नए जनप्रतिनिधियों के कामकाज पर रहेंगी. चुनाव में बड़ी संख्या में मतदान करने वाले ग्रामीणों के लिए अगला सवाल यही है कि उनके गांव की समस्याओं का समाधान कितनी तेजी से होगा. मतदान के आंकड़ों का संदेश साफ है गांव के मुखिया के चुनाव में ग्रामीणों ने ज्यादा भागीदारी दिखाई. अब इस भागीदारी के बाद गांव की नई सरकार के सामने विकास और बुनियादी सुविधाओं की चुनौती होगी.