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राजस्थान पंचायत चुनाव : बीजेपी हो या कांग्रेस,आखिर किसकी ‘खीर में नींबू निचोड़ने’आ रही है BSP ?

Rajasthan Panchayat Chunav :   बहुजन समाज पार्टी ने राजस्थान में पंचायत चुनावों में सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की घोषणा कर दी. हालिया विधानसभा चुनावों में भले ही बीएसपी का प्रदर्शन बहुत अच्छा ना रहा हो.लेकिन पंचायत स्तर पर पार्टी का ये फैसला राजस्थान की सियासत में हलचल पैदा करने के लिए काफी है. बीएसपी का ये दांव ना सिर्फ क्षेत्रीय समीकरणों को और उलझाएगा, बल्कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है.

राजस्थान पंचायत चुनाव : बीजेपी हो या कांग्रेस,आखिर किसकी ‘खीर में नींबू निचोड़ने’आ रही है BSP ?
Image Credit: rajasthan panchayat chunav bsp strategy impact on bjp congress

राजस्थान का पूर्वी इलाका - जहां यूपी बॉर्डर और जातीय समीकरण मायने रखते है
बीएसपी के सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का सबसे गहरा प्रभाव पूर्वी राजस्थान में देखने को मिलेगा.जहां भरतपुर,धौलपुर,करौली,अलवर और सवाई माधोपुर जैसे जिले आते हैं.ये पूरा इलाका उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा हुआ है, यानी कि (ब्रज और मेवात क्षेत्र)से. यूपी से सटे होने के चलते यहां मायावती और बीएसपी का वैचारिक और राजनीतिक प्रभाव हमेशा से मजबूत रहा है.इस इलाके में अनुसूचित जाति (SC),विशेषकर जाटव समुदाय की बहुलता है, जो पार्टी के पारंपरिक और कोर वोट बैंक माना जाते है. पंचायत चुनावों में मतदान सीधे तौर पर स्थानीय और जातीय समीकरणों (जाटव, गुर्जर, मीना, और मुस्लिम) पर होता है और ऐसे में बीएसपी अपने सिंबल पर मजबूत जाटव या कोई दलित प्रत्याशी उतारती है,तो ये वोट बैंक एकजुट हो सकता है.

किसकी खीर में गिरेगा नींबू ? 
बीएसपी का पंचायत चुनाव में एक्टिव होना.मुख्य रूप से कांग्रेस के लिए ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकता है.जब बीएसपी कमजोर होती है, तो उसका कोर दलित और जाटव वोट आमतौर पर कांग्रेस की तरफ शिफ्ट हो जाता है ,लेकिन पंचायत चुनावों में जब बीएसपी का अपना प्रत्याशी मैदान में होगा,तो वो सीधे तौर पर कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाएगी. वहीं दूसरी ओर,बीजेपी जो हाल ही में दलित वोटर्स को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है,उसके लिए भी नए समीकरण साधना मुश्किल हो सकता है. कुल मिलाकर, चूंकि पंचायत चुनाव में स्थानीय स्तर पर हार-जीत का अंतर बहुत कम होता है,ऐसे में बीएसपी दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के लिए 'खीर में नींबू निचोड़ने' का काम मजबूती से कर सकती है.

फ्लैशबैक: जब BSP के 6 विधायकों ने बचाई थी अशोक गहलोत की सरकार
2008 के विधानसभा चुनावों में राजस्थान की राजनीति में बीएसपी की भूमिका खास रही थी.उस चुनाव में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था. कांग्रेस के पास 100 नहीं,बल्कि 96 विधायक थे (बहुमत के लिए 101 चाहिए थे). दूसरी तरफ बीएसपी ने शानदार प्रदर्शन किया था और 6 सीटें जीती थीं. अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनाया गया और कुछ वक्त के बाद बीएसपी के वे सभी 6 विधायक कांग्रेस में विलय कर गए. इससे कांग्रेस का आंकड़ा 96 से बढ़कर 102 हो गया और सरकार को पूर्ण स्थिरता मिल गई.
 
2018 में दोहराया गया इतिहास
दिलचस्प बात ये  रही कि ठीक 10 साल बाद 2018 में ये इतिहास फिर दोहराया गया. 2018 में कांग्रेस ने ठीक 100 सीटें जीती थीं (पूर्ण बहुमत से 1 दूर). बीएसपी ने फिर से 6 सीटें जीतीं. अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री बनने के बाद,2019 में एक बार फिर बीएसपी के सभी 6 विधायकों (राजेंद्र सिंह गुढ़ा (उदयपुरवाटी),जोगिंदर सिंह अवाना (नदबई),वाजिब अली (नगर),लाखन सिंह मीना (करौली),संदीप यादव (तिजारा), दीपचंद खैरिया (किशनगढ़ बास) ने कांग्रेस का दामन थाम लिया और कांग्रेस का आंकड़ा 106 पहुंच गया. मायावती ने दोनों बार कांग्रेस पर 'धोखाधड़ी' और विधायकों को 'खरीदने' का आरोप लगाया था.

वर्तमान पंचायत चुनाव और बीएसपी की चुनौती
ये सच है कि 2023 के पिछले विधानसभा चुनावों में बीएसपी का ग्राफ काफी गिरा है (पार्टी केवल 2 सीटें जीत पाई और वोट शेयर भी घटा). हांलाकि यहां ये समझना भी जरूरी है कि विधानसभा चुनाव और पंचायत चुनाव की प्रकृति में जमीन-आसमान का फर्क होता है. पंचायत चुनाव चेहरे,स्थानीय संपर्क,खाप और जातिगत गणित पर लड़े जाते हैं. पूर्वी राजस्थान में जाटव,मेघवाल और बैरवा जैसी जातियों के प्रभावशाली स्थानीय नेता जब 'हाथी' के चुनाव चिह्न पर मैदान में उतरेंगे,तो वे राष्ट्रीय मुद्दों के बजाय अपनी जातिगत एकजुटता पर वोट मांगेंगे.

बीएसपी का ये कदम भले ही उसे पूरे राज्य में एक बड़ी ताकत न बना पाए,लेकिन पूर्वी और उत्तरी राजस्थान (शेखावाटी के कुछ हिस्से) में ये कई सीटों पर जीत-हार का अंतर तय करेगा. कांग्रेस को अपने दलित वोट बैंक को छिटकने से रोकना होगा,तो बीजेपी को यह देखना होगा कि बीएसपी की उपस्थिति का फायदा उसे मिले,न कि उल्टा नुकसान हो जाए. राजस्थान के पंचायत रण में 'हाथी' की चाल निश्चित तौर पर कई दिग्गजों का खेल बिगाड़ने वाली है.

 

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About the Author

Pragati Pant Awasthi

Pragati Pant Awasthi

मीडिया की दुनिया में 18 साल का सफर... एंकरिंग से लेकर डिजिटल की स्क्रीन तक, हर नया बदलाव दिल से अपनाया, जो सोचती हूं, वही कहती हूं, बातों को घुमाना मेरी आदत नहीं, दिल की बात जुबां पर रखना पहचान है. फिलहाल 'ज़ी राजस्थान डिजिटल' के साथ सफर जारी है और हर दिन कुछ नया सीखने की ललक बरकरार है और रहेगी. Pragati.Pant@india.com ईमेल के जरिए आप संपर्क कर सकते हैं.
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