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Rajasthan Nikay Chunav: राजस्थान में नगर निकाय चुनाव को लेकर अब तस्वीर तेजी से साफ हो रही है. नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख के बाद कई वार्डों में मुकाबला सीधा हो गया है, जबकि कुछ जगह निर्दलीय और बागी उम्मीदवार अब भी चुनाव का गणित बदल सकते हैं. भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने बागियों को मनाने की कोशिश की. कई उम्मीदवारों ने नाम वापस लेकर पार्टी प्रत्याशियों का समर्थन भी किया. अब चुनावी मैदान में बचे उम्मीदवारों के बीच मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प हो गया है.
रायसिंहनगर: कई वार्डों में बदला मुकाबला
रायसिंहनगर में नाम वापसी के आखिरी दिन राजनीतिक हलचल तेज रही. कांग्रेस को अपने कुछ बागी उम्मीदवारों की चिंता रही, वहीं भाजपा और कांग्रेस दोनों ने निर्दलीय उम्मीदवारों को मनाने की कोशिश की. वार्ड 31 में निर्दलीय रवि शंकर धनुका और मोहित लखोटिया ने नाम वापस ले लिया. इससे यहां अब भाजपा के डॉ. मयंक सिंघल और कांग्रेस प्रत्याशी के बीच सीधी टक्कर का रास्ता साफ हो गया.
वार्ड 2 से निर्दलीय संदीप कुमार के हटने से भी मुकाबले का समीकरण बदला है. हालांकि दूसरे वार्डों में कांग्रेस के बागी निर्दलीय के तौर पर मैदान में हैं. ऐसे में कुछ सीटों पर सीधी लड़ाई तो कुछ पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है. अंतिम तस्वीर में निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका अहम रहने वाली है.
चित्तौड़गढ़ वार्ड 36: विकास के मुद्दों पर आमने-सामने
चित्तौड़गढ़ का वार्ड 36 इस चुनाव में चर्चित सीटों में है. यहां 2073 मतदाता हैं और भाजपा के लोकेश सेठिया का मुकाबला कांग्रेस के नागेंद्र सिंह से है. दोनों प्रत्याशी घर-घर जाकर लोगों से संपर्क कर रहे हैं.
वार्ड में सफाई, नालियों की मरम्मत, पार्क, स्ट्रीट लाइट, आवारा पशु और सीसीटीवी जैसे मुद्दे चर्चा में हैं. भाजपा इन समस्याओं को जल्द दूर करने का भरोसा दे रही है. कांग्रेस पुराने विकास कार्यों का हवाला देते हुए बाकी बुनियादी समस्याओं को दूर करने की बात कर रही है. यानी इस सीट पर चुनावी चर्चा का केंद्र बड़े वादों से ज्यादा रोजमर्रा की सुविधाएं हैं.
कोटा: 35 से ज्यादा उम्मीदवारों ने नाम वापस लिया
कोटा नगर निगम में नाम वापसी के आखिरी दिन भाजपा और कांग्रेस ने अपने बागियों को मनाने में पूरी ताकत लगा दी. 35 से ज्यादा उम्मीदवारों के नाम वापस लेने से कई वार्डों का मुकाबला बदल गया. वार्ड 13 में निर्दलीय मोहम्मद अकरम खान ने नाम वापस लेकर कांग्रेस के फैजल बेग का समर्थन किया.
वार्ड 15 में भाजपा के बागी नमन गोयल ने भी नाम वापस लेकर भाजपा के शुभम शर्मा का साथ दिया. इसके अलावा वार्ड 20, 60, 5 और 89 समेत कई वार्डों में निर्दलीय और बागी उम्मीदवार मैदान से हटे. कुछ वार्डों में एक साथ कई उम्मीदवारों ने नाम वापस लिया. अब अंतिम सूची के बाद ही साफ होगा कि कौन सा वार्ड सीधी टक्कर में बदला और कहां मुकाबला बहुकोणीय रहा.
जैसलमेर: कांग्रेस को निर्विरोध जीत
जैसलमेर में वार्ड 23 से कांग्रेस प्रत्याशी लखमन निर्विरोध चुने गए. भाजपा प्रत्याशी जया दैया ने पहले ही नाम वापस ले लिया था. आखिरी दिन दो निर्दलीय उम्मीदवारों के हटने से कांग्रेस की राह पूरी तरह साफ हो गई.
इसका सीधा असर भाजपा के आंकड़े पर पड़ा है. अब भाजपा 44 वार्डों में चुनाव लड़ रही है. यानी एक सीट पर चुनाव की स्थिति ही नहीं बनी और कांग्रेस को निर्विरोध जीत मिल गई.
किशनगढ़: चुनाव कार्यालय खुलते ही शक्ति प्रदर्शन
किशनगढ़ के वार्ड 38 में भाजपा प्रत्याशी दिनेश सिंह राठौड़ ने गुरुवार को अपना चुनाव कार्यालय शुरू किया. पूजा-पाठ और वैदिक मंत्रों के बीच स्थानीय लोगों ने कार्यालय का उद्घाटन किया. कार्यक्रम को भाजपा के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा गया.
अब प्रत्याशी का जनसंपर्क अभियान तेज होगा. इस वार्ड में विकास और लोगों का भरोसा चुनावी चर्चा के मुख्य मुद्दे हैं. आने वाले दिनों में घर-घर संपर्क और छोटी बैठकों के जरिए मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने पर जोर रहेगा.
जोधपुर: बागियों को मनाने में जुटे बड़े नेता
जोधपुर में नाम वापसी के आखिरी दिन भाजपा और कांग्रेस दोनों ने बागी और निर्दलीय उम्मीदवारों को मैदान से हटाने की कोशिश की. कई नेताओं ने खुद उम्मीदवारों से संपर्क किया. कुछ को नाम वापस लेने के लिए सहायक रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय तक भी ले जाया गया.
नाम वापस लेने वाले कुछ उम्मीदवारों का पार्टी नेताओं ने माला पहनाकर स्वागत किया. पार्टियों की कोशिश यही रही कि अपने ही खेमे के उम्मीदवार अलग-अलग वोट न काटें. कुछ उम्मीदवारों ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने विकास के कामों को प्राथमिकता देने का भरोसा दिया है. अब नाम वापसी के बाद जो अंतिम सूची बनी है, वही असली मुकाबले की दिशा तय करेगी.
सीकर: 64 वार्डों में 263 उम्मीदवार मैदान में
सीकर में कुल 65 वार्ड हैं. वार्ड 65 से कांग्रेस प्रत्याशी पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं. इसलिए अब 64 वार्डों में चुनाव होगा, जहां 263 उम्मीदवार मैदान में हैं.
कुल 440 नामांकन पत्र दाखिल हुए थे. जांच और नाम वापसी के बाद 68 उम्मीदवारों ने मैदान छोड़ दिया. भाजपा और कांग्रेस के सामने कुछ वार्डों में अपने ही बागियों और निर्दलीयों की चुनौती है. वहीं कुछ जगह राजनीतिक सहमति की तस्वीर भी दिखाई दी है. अब मुकाबला मुख्य रूप से इस बात पर रहेगा कि पार्टी के उम्मीदवार अपने वोट को एकजुट रख पाते हैं या नहीं.
डूंगरपुर: 38 वार्डों में होगा मतदान
डूंगरपुर में 40 वार्ड हैं. इनमें दो वार्डों से भाजपा के पार्षद निर्विरोध चुने जा चुके हैं. बाकी 38 वार्डों में 9 सितंबर को मतदान होगा. यहां 12 वार्डों में भाजपा, कांग्रेस और बीएपी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है. 20 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं.
चार वार्डों में भाजपा के बागी भी चुनौती दे रहे हैं. दो वार्ड ऐसे हैं जहां भाजपा-कांग्रेस-बीएपी के साथ निर्दलीय भी मैदान में हैं. वार्ड 23 में कांग्रेस का नामांकन खारिज हुआ, जबकि वार्ड 28 में कांग्रेस प्रत्याशी ने नाम वापस ले लिया. दोनों जगह भाजपा को सीधा फायदा मिला और उसके प्रत्याशी निर्विरोध हो गए. नाम वापसी के आखिरी दिन छह उम्मीदवारों ने सात नामांकन वापस लिए. अब 38 वार्डों में 97 उम्मीदवार बचे हैं. 4 सितंबर को चुनाव चिन्ह दिए जाएंगे.
झुंझुनूं: 72 उम्मीदवारों ने छोड़ा मैदान
झुंझुनूं में नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. कुल 72 उम्मीदवारों ने नाम वापस लिए. इनमें 70 निर्दलीय, एक आरएलपी और एक आप का उम्मीदवार शामिल है. अब 60 वार्डों में 262 उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे.
4 सितंबर को उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह मिलेंगे. प्रशासन ने चुनाव से जुड़ी शिकायतों के लिए कंट्रोल रूम बनाया है. साथ ही लोगों को मतदान और चुनाव प्रक्रिया की जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है. अब पार्टियों का पूरा फोकस प्रचार और मतदाताओं तक पहुंच बनाने पर रहेगा.
अजमेर के सबसे ज्यादा सियासी हलचल वाले वार्ड
अजमेर में नाम वापसी के आखिरी दिन भाजपा और कांग्रेस ने बागियों को मनाने की कोशिश की. कुल 125 निर्दलीय उम्मीदवारों ने नाम वापस लिया. इसके बावजूद कई बागी मैदान में रह गए हैं, जो करीबी मुकाबलों में पार्टी प्रत्याशियों का खेल बिगाड़ सकते हैं.
कांग्रेस महिला मोर्चा की अध्यक्ष और पूर्व पार्षद लक्ष्मी बुंदेल ने टिकट नहीं मिलने पर पार्टी कार्यालय में नाराजगी जताई. वहीं वार्ड 24 से भाजपा प्रत्याशी अनुज चौहान का नामांकन आपराधिक मामलों के चलते खारिज हो गया. भाजपा ने यहां निर्दलीय हेमराज थानवाल को समर्थन दिया है. नामांकन की स्थिति के बाद भाजपा के 79 और कांग्रेस के 77 प्रत्याशी मैदान में हैं. भाजपा ने सभी 80 वार्डों में प्रत्याशी उतारे थे, जबकि कांग्रेस ने वार्ड 3 और 4 में प्रत्याशी नहीं उतारा.
वार्ड 2 में कांग्रेस ब्लॉक प्रवक्ता ब्रजकिशोर जोशी के बेटे यश जोशी ने निर्दलीय नामांकन वापस लेकर भाजपा प्रत्याशी रितु ममनानी का समर्थन किया. वार्ड 11 में निर्दलीय आशा कुमारी ने कांग्रेस प्रत्याशी और अपनी भाभी संजना के समर्थन में नाम वापस लिया. वार्ड 41 में कांग्रेस प्रत्याशी ऋषभ सिंह का नामांकन आपराधिक मामले के कारण खारिज हुआ. वार्ड 4 सबसे ज्यादा चर्चा में है, जहां कांग्रेस प्रत्याशी नहीं है. यहां पूर्व महापौर धर्मेंद्र गहलोत की पत्नी निर्दलीय हेमा गहलोत का मुकाबला भाजपा की मणिका जैन से है, जो पहले कांग्रेस में थीं.
अब किसका गणित मजबूत?
नाम वापसी के बाद राजस्थान के इन निकाय चुनावों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि बागी और निर्दलीय किसका खेल बनाएंगे और किसका बिगाड़ेंगे. जहां बागियों ने नाम वापस लिया है, वहां भाजपा और कांग्रेस दोनों को राहत मिली है. लेकिन जिन वार्डों में वे मैदान में रह गए हैं, वहां पार्टी के वोटों में बंटवारे की आशंका बनी हुई है.
डूंगरपुर जैसे जिलों में बीएपी की मौजूदगी ने मुकाबले को और दिलचस्प बनाया है. वहीं अजमेर, जोधपुर, कोटा और रायसिंहनगर में बागियों की भूमिका अहम है. अब नाम वापसी के बाद मैदान में बचे उम्मीदवारों के पास प्रचार के लिए सीमित समय है. ऐसे में आने वाले दिनों में घर-घर संपर्क, स्थानीय मुद्दे और वोटों को एकजुट रखने की रणनीति चुनाव का रुख तय करेगी.