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Mayor And Deputy-Mayor Election: राजस्थान के 7 नगर निगमों में मेयर चुनाव के बाद अब डिप्टी मेयर के नतीजे भी सामने आ गए हैं. मेयर के चुनाव में भाजपा ने 6 नगर निगमों में जीत दर्ज की थी, जबकि बीकानेर में कांग्रेस का मेयर बना. अब डिप्टी मेयर के चुनाव में भी भाजपा ने 7 में से 6 जगह बाजी मारी है. पाली में कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी महबूब टी डिप्टी मेयर चुने गए. खास बात यह रही कि अजमेर और पाली में डिप्टी मेयर का फैसला बराबर वोट आने के बाद लॉटरी से हुआ. वहीं बीकानेर में कांग्रेस का मेयर होने के बावजूद डिप्टी मेयर भाजपा का बना.
पहले जानिए 7 निगमों में कौन बना मेयर
मेयर चुनाव में अजमेर से भाजपा की अनामिका शर्मा 43 वोट लेकर विजयी हुईं. उदयपुर में भाजपा के पारस सिंघवी को 55 वोट मिले. बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला मेयर बने. भरतपुर में अनुराधा सिंह और भीलवाड़ा में जसवंत कंवर निर्विरोध मेयर चुनी गईं. अलवर में भाजपा की सुमनलता अग्रवाल ने 42 वोट लेकर जीत दर्ज की, जबकि पाली में भाजपा की नमिता बुबकिया 33 वोट लेकर मेयर बनीं. इस तरह 7 निगमों में 6 मेयर भाजपा के और एक कांग्रेस का रहा.
अब डिप्टी मेयर में क्या हुआ?
डिप्टी मेयर चुनाव में भी भाजपा का दबदबा देखने को मिला. उदयपुर में भाजपा के दिनेश भट्ट ने कांग्रेस के लक्ष्मीनारायण मेघवाल को 32 वोट से हराया. अजमेर में भाजपा के हेमंत सांखला और कांग्रेस के नोरत गुर्जर को बराबर 40-40 वोट मिले. इसके बाद लॉटरी से भाजपा के हेमंत सांखला विजयी घोषित हुए.
अलवर में भाजपा के अजय पूनिया ने कांग्रेस की ममता सैनी को 16 वोट से हराया. बीकानेर में भाजपा के पंकज गहलोत ने कांग्रेस की नसीमा बानो को महज 2 वोट से शिकस्त दी. यहां का नतीजा इसलिए खास रहा क्योंकि बीकानेर में मेयर कांग्रेस के अनिल कल्ला हैं, लेकिन डिप्टी मेयर भाजपा के पंकज गहलोत बने.
पाली में फिर बदला वोटों का गणित
पाली का नतीजा भी काफी दिलचस्प रहा. यहां डिप्टी मेयर पद के लिए निर्दलीय महबूब टी और भाजपा के विक्रमपाल सिंह के बीच मुकाबला हुआ. दोनों को बराबर वोट मिलने के बाद लॉटरी से फैसला किया गया और महबूब टी विजयी रहे. उन्हें कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था. यानी पाली में मेयर भाजपा का है, जबकि डिप्टी मेयर कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी बना है.
अजमेर में मेयर और डिप्टी मेयर दोनों भाजपा के
अजमेर में मेयर चुनाव का नतीजा पहले ही काफी चर्चा में रहा था. 80 वार्ड वाले निगम में कांग्रेस ने 37 और भाजपा ने 32 वार्ड जीते थे, जबकि 11 सीटों पर निर्दलीय जीते थे. इसके बावजूद मेयर पद भाजपा की अनामिका शर्मा ने 43 वोट लेकर जीता.
अब डिप्टी मेयर पद पर भी भाजपा के हेमंत सांखला की जीत हुई है. हालांकि उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी के बराबर 40 वोट मिले और फैसला लॉटरी से हुआ. यानी अजमेर में पार्षदों की संख्या और मेयर-डिप्टी मेयर चुनाव का नतीजा एक जैसा नहीं रहा.
उदयपुर में भाजपा का मजबूत गणित
उदयपुर में भाजपा के पारस सिंघवी 55 वोट लेकर मेयर बने थे. डिप्टी मेयर चुनाव में भी भाजपा के दिनेश भट्ट ने बड़ी बढ़त के साथ जीत दर्ज की. यहां भाजपा के पास 53 पार्षद होने की जानकारी सामने आई थी और मेयर चुनाव में भी सिंघवी को 55 वोट मिले थे. इससे डिप्टी मेयर चुनाव में भाजपा की स्थिति मजबूत रही.
अलवर में मेयर के बाद डिप्टी मेयर भी भाजपा का
अलवर नगर निगम में भाजपा की सुमनलता अग्रवाल 42 वोट लेकर मेयर बनीं. कांग्रेस प्रत्याशी को 23 वोट मिले थे. इसके बाद डिप्टी मेयर पद पर भाजपा के अजय पूनिया ने भी जीत दर्ज की. यहां भाजपा ने दोनों प्रमुख पद अपने नाम किए.
बीकानेर में कांग्रेस के मेयर, भाजपा का डिप्टी मेयर
बीकानेर सबसे अलग तस्वीर वाला निगम रहा. यहां कांग्रेस के अनिल कल्ला मेयर बने, लेकिन डिप्टी मेयर का पद भाजपा के पंकज गहलोत ने जीत लिया. डिप्टी मेयर चुनाव में गहलोत ने कांग्रेस की नसीमा बानो को सिर्फ 2 वोट से हराया. यानी एक ही नगर निगम में मेयर और डिप्टी मेयर अलग-अलग दलों के हैं.
भरतपुर और भीलवाड़ा में क्या हुआ?
भरतपुर में भाजपा की अनुराधा सिंह निर्विरोध मेयर चुनी गई थीं. इसके बाद डिप्टी मेयर पद पर भाजपा की अंबिका सैनी ने कांग्रेस के गजेंद्र सैनी को 34 वोट से हराया. भीलवाड़ा में भाजपा की जसवंत कंवर निर्विरोध पहली महिला मेयर बनीं. डिप्टी मेयर पद भी भाजपा के राधेश्याम सोमानी के नाम रहा और वे निर्विरोध चुने गए.
7 शहरों का पूरा गणित एक नजर में
सबसे बड़ा सवाल: पार्षदों की संख्या से अलग क्यों आया नतीजा?
इन चुनावों में सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि किस पार्टी के कितने पार्षद जीते हैं. मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में पार्षदों की वोटिंग होती है, इसलिए पार्टी के अलावा निर्दलीय पार्षदों का समर्थन और अलग-अलग राजनीतिक समीकरण भी असर डाल सकते हैं. अजमेर इसका बड़ा उदाहरण है, जहां कांग्रेस के पास भाजपा से ज्यादा वार्ड थे, लेकिन मेयर और डिप्टी मेयर दोनों पद भाजपा के खाते में गए.
पाली में भी इसी तरह मेयर भाजपा का बना, जबकि डिप्टी मेयर कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी ने जीता. बीकानेर में तो तस्वीर और अलग रही, जहां मेयर कांग्रेस का है और डिप्टी मेयर भाजपा का.
7 निगमों में अंतिम तस्वीर क्या बनी?
अगर मेयर और डिप्टी मेयर दोनों पदों को एक साथ देखें तो 7 नगर निगमों में भाजपा ने 6 मेयर और 6 डिप्टी मेयर पद जीते हैं. कांग्रेस को मेयर पद सिर्फ बीकानेर में मिला, जबकि पाली में कांग्रेस समर्थित निर्दलीय महबूब टी डिप्टी मेयर बने. इस तरह इन सातों निगमों में सबसे दिलचस्प बात सिर्फ किस पार्टी ने कितनी सीटें जीतीं, यह नहीं है, बल्कि यह भी है कि पार्षदों के चुनाव के बाद मेयर और डिप्टी मेयर चुनने के दौरान स्थानीय समीकरण किस तरह बदले.