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Rajasthan Niaky Chunav 2026: जयपुर में वोटिंग से एक दिन पहले अमीन कागजी ने दिया बड़ा बयान, बंटोगे तो कटोगे

यूपी का नारा राजस्थान निकाय चुनाव में सुनने को मिला. दरअसल नगर निगम चुनाव से पहले कांग्रेस विधायक अमीन कागजी का 'बंटो मत, बंटोगे तो कटोगे' वाला वीडियो वायरल हो रहा है. जयपुर के 150 वार्डों में 723 प्रत्याशी मैदान में हैं और भाजपा ने इस बार 8 मुस्लिम उम्मीदवार उतारकर कांग्रेस के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है.

Rajasthan Niaky Chunav 2026: जयपुर में वोटिंग से एक दिन पहले अमीन कागजी ने दिया बड़ा बयान, बंटोगे तो कटोगे
Image Credit: राजस्थान निकाय चुनाव 2026

Rajasthan Niaky Chunav 2026: राजस्थान नगर निगम चुनाव के दूसरे चरण में जयपुर में शुक्रवार, 11 सितंबर को मतदान होना है. मतदान से पहले कांग्रेस विधायक अमीन कागजी का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, इस वीडियो में अमीन कागजी बंटो मत, बंटोगे तो कटोगे नारा देते हुए दिखाई दे रहे हैं.

कांग्रेस विधायक अमीन कागजी का ये वीडियो चुनावी चर्चा को नई दिशा दे रहा है. कागजी का यह संदेश सीधे तौर पर मुस्लिम मतदाताओं को एकजुट रहने की अपील के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, इसके साथ ही राजनीतिक सवाल भी उठ रहा है कि जयपुर में मुस्लिम वोट आखिर बंट कहां रहा है.

इधर,  कांग्रेस विधायक अमीन कागजी ने अपने 'बंटोगे तो कटोगे' वाले बयान को लेकर सफाई दी है. उन्होंने कहा कि 'बंटोगे तो कटोगे' कोई रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क नहीं है, बल्कि मूल रूप से इस नारे का इस्तेमाल भाजपा नेताओं की ओर से किया गया था. चुनाव प्रचार के दौरान इसी नारे के जवाब में बयान देने वाले कागजी ने इसे 'टिट फॉर टैट' बताया. उन्होंने कहा कि जिस तरीके से उन्हें बिखेरने की कोशिश की जा रही है, उसके जवाब में लोगों को यह बताना भी जरूरी है कि जिस तरीके से ये हमको बिखेरना चाहते हैं, बिखरने वाला नहीं है मुसलमान. 

CM योगी आदित्यना का नारा राजस्थान निकाय चुनाव में 
यह नारा राजनीतिक तौर पर इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि 'बंटेंगे तो कटेंगे' का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुनावी राजनीति में प्रमुख नारे के रूप में हो चुका है. अब कांग्रेस नेता की ओर से इसी तर्ज का संदेश सामने आने पर इसे लेकर सियासी तंज भी शुरू हो गया है. 

जयपुर नगर निगम में इस बार 150 वार्डों में 723 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. कई वार्डों में मुकाबला बहुकोणीय है, जबकि कुछ वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है. ऐसे में किसी एक समुदाय के वोट का एक ही उम्मीदवार के पक्ष में पूरी तरह जाना आसान नहीं माना जा रहा. सबसे बड़ा राजनीतिक बदलाव भाजपा की रणनीति में दिखाई दे रहा है. भाजपा ने इस बार जयपुर में 8 मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है यानी कांग्रेस के सामने चुनौती सिर्फ दूसरे दलों से नहीं, बल्कि मुस्लिम बहुल इलाकों में भाजपा के मुस्लिम प्रत्याशियों और निर्दलीय उम्मीदवारों से भी है. वार्ड 109 इसका एक दिलचस्प उदाहरण है. यहां करीब 24 हजार मतदाताओं में लगभग 21 हजार मुस्लिम मतदाता बताए जा रहे हैं और भाजपा ने मुस्लिम प्रत्याशी को मैदान में उतारा है. 

अमीन कागजी का विवादों से जुड़ाव नया नहीं है. 

 2021: राजस्थान कॉलेज नमाज विवाद
साल 2021 में राजस्थान कॉलेज में नमाज पढ़ने को लेकर हुए विवाद में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी. इसके बाद भाजपा नेताओं ने उन पर धार्मिक मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया था.

2022: अपनी ही सरकार के मंत्री के खिलाफ धरना
2022 में अपनी ही सरकार के मंत्री के खिलाफ धरना देकर भी कागजी सुर्खियों में आए. उन्होंने तत्कालीन चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीणा के खिलाफ अपने विधानसभा क्षेत्र से जुड़े तबादलों के मुद्दे पर विरोध जताया था. कांग्रेस सरकार के भीतर विधायक और मंत्री के बीच इस टकराव ने काफी राजनीतिक चर्चा बटोरी. 

2023: शांति धारीवाल से सार्वजनिक टकराव
साल 2023 में तत्कालीन यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के साथ भी कागजी का सार्वजनिक विवाद सामने आया. जयपुर के विकास कार्यों को लेकर उन्होंने धारीवाल पर सवाल उठाते हुए कहा था कि क्या कोटा से सरकार बन जाएगी? उनके इस बयान को कांग्रेस के भीतर जयपुर बनाम कोटा की राजनीति के रूप में भी देखा गया.

2024: ‘बेचारी मैडम’ टिप्पणी पर विवाद
जुलाई 2024 में विधानसभा में 'बेचारी मैडम' टिप्पणी के बाद कागजी एक बार फिर विवादों में घिरे. बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री दीया कुमारी पर की गई टिप्पणी को भाजपा ने महिला के अपमान से जोड़कर मुद्दा बनाया. वहीं कांग्रेस की ओर से इसे राजनीतिक तंज बताया गया. 

2025: सरकारी स्कूल में कुर्सी पर बैठने का मामला
2025 में सरकारी स्कूल में प्रधानाचार्य की कुर्सी पर बैठने की तस्वीर सामने आने के बाद भी कागजी को भाजपा के निशाने का सामना करना पड़ा. सोशल मीडिया पर इसे लेकर सवाल उठे कि जनप्रतिनिधि का सरकारी अधिकारी की कुर्सी पर बैठना कितना उचित है.

2026: चांदपोल दरगाह विवाद में आमने-सामने
2026 में चांदपोल दरगाह का विवाद कागजी के लिए एक और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया. दरगाह की छत के निर्माण को लेकर भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य और कागजी आमने-सामने आए. मामला विधायक निधि, निर्माण अनुमति और पुराने शहर के हेरिटेज क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण विवाद और बढ़ गया. 

नूरानी मस्जिद प्रकरण में भी आया नाम
इसके बाद नूरानी मस्जिद प्रकरण में भी कागजी का नाम चर्चा में आया. मस्जिद पर जेडीए की कार्रवाई के विरोध में हुई बैठकों और सामने आए वीडियो को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति के आरोप लगाए. हालांकि वायरल वीडियो में कही गई हर बात को सीधे कागजी का बयान मानना उचित नहीं है और इस मामले में अलग-अलग बयानों और वक्ताओं को अलग करके देखना जरूरी है.

निकाय चुनाव में क्यों महत्वपूर्ण है यह रिकॉर्ड?
जयपुर में मतदान से ठीक पहले अमीन कागजी के पुराने बयानों और विवादों की चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि किशनपोल और आसपास का क्षेत्र लंबे समय से धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील इलाका माना जाता है. कागजी के समर्थक उनके इन बयानों को अपने क्षेत्र और समुदाय के मुद्दों पर मुखर रहने की राजनीति बताते हैं, जबकि भाजपा इन्हीं घटनाओं को ध्रुवीकरण और तुष्टिकरण की राजनीति के उदाहरण के तौर पर पेश करती है.

अब सवाल यह है कि निकाय चुनाव में मतदाता स्थानीय मुद्दों-सड़क, सफाई, सीवर, विकास और नगर निगम की व्यवस्था को प्राथमिकता देता है या फिर विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तरह बड़े राजनीतिक और धार्मिक मुद्दे स्थानीय चुनाव के मतदान व्यवहार को प्रभावित करते हैं? जयपुर नगर निगम चुनाव में मतदान से पहले अमीन कागजी का राजनीतिक रिकॉर्ड इसी वजह से एक बार फिर चर्चा में है.

Report- Ashutosh Sharma 

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About the Author

Sneha Aggarwal

Sneha Aggarwal

मैं स्नेहा अग्रवाल जी राजस्थान न्यूज में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं और राजस्थान से जुड़ी हर बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी न्यूज़ पर पकड़ रखती हूं. क्राइम और कल्चर की खबरों में दिलचस्पी है. मुझे डिजिटल मीडिया का करीब 4 साल का साल का अनुभव है. इससे पहले मैं ZeeBihar में अपनी सेवाएं दे चुकी हूं. 4 साल के जर्नलिज्म करियर में लोकल, क्राइम, हेल्थ, एंटरटेनमेंट, वायरल और लाइफस्टाइल बीट पर काम किया है. मैंने यहां पर राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, ऑपेरशन सिंदूर समेत कई बड़े ईवेंट्स कवर किए हैं.
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