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जल, जंगल, जमीन की लड़ाई: धौलपुर में टाइगर रिजर्व के खिलाफ बड़ा आंदोलन, 44वें दिन भी डटे ग्रामीण

Rajasthan News: टाइगर रिजर्व सेंचुरी के विरोध में बसंतपुरा मोड पर ग्रामीणों का धरना 44वें दिन भी जारी रहा. किसानों, महिलाओं और युवाओं ने सेंचुरी रद्द करने की मांग की. ग्रामीणों का कहना है कि इससे गांव, खेती और पशुपालन पर संकट आएगा.

Written By SAGAR CHAUDHARY
Published: Sep 22, 2026, 05:36 PM IST | Updated: Sep 22, 2026, 05:55 PM IST
Image Credit: Dholpur Farmer Protest
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Dholpur News: टाइगर रिजर्व सेंचुरी के विरोध में बसंतपुरा मोड पर ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना मंगलवार को 44वें दिन भी जारी रहा. धरना स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे. किसानों, महिलाओं और युवाओं ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. ग्रामीणों का कहना है कि जल, जंगल और जमीन की यह लड़ाई उनके अधिकार से जुड़ी है और वे अपनी मांग को लेकर पीछे नहीं हटेंगे.

सेंचुरी से गांव उजड़ने का डर
धरने में शामिल ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि टाइगर रिजर्व सेंचुरी बनने से उनके गांवों पर संकट आ जाएगा. उनका कहना है कि सेंचुरी बनने के बाद गांवों को उजाड़ने की स्थिति बन सकती है. इससे खेती-बाड़ी प्रभावित होगी और पशुपालन पर भी संकट खड़ा हो जाएगा. इसी वजह से ग्रामीण लगातार सेंचुरी का विरोध कर रहे हैं.

कई पीढ़ियों से गांव में रह रहे ग्रामीण
ग्रामीणों ने कहा कि वे कई पीढ़ियों से इन गांवों में रहते आ रहे हैं. उनका जंगलों से भी पुराना जुड़ाव है और वे लंबे समय से जंगलों की रक्षा करते रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हीं लोगों को उनके गांवों से बेदखल करने की तैयारी की जा रही है. इसे वे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे.

लिखित आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रखने की दी चेतावनी
धरना स्थल पर मौजूद वक्ताओं ने कहा कि सरकार जब तक उनकी मांगों को लेकर लिखित में आश्वासन नहीं देती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. ग्रामीणों ने साफ कहा कि अपने अधिकारों के लिए उन्हें जो भी लड़ाई लड़नी पड़ेगी, वे उसके लिए तैयार हैं. उनका कहना है कि वे किसी भी स्थिति में पीछे नहीं हटेंगे.

महिलाओं ने भी संभाला मोर्चा
आंदोलन में महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिल रही है. मंगलवार को बड़ी संख्या में महिलाएं धरना स्थल पर पहुंचीं और ग्रामीणों के साथ अपनी आवाज बुलंद की. महिलाओं ने एकजुट होकर टाइगर रिजर्व सेंचुरी को रद्द करने की मांग को लेकर नारे लगाए.

जल, जंगल और जमीन की लड़ाई का दावा
ग्रामीणों ने कहा कि यह सिर्फ सेंचुरी के विरोध का मामला नहीं है, बल्कि उनके जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों की लड़ाई है. धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने कहा कि वे अपनी जमीन और गांवों को बचाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से ठोस और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा.

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About the Author

सागर चौधरी, अप्रैल 2024 से वे ज़ी न्यूज़ संस्थान का हिस्सा हैं और अपनी मेहनत व काम करने की क्षमता से लगातार टीम में योगदान दे रहे हैं.सागर चौधरी का संबंध हरियाणा के फरीदाबाद से है, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की और मीडिया क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की.
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