18 महीने में बनना था 119 करोड़ का मेडिकल कॉलेज: 52 महीने बाद भी अधूरा! अब 11.94 करोड़ की पेनल्टी की मांग
Rajasthan News: राजस्थान के सीकर में 119.44 करोड़ का मेडिकल कॉलेज प्रोजेक्ट तय समय के 52 महीने बाद भी अधूरा है. RTI कार्यकर्ता ने 11.94 करोड़ की पेनल्टी वसूली, निर्माण की गुणवत्ता की जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है.
Sikar News: राजस्थान के सीकर में 119 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से बन रहा राजकीय मेडिकल कॉलेज फेज-2 एवं अस्पताल तय समय सीमा खत्म होने के 52 महीने बाद भी पूरा नहीं हुआ है. RTI और विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर प्रोजेक्ट में देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. सामाजिक एवं RTI कार्यकर्ता अशोक पाठक ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर देरी, पेनल्टी और निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है. उनका आरोप है कि अनुबंध के मुताबिक देरी पर करीब 11.94 करोड़ रुपये की पेनल्टी बनती है, लेकिन अब तक इसकी वसूली नहीं की गई.
119.44 करोड़ का था पूरा प्रोजेक्ट
राजकीय मेडिकल कॉलेज फेज-2 एवं अस्पताल, सीकर का कार्यादेश 27 मई 2022 को मैसर्स रमेश कुमार बंसल, श्रीगंगानगर को दिया गया था. इसकी लागत करीब 119.44 करोड़ रुपये थी. अनुबंध के अनुसार काम 3 जून 2022 से शुरू होना था और 2 दिसंबर 2023 तक इसे पूरा करना था. यानी प्रोजेक्ट करीब 18 महीने में पूरा होना तय था.
18 महीने का काम 52 महीने बाद भी अधूरा
शिकायत के मुताबिक, प्रोजेक्ट में अब तक करीब 109.58 करोड़ रुपये का काम पूरा हो चुका है, लेकिन निर्माण अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. विभागीय बाधा रजिस्टर में सिर्फ 45 दिन की देरी को राजकीय कारणों से जुड़ा बताया गया है. ऐसे में बाकी देरी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.
11.94 करोड़ की पेनल्टी पर सवाल
अशोक पाठक ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि अनुबंध की शर्तों के अनुसार काम में देरी होने पर 10 प्रतिशत तक पेनल्टी लगाई जानी चाहिए. उनके हिसाब से यह राशि करीब 11.94 करोड़ रुपये बनती है. शिकायतकर्ता का आरोप है कि अब तक इस पेनल्टी की वसूली नहीं हुई है.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि विभागीय अधिकारी और ठेकेदार की मिलीभगत से फर्जी समय अवधि का मामला तैयार कर मूल्यवृद्धि का लाभ देने की कोशिश की जा रही है. यह आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं.
निर्माण की गुणवत्ता पर भी जांच की मांग
मामला सिर्फ प्रोजेक्ट पूरा होने में देरी तक सीमित नहीं है. शिकायत में निर्माण की गुणवत्ता और काम की वास्तविक प्रगति की भी उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई है. शिकायतकर्ता ने सरकार से पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है.
सरकार से की गई चार प्रमुख मांगें
अशोक पाठक ने ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई, 11 करोड़ 94 लाख रुपये से ज्यादा की पेनल्टी की वसूली और निर्माण की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. इसके साथ ही अगर किसी अधिकारी की लापरवाही से सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की गई है.
अब उठ रहे ये बड़े सवाल
अब सवाल है कि 18 महीने में पूरा होने वाला 119 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रोजेक्ट 52 महीने बाद भी अधूरा क्यों है? देरी की जिम्मेदारी किसकी है और करीब 11.94 करोड़ रुपये की पेनल्टी की वसूली अब तक क्यों नहीं हुई? इन आरोपों और मांगों पर संबंधित विभाग और सरकार की ओर से क्या कार्रवाई होती है, इस पर नजर रहेगी.