'NO UPI Day': जयपुर में 2 अक्टूबर को डिजिटल ब्रेक, आम आदमी की जेब और जिंदगी पर क्या होगा असर?
Rajasthan News: जयपुर में 2 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘नो यूपीआई डे’ को लेकर व्यापारियों ने विरोध की घोषणा की है. जिसके बाद 2 अक्टूबर के दिन जयपुरवासियों को काफी दिक्कतें हो सकती है. जानें यूपीआई पर निर्भरता और कैश भुगतान से जुड़ी पूरी कहानी.
Jaipur NO UPI Day: डिजिटल इंडिया के दौर में जयपुर जैसे बड़े शहरों में यूपीआई अब सिर्फ पेमेंट करने का तरीका नहीं रह गया है, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. चाय, सब्जी और दूध से लेकर बड़े सामान की खरीदारी तक, लोग तेजी से यूपीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं. व्यापारियों की ओर से यूपीआई ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित शुल्क के विरोध में 2 अक्टूबर को 'नो यूपीआई डे' रखने की घोषणा की गई है.
रोजमर्रा के खर्च में यूपीआई की बढ़ी निर्भरता
आज आम आदमी के लिए मोबाइल फोन ही काफी हद तक डिजिटल बटुए का काम कर रहा है. सुबह दूध वाले को पैसे देने से लेकर सब्जी मंडी में 20 रुपये का धनिया-मिर्च खरीदने तक कई छोटे-बड़े भुगतान यूपीआई से हो रहे हैं. चाय की थड़ी हो या मेडिकल स्टोर, हर जगह क्यूआर कोड स्कैन कर कुछ ही सेकंड में पेमेंट किया जा सकता है.
कैश रखना अब कई लोगों की आदत से बाहर
शहर में युवा और नौकरीपेशा वर्ग डिजिटल भुगतान पर काफी निर्भर हो गया है. कई लोगों ने अपने साथ कैश रखना लगभग बंद कर दिया है. ऐसे में अगर किसी दिन दुकानों पर यूपीआई से पेमेंट नहीं हो तो लोगों को अचानक नकदी की जरूरत पड़ सकती है. यही वजह है कि व्यापारियों के ऐसे किसी भी फैसले का सीधा असर आम लोगों की दिनचर्या पर पड़ सकता है.
2 अक्टूबर को क्या हो सकता है असर?
2 अक्टूबर को गांधी जयंती के कारण सार्वजनिक अवकाश रहता है. इस दिन बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ खरीदारी, बाहर खाना खाने या घूमने निकलते हैं. ऐसे में अगर दुकानों पर यूपीआई स्वीकार नहीं किया जाता, तो लोगों को पेमेंट के लिए कैश या दूसरे विकल्पों का सहारा लेना पड़ सकता है.
एटीएम पर बढ़ सकता है दबाव
यूपीआई बंद रहने की स्थिति में अचानक बड़ी संख्या में लोगों को नकदी की जरूरत पड़ सकती थी. इससे एटीएम पर भीड़ बढ़ने की संभावना रहती. कुछ जगहों पर कैश खत्म होने या तकनीकी परेशानी जैसी स्थिति भी सामने आ सकती थी. हालांकि यह इस बात पर निर्भर करता कि कितने लोग एक साथ नकदी निकालने पहुंचते हैं.
खुले पैसों की भी आती परेशानी
कैश से खरीदारी करने पर छुट्टे पैसों की समस्या भी हो सकती है. उदाहरण के लिए किसी ग्राहक के पास 500 रुपये का नोट है और उसे कम कीमत का सामान खरीदना है, तो दुकानदार को बाकी रकम लौटानी होगी. ऐसे में खुले पैसे नहीं होने पर ग्राहक और दुकानदार दोनों को परेशानी हो सकती है.
दुकानों पर बढ़ सकती हैं कतारें
यूपीआई से कुछ सेकंड में होने वाला भुगतान कैश में थोड़ा ज्यादा समय लेता है. पैसे गिनना, छुट्टे लौटाना और बाकी ग्राहकों का भुगतान करना पड़ता है. ऐसे में दुकानों, रेस्टोरेंट और बिलिंग काउंटर पर भीड़ बढ़ सकती थी. कुछ ग्राहक कैश नहीं होने पर अपनी खरीदारी टाल भी सकते हैं.
व्यापारियों की चिंता और यूपीआई शुल्क
व्यापारी संगठनों ने प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर चिंता जताई थी. केंद्र सरकार के अनुसार चुनिंदा मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 2,000 रुपये से ज्यादा की रकम के लिए MDR लागू होगा, जबकि व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI भुगतान और 2,000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान पर यह लागू नहीं होगा. सरकार के मुताबिक करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन इससे प्रभावित नहीं होंगे.
व्यापारियों का कहना है कि ज्यादा रकम वाले डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत का असर कारोबार पर पड़ सकता है. जयपुर समेत राजस्थान के कई बाजारों में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल काफी बढ़ चुका है.