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राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बड़ा बदलाव: अब हर शनिवार नहीं होगा 'नो बैग डे', जानिए क्या है ये नया नियम?

Rajasthan News: राजस्थान के सरकारी स्कूलों में 2026-27 से नो बैग डे के नियम बदल गए हैं. अब हर शनिवार की जगह महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बिना बैग गतिविधियां होंगी. बाकी शनिवार सामान्य पढ़ाई होगी. खेल, विज्ञान, पर्यावरण और साइबर सुरक्षा जैसी गतिविधियों से बच्चे सीखेंगे.

Written By SAGAR CHAUDHARY
Published: Sep 11, 2026, 07:43 PM IST | Updated: Sep 11, 2026, 08:09 PM IST
Image Credit: Rajasthan Government Schools No Bag Day
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No Bag Day In School: राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए 'नो बैग डे' की व्यवस्था में बदलाव किया गया है. शैक्षणिक सत्र 2026-27 के नए शेड्यूल के तहत अब महीने के हर शनिवार को नो बैग डे नहीं होगा. दूसरे और चौथे शनिवार को बच्चों को बिना बैग स्कूल बुलाकर गतिविधियों के जरिए सीखने का मौका दिया जाएगा, जबकि पहले और तीसरे शनिवार को सामान्य पढ़ाई होगी. पांचवां शनिवार आने पर उस दिन भी नियमित शैक्षणिक गतिविधियां होंगी. ऐसे में सवाल है कि आखिर इस बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी, नो बैग डे पर बच्चे क्या करेंगे और इसका उनकी पढ़ाई पर क्या असर पड़ेगा?

हर शनिवार नो बैग डे की जगह अब महीने में दो दिन
पहले महीने के हर शनिवार को नो बैग डे के तौर पर गतिविधियां कराई जाती थीं. अब शिक्षा विभाग ने इसमें बदलाव किया है. नए शेड्यूल के अनुसार दूसरे और चौथे शनिवार को नो बैग डे रहेगा. इन दिनों बच्चों को सामान्य किताब-कॉपी लेकर पढ़ाई करने के बजाय गतिविधियों के जरिए अलग-अलग चीजें समझाई जाएंगी.

वहीं पहले और तीसरे शनिवार को नियमित कक्षाएं चलेंगी. अगर किसी महीने में पांचवां शनिवार आता है तो उस दिन भी सामान्य पढ़ाई होगी. इस बदलाव के जरिए स्कूलों को गतिविधियों के साथ-साथ पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए पर्याप्त समय देने की कोशिश की गई है.

बदलाव के पीछे क्या वजह है?
हर शनिवार गतिविधियां होने से बच्चों को पढ़ाई से अलग सीखने का मौका तो मिलता था, लेकिन दूसरी तरफ स्कूलों के सामने पाठ्यक्रम समय पर पूरा करने की चुनौती भी रहती थी. खासकर बोर्ड कक्षाओं में तय समय के भीतर पूरा सिलेबस करवाना जरूरी होता है. नए फॉर्मूले में महीने के दो शनिवार गतिविधियों के लिए रखे गए हैं, जबकि बाकी शनिवार नियमित पढ़ाई होगी. इससे बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों का मौका भी मिलेगा और पढ़ाई का रूटीन भी बना रहेगा.

नो बैग डे पर सिर्फ खेल नहीं होंगे
नो बैग डे का मतलब यह नहीं है कि बच्चों के लिए स्कूल सिर्फ खेल का मैदान बन जाएगा. इस दिन अलग-अलग विषयों को गतिविधियों के जरिए समझाने पर जोर रहेगा. खेल और योग के साथ वाद-विवाद, कला, क्राफ्ट, कहानी, विज्ञान से जुड़े प्रयोग और संवाद जैसी गतिविधियां कराई जा सकती हैं. बच्चों को उनकी उम्र और कक्षा के हिसाब से गतिविधियों में शामिल किया जाएगा. इसका मकसद यह है कि बच्चे सिर्फ किताब में पढ़ी चीजों को याद न करें, बल्कि उन्हें करके और देखकर भी समझें.

पर्यावरण से जुड़ी गतिविधियों पर जोर
नो बैग डे के दौरान बच्चों को पर्यावरण से जुड़े मुद्दों से जोड़ने की भी योजना है. 'एक दिन बिना प्लास्टिक', 'जल बचाओ-जीवन बचाओ', 'कचरे से कला' और 'एक पेड़ मां के नाम' जैसी गतिविधियां इसका हिस्सा होंगी. इन कार्यक्रमों के जरिए बच्चों को पानी बचाने, प्लास्टिक का कम इस्तेमाल करने, कचरे को सही तरीके से इस्तेमाल करने और पेड़-पौधों की देखभाल जैसे विषय रोजमर्रा के उदाहरणों से समझाए जा सकते हैं.

विज्ञान की पढ़ाई होगी थोड़ी अलग
विज्ञान को भी सिर्फ किताब और ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं रखने की कोशिश होगी. 'जिज्ञासा से विज्ञान तक' और 'त्योहारों में छुपा विज्ञान' जैसे विषयों के तहत बच्चों को आसान प्रयोगों से वैज्ञानिक बातों को समझाने का प्रयास किया जाएगा. इससे बच्चों को यह समझने में मदद मिलेगी कि विज्ञान केवल परीक्षा में पूछे जाने वाले सवालों का विषय नहीं है, बल्कि हमारे आसपास की रोजमर्रा की जिंदगी में भी मौजूद है.

साइबर सुरक्षा और समानता भी पाठ का हिस्सा
नो बैग डे के दौरान बच्चों को कुछ ऐसे विषयों की जानकारी भी दी जाएगी जो सीधे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. इनमें साइबर सुरक्षा, सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श तथा लड़का-लड़की की समानता जैसे विषय शामिल हैं. आज बच्चे कम उम्र से ही मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल करने लगे हैं. ऐसे में ऑनलाइन दुनिया में सुरक्षित रहने की बुनियादी जानकारी देना भी जरूरी हो गया है. इसी तरह बच्चों को अपनी सुरक्षा और दूसरों के सम्मान के बारे में समझाना भी इस पहल का हिस्सा है.

स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर भी जागरूकता
बच्चों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए तंबाकू के नुकसान और रक्तदान के महत्व जैसे विषयों पर भी गतिविधियां कराई जाएंगी. इसका मकसद बच्चों को सिर्फ किताबी जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें स्वस्थ जीवन और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े मुद्दों से परिचित कराना है.

क्या पढ़ाई का नुकसान होगा?
यह सबसे बड़ा सवाल है. नए शेड्यूल में महीने के दो शनिवार ही नो बैग डे रखने का एक कारण यही है कि नियमित पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय बना रहे. पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को सामान्य कक्षाएं होने से शिक्षकों को पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए ज्यादा दिन मिलेंगे. इससे बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों को भी फायदा हो सकता है. हालांकि इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि स्कूल गतिविधियों और नियमित पढ़ाई को कितनी अच्छी तरह व्यवस्थित करते हैं.

बच्चों को क्या फायदा मिलेगा?
सबसे बड़ा फायदा यह है कि बच्चों को महीने में दो दिन बिना किताबों के अलग तरीके से सीखने का मौका मिलेगा. खेल और योग से शारीरिक सक्रियता बढ़ेगी, जबकि कला, प्रयोग और चर्चा जैसी गतिविधियां बच्चों को खुलकर अपनी बात रखने में मदद कर सकती हैं. ऐसी गतिविधियों से उन बच्चों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल सकता है जो केवल लिखित परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते.

क्या हर स्कूल में इसे लागू करना आसान होगा?
यहां सबसे बड़ी चुनौती संसाधनों की है. हर सरकारी स्कूल में बड़ा खेल मैदान, म्यूजिक या आर्ट के लिए अलग सुविधा और हर गतिविधि के विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध हों, यह जरूरी नहीं है. ऐसे में शिक्षकों को स्कूल में मौजूद साधनों के हिसाब से गतिविधियां तैयार करनी होंगी. अगर किसी स्कूल में पर्याप्त संसाधन नहीं हैं तो साधारण खेल, चर्चा, स्थानीय उदाहरण, छोटे प्रयोग और आसपास की चीजों के जरिए भी बच्चों को गतिविधियों में शामिल किया जा सकता है.

शिक्षकों पर क्या असर पड़ेगा?
इस व्यवस्था में शिक्षकों की भूमिका भी बदल जाएगी. उन्हें नियमित पाठ पढ़ाने के साथ गतिविधियों की योजना बनानी होगी और बच्चों की भागीदारी पर ध्यान देना होगा. स्कूलों को इन गतिविधियों का रिकॉर्ड भी रखना होगा. इसलिए नो बैग डे तभी सफल होगा जब शिक्षकों पर सिर्फ कागजी काम बढ़ाने के बजाय उन्हें गतिविधियां कराने के लिए जरूरी समय और सहयोग भी मिले.

क्या यह सिर्फ मौज-मस्ती का दिन है?
बिल्कुल नहीं. नो बैग डे की मूल सोच यह है कि बच्चे स्कूल में किताबों के अलावा भी बहुत कुछ सीखें. बैंकिंग, ट्रैफिक नियम, पर्यावरण, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक व्यवहार जैसे विषय उनके रोजमर्रा के जीवन से जुड़े हैं. 'सीखें-समझें-आगे बढ़ें' थीम के तहत कोशिश यही है कि बच्चा किसी चीज को सिर्फ याद न करे, बल्कि उसे समझे और जरूरत पड़ने पर असल जिंदगी में इस्तेमाल भी कर सके.

क्या बदलेगा बच्चों का स्कूल अनुभव?
नए नियम का असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि स्कूल इसे कितनी गंभीरता से लागू करते हैं. अगर दूसरे और चौथे शनिवार को सिर्फ खानापूर्ति की गई तो इसका फायदा सीमित रहेगा. लेकिन अगर इन दिनों बच्चों को प्रयोग, खेल, बातचीत और रचनात्मक काम में सही तरीके से शामिल किया गया तो पढ़ाई का अनुभव ज्यादा दिलचस्प हो सकता है.

राजस्थान का नया नो बैग डे फॉर्मूला हर शनिवार बैग हटाने के बजाय महीने में दो दिन सीखने का तरीका बदलने पर जोर देता है. एक तरफ बच्चों को किताबों और परीक्षा के दबाव से थोड़ी राहत मिलेगी, वहीं बाकी शनिवार नियमित पढ़ाई के लिए रहेंगे. अब चुनौती सिर्फ इतनी है कि इन दो दिनों को छुट्टी जैसा नहीं, बल्कि सीखने का एक अलग और बेहतर मौका बनाया जाए.

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About the Author

सागर चौधरी, अप्रैल 2024 से वे ज़ी न्यूज़ संस्थान का हिस्सा हैं और अपनी मेहनत व काम करने की क्षमता से लगातार टीम में योगदान दे रहे हैं.सागर चौधरी का संबंध हरियाणा के फरीदाबाद से है, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की और मीडिया क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की.
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