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जैसलमेर में गोडावण संरक्षण का ऐतिहासिक कदम: पहली बार जंगल में छोड़े गए 2 कैप्टिव-ब्रेड गोडावण, GPS से होगी 24 घंटे निगरानी

Rajasthan News: राजस्थान के जैसलमेर में पहली बार कैप्टिव ब्रीडिंग से तैयार दो गोडावणों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया. करीब 3 महीने की री-वाइल्डिंग ट्रेनिंग के बाद दोनों ने खुले आसमान में उड़ान भरी. GPS से उनकी लगातार निगरानी होगी.

Written By SAGAR CHAUDHARY
Published: Oct 04, 2026, 04:55 PM IST | Updated: Oct 04, 2026, 04:59 PM IST
Image Credit: जैसलमेर में गोडावण संरक्षण का ऐतिहासिक कदम: पहली बार जंगल में छोड़े गए 2 कैप्टिव-ब्रेड गोडावण ( Photo - Zee Media )
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Jaisalmer News: थार के रेगिस्तान जैसलमेर में रविवार को राज्य पक्षी गोडावण के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया. सम के डेजर्ट नेशनल पार्क की सुदासरी रेंज में पहली बार कैप्टिव ब्रीडिंग से तैयार दो गोडावणों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया. केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और वन राज्य मंत्री संजय शर्मा की मौजूदगी में दोनों पक्षियों ने खुले आसमान में उड़ान भरी.

पहली बार जंगल में छोड़े गए गोडावण
रामदेवरा के ब्रीडिंग सेंटर में तैयार किए गए इन दो गोडावणों को जंगल में छोड़ने से पहले प्राकृतिक माहौल में रहने की ट्रेनिंग दी गई. करीब 9.25 करोड़ रुपये की री-वाइल्डिंग टनल में 10 गोडावणों को लगभग 3 महीने तक अकेले रहने और खुद भोजन तलाशने का अभ्यास कराया गया. इनमें से दो गोडावणों को अब प्राकृतिक आवास में अकेले सर्वाइव करने के लिए छोड़ा गया है. दोनों की उम्र करीब 7 महीने, ऊंचाई लगभग 1 फीट और वजन करीब 5 किलो बताया गया है.

फरवरी में जंगल से आए थे अंडे
ब्रीडिंग सेंटर में फरवरी 2026 में जंगल से गोडावण के दो अंडे लाए गए थे. इन्हीं अंडों से दोनों चूजे निकले. जंगल में भेजने से पहले उन्हें री-वाइल्डिंग टनल में रखा गया, जहां खुले आसमान में उड़ने, खुद खाना तलाशने और प्राकृतिक परिस्थितियों में रहने की ट्रेनिंग दी गई. स्वास्थ्य और व्यवहार की जांच में दोनों पूरी तरह स्वस्थ मिले. इसके बाद इन्हें जंगल में छोड़ने का फैसला किया गया.

GPS से होगी लगातार निगरानी
दोनों गोडावणों की सुरक्षा के लिए उनके शरीर पर GPS टैग लगाए गए हैं. इनके जरिए वैज्ञानिक लगातार उनकी लोकेशन और गतिविधियों पर नजर रखेंगे. यह देखा जाएगा कि वे किस तरह उड़ते हैं, भोजन की तलाश कैसे करते हैं, किस इलाके में घूमते हैं और प्राकृतिक माहौल में उनका व्यवहार कैसा रहता है.

साथ ही हाईटेंशन बिजली तारों और शिकारियों से जुड़े संभावित खतरे पर भी नजर रखी जाएगी. इनकी निगरानी से मिलने वाले आंकड़ों का इस्तेमाल आगे दूसरे कैप्टिव-ब्रेड गोडावणों को जंगल में छोड़ने की योजना बनाने में किया जाएगा.

2016 में शुरू हुआ था संरक्षण प्रोजेक्ट
गोडावण संरक्षण के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान और वन विभाग करीब एक दशक से काम कर रहे हैं. साल 2016 में इंटीग्रेटेड जीआईबी कंजर्वेशन प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी. इसके बाद 2019 में राजस्थान में बड़े स्तर पर ब्रीडिंग प्रोग्राम शुरू किया गया. सम के अस्थायी सेंटर के बाद रामदेवरा में आधुनिक ब्रीडिंग सेंटर तैयार हुआ.

मार्च 2023 में यहां कैप्टिव-ब्रेड पहला चूजा पैदा हुआ. साल 2025 में गोडावणों को री-वाइल्डिंग के तहत जंगल में रहने की ट्रेनिंग शुरू की गई. अब पहली बार कैप्टिव ब्रीडिंग से तैयार दो गोडावणों को प्राकृतिक आवास में छोड़ना संरक्षण अभियान का अहम पड़ाव माना जा रहा है.

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About the Author

सागर चौधरी, अप्रैल 2024 से वे ज़ी न्यूज़ संस्थान का हिस्सा हैं और अपनी मेहनत व काम करने की क्षमता से लगातार टीम में योगदान दे रहे हैं.सागर चौधरी का संबंध हरियाणा के फरीदाबाद से है, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की और मीडिया क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की.
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