लंपी को लेकर राजस्थान सरकार का बड़ा एक्शन! संक्रमित गांवों के 10 KM तक होगी वैक्सीन की घेराबंदी
Rajasthan News: राजस्थान में लंपी स्किन डिजीज का संक्रमण कम हो रहा है, लेकिन 10 जिलों में केस मिलने के बाद सरकार ने पशु परिवहन पर रोक लगा दी है. 87% टीकाकरण लक्ष्य पूरा हो चुका है. संक्रमित गांवों के 5-10 किमी दायरे में रिंग वैक्सीनेशन होगा.
Lumpy Disease: राजस्थान में लंपी स्किन डिजीज के संक्रमण में अब कमी देखने को मिल रही है. हालांकि सावधानीवश संक्रमित जिलों में पशुओं के परिवहन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. राज्य सरकार ने अब जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को रोकथाम के सम्बंध में निर्देश दिए हैं. पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव ने कलेक्टरों-एसपी से अपील भी की है. उल्लेखनीय है कि गौवंश में होने वाली लम्पी स्किन डिजीज राज्य के 10 जिलों में फैल चुकी है. हालांकि अब विभागीय अधिकारी नए केस आने की रफ्तार कम होने की बात कह रहे हैं. पशुपालन विभाग के अनुसार पिछले 10-15 दिनों में प्रदेश के 10 जिलों में लंपी स्किन डिजीज के स्पोरेडिक केस सामने आए हैं. इसके बाद रोग के नियंत्रण, रोकथाम और अप्रभावित क्षेत्रों में संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए कवायद की जा रही है. इसके लिए पशुओं का आवागमन रोकने के साथ ही टीकाकरण बढ़ाने, संक्रमित पशुओं को अलग करने पर जोर दिया जा रहा है. विभाग ने लंपी रोग से बचाव के लिए निर्धारित 87 प्रतिशत टीकाकरण लक्ष्य हासिल किया जा चुका है. इसके बावजूद ऐसे गांवों और क्षेत्रों को चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं, जहां अभी टीकाकरण का काम पूरा नहीं हुआ है. इन क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण पूरा कराया जाएगा और इसकी निगरानी जिला एवं ब्लॉक स्तर पर की जाएगी. बड़ी बात यह है कि देशभर में इस बीमारी के गौवंश में कुल 3 करोड़ 60 लाख टीके लगे हैं, जबकि अकेले राजस्थान में ही 88 लाख से अधिक टीके लगाए जा चुके हैं. मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने समीक्षा बैठक में वैक्सीनेशन के आंकड़ों पर सराहना की है.
संक्रमित गांवों की सूची पुलिस को देने के निर्देश
पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव विकास एस भाले ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को जो निर्देश जारी किए हैं, उसमें कहा है कि रोग प्रकोप की स्थिति में पशुपालन विभाग को जिले में संक्रमित गांव, संदिग्ध गांव और प्रभावित क्षेत्र चिह्नित कर उनकी सूची जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को दी जाए. इस सूची को नियमित रूप से अपडेट करने को कहा गया है. जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को संबंधित पुलिस थानों, चेक-पोस्ट तथा अन्य प्रवर्तन एजेंसियों को यह जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं. पशुपालन विभाग के जिला एवं ब्लॉक स्तरीय अधिकारी प्रशासन और पुलिस सहित अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाए रखेंगे.
5 से 10 किमी क्षेत्र में रिंग वैक्सीनेशन
संक्रमित गांव को केंद्र मानकर उसके 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में रिंग वैक्सीनेशन अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं. टीकाकरण के लिए उपलब्ध और विभाग की ओर से अनुमोदित वैक्सीन का निर्धारित तकनीकी प्रोटोकॉल के अनुसार उपयोग किया जाएगा. जिला प्रशासन को टीकाकरण दलों के लिए आवश्यक प्रशासनिक, मानव संसाधन, परिवहन और कानून-व्यवस्था संबंधी सहयोग उपलब्ध कराने को कहा गया है. संक्रमित पशुओं को टीकाकरण किए गए स्वस्थ पशुओं से अलग रखते हुए उपचार और आइसोलेशन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं.
पशुओं के परिवहन पर विशेष निगरानी
आदेश में संक्रमित अथवा प्रभावित क्षेत्रों से पशुओं को बाहर ले जाने और ऐसे क्षेत्रों में बाहर से पशुओं को लाने पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है. अंतर-जिला और अंतर-राज्यीय पशु परिवहन की विशेष निगरानी करने तथा संक्रमित क्षेत्र से दूसरे जिलों या राज्यों में पशुओं के परिवहन को प्रभावी रूप से नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं. जिला पुलिस को अंतर-जिला एवं अंतर-राज्यीय प्रमुख मार्गों पर विशेष निगरानी और चेकिंग करने को कहा गया है. प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले पशु वाहनों की आवश्यकता के अनुसार जांच के लिए चेक-पोस्ट स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं. प्रतिबंधित क्षेत्र से पशुओं के परिवहन की स्थिति में वाहन और पशुओं को रोककर पशुपालन विभाग के अधिकारियों को सूचना देने तथा नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है.
पशु मेले, हाट और बाजारों पर भी नियंत्रण
संक्रमित या प्रभावित क्षेत्र से किसी अन्य स्थान पर बिक्री, प्रजनन, पशु मेले, हाट या अन्य प्रयोजन से पशु ले जाने की अनुमति नहीं देने के निर्देश हैं. जिन प्रभावित जिलों में पशु मेले या हाट आयोजित होने हैं और वहां पशुओं के एकत्र होने की संभावना है, उन्हें आगामी आदेश तक स्थगित करने या आयोजन नहीं करने पर विचार करने को कहा गया है. इसके साथ ही संक्रमित पशुओं के बाड़ों और परिसरों की नियमित सफाई व डिसइंफेक्शन, पशु बाजारों और सामुदायिक पशु स्थलों पर स्वच्छता, मक्खी-मच्छर एवं अन्य वाहक नियंत्रण तथा मृत पशुओं के शव का वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.
पशुपालकों को जागरूक करने पर जोर
विभाग ने पशुपालकों को लंपी रोग के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सा संस्था को सूचना देने, संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने और संक्रमित पशुओं को अन्य क्षेत्रों में नहीं ले जाने के प्रति जागरूक करने को कहा है. पशुपालकों को पशु बाड़ों की नियमित सफाई, जैव-सुरक्षा उपायों और वाहक नियंत्रण के संबंध में भी जानकारी दी जाएगी. स्थानीय निकायों और पंचायत राज संस्थाओं से भी पशुपालन विभाग को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं.