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राजस्थान में 29 अक्टूबर को करवा चौथ का त्योहार मनाया जाएगा. इस दौरान सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखेंगी. इसके लिए राजस्थान के चौथ का बरवाड़ा चौथ माता के मंदिर के पंडित अवधेश शर्मा ने बताया कि करवा चौथ साल में एक बार मनाया जाता है. करवा चौथ माता का मंदिर पूरे वर्ल्ड में एक ही मंदिर है, जो चौथ का बरवाड़ा में है.
7-8 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान
इस मंदिर में गणेश जी और भगवती चौथ माता दोनों की पूजा होती है. पंडित अवधेश शर्मा के अनुसार, करवा चौथ का व्रत महिलाएं इसलिए रखती है कि पति की लंबी उम्र, निरोगी काया और दोनों पति-पत्नी में अच्छे संबंध बन रहे. उन्होंने कहा कि करवा चौथ पर लगभग 7-8 लाख भक्त यहां दर्शन करने आते हैं.
इसके साथ जिन महिलाओं का व्रत होता है वे यहां पति संग रात में पूजा करने और व्रत खोलने आती हैं. चौथ माता का विशेष श्रृंगार चौथ माता ट्रस्ट और यहां के मुख्य पुजारी की तरफ से होता है. सोने का जोड़ा चढ़ाया जाता है और फूल से श्रृंगार किया जाता है. साथ ही छप्पन भोग का माता को भोग लगाया जाता है.

क्या 29 अक्टूबर को है भद्रा काल?
पंडित अवधेश शर्मा ने कहा कि 29 अक्टूबर को भद्रा काल को लेकर लोगों में भ्रांतियां फैली हुई हैं. तो कल कोई भद्रा नहीं है. भद्रा आज यानी 28 अक्टूबर 2:00 बजे चालू होगी और रात्रि को 1:00 बजे खत्म हो जाएगी. 29 अक्टूबर को सूर्योदय के बाद कोई भद्रा नहीं है.
चौथ माता मंदिर में सुरक्षा के खास इंतजाम

चौथ माता ट्रस्ट मैनेजर रामवतार गुर्जर ने बताया कि हर साल की तरह करवा चौथ पर महिलाओं का ज्यादा आवागमन रहेगा, तो सुरक्षा की दृष्टि से महिलाओं और पुरुषों की की कतार अलग-अलग बनाई जाएंगी. साथ ही साफ-सफाई और सुरक्षा का खास ध्यान रखा जाएगा. इसको लेकर पुलिस प्रशासन और अधिकारियों को पत्र लिख दिया गया. वाहन पार्किंग के लिए पुलिस प्रशासन और पंचायत से बातचीत हो गई. इस बार चौथ माता को हर साल की तरह 56 तरह के भोग लगाए जाएंगे और फूल झांकी सजाई जाएगी. साथ ही मंदिर को लाइटों से सजाया जाएगा.
करवा चौथ की अनोखी परंपरा, 'ढपी की नी ढपी?'
राजस्थान में करवा चौथ के अवसर पर महिलाएं मिट्टी के करवे का विशेष महत्व मानती हैं. करवे में गेहूं और चावल भरकर पूजा की जाती है. यह परंपरा धार्मिक आस्था और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है. साथ ही प्रदेश में जल चढ़ाते समय एक खास लोक परंपरा निभाई जाती है. इस दौरान बुजुर्ग महिलाएं व्रत रखने वाली महिला से पूछती हैं, 'ढपी की नी ढपी?' यानी क्या तुम तृप्त हो? इसके जवाब में महिला कहती है, 'जल से ढपी, सुहाग से ना ढपी.' इसका भावार्थ है कि वह जल से तो तृप्त है, लेकिन अपने पति के प्रेम और सुहाग के प्रति उसकी चाह हमेशा बनी रहती है. इस दिन राजस्थान की महिलाएं पारंपरिक राजस्थानी परिधान या शादी का जोड़ा पहनकर पूजा करती हैं.
राजस्थान में कब कहां दिखेगा चांद?
राजस्थान में करवा चौथ पर अलग-अलग शहरों में चांद निकलने का समय अलग-अलग रहेगा. अजमेर में रात 8:29 बजे, अलवर में 8:17 बजे, बालोतरा में 8:40 बजे, बांसवाड़ा में 8:37 बजे, बारां में 8:25 बजे, बाड़मेर में 8:44 बजे, ब्यावर में 8:32 बजे, भरतपुर में 8:15 बजे, भीलवाड़ा में 8:32 बजे, बीकानेर में 8:30 बजे, बूंदी में 8:26 बजे, चित्तौड़गढ़ में 8:33 बजे, चूरू में 8:24 बजे, दौसा में 8:20 बजे, धौलपुर में 8:14 बजे, डूंगरपुर में 8:40 बजे, हनुमानगढ़ में 8:21 बजे, जयपुर में 8:23 बजे और जैसलमेर में रात 8:43 बजे चांद दिखाई देने की संभावना है.
वहीं, जालोर में रात 8:39 बजे, झालावाड़ में 8:27 बजे, झुंझुनूं में 8:21 बजे, जोधपुर में 8:36 बजे, करौली में 8:19 बजे, खैरथल-तिजारा में 8:16 बजे, डीग में 8:32 बजे, कुचामन-डीडवाना में 8:26 बजे, कोटपूतली-बहरोड़ में 8:19 बजे, सवाई माधोपुर में 8:23 बजे, कोटा में 8:27 बजे, नागौर में 8:30 बजे, पाली में 8:36 बजे, फलोदी में 8:36 बजे, राजसमंद में 8:36 बजे, सलूंबर में 8:37 बजे, सीकर में 8:22 बजे, सिरोही में 8:40 बजे, टोंक में 8:25 बजे और उदयपुर में रात 8:38 बजे चांद निकल सकता है. इन समयों में स्थानीय परिस्थितियों और मौसम के कारण थोड़ा अंतर देखने को मिल सकता है.