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मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा स्थित बगीचा धाम में आयोजित 'श्री राम कथा' के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आस्था और धर्म के बदलते स्वरूप को लेकर एक अहम टिप्पणी की है, जो अब चर्चा का विषय बन गई है. पंडाल में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भगवानों का भी ट्रेंड आता है. आज बहुत से लोगों के लिए भक्ति एक फैशन स्टेटमेंट या सोशल मीडिया ट्रेंड जैसी हो गई है.
बाबा बागेश्वर ने कथा के दौरान कहा कि यहां कुछ भी परमानेंट नहीं है. आज हम कथा कह रहे हैं, कल कोई और कहेगा. यहां आदमी परमानेंट नहीं है, भगवान भी परमानेंट नहीं है. भगवानों का भी ट्रेंड आता है. पहले साईं बाबा की पूजा होती थी, गुरुवार को लंबी-लंबी लाइन लगती थी, अब साईं बाबा गायब हैं, तो खाटू वाले बाबा, खाटू वाले के बाद अब नीम करौली वाले बाबा चल रहे हैं. लोग भगवान भी बदलते रहते हैं. उन्होंने कहा कि इसलिए दुखी मत हो, जो तुम्हारे पास है उतने में ही सुखी हो जाओ. सुखी होने का यही मंत्र है, चाह को खत्म करो.
इसके अलावा उन्होंने करवा चौथ को लेकर भी बयान दिया है और इसे खसम पूजन दिवस का नाम दिया. कथा के दौरान एक भक्त ने पूछा कि क्या उनकी नई-नई ब्याही पत्नी करवा चौथ का व्रत रख सकती है. वहां मौजूद लोगों की हंसी के बीच पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उन्होंने करवा चौथ के लिए एक नया नाम रखा है खसम पूजन दिवस. उन्होंने आगे कहा कि व्रत रखना चाहिए, पाश्चात्य संस्कृति के इस दौर में एक संकल्प तो लेना ही चाहिए, भले ही शास्त्रों में इसका बहुत कड़ा विधान न मिलता हो.
बाबा बागेश्वर ने आगे कहा कि सिर्फ एक दिन का व्रत रखने के बाद बाकी 364 दिनों तक पतियों को यह ताना नहीं मारना चाहिए कि वे कहां मिले थे या शादी किस समय हुई थी. इससे तो बेहतर है कि वे ऐसे ही मर जाएं. हालांकि बुंदेलखंड में कहावतों और लोकगीतों में पति को 'खसम' कहा जाता है, लेकिन बाबा का इसी अंदाज में दिया गया यह बयान अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
हरीश गुप्ता की रिपोर्ट