क्या बिना पार्षद बने भी बन सकते हैं मेयर?
राजस्थान में साल 2019 में बदले गए निकाय चुनाव नियम के तहत बिना पार्षद बने भी मेयर, सभापति या पालिकाध्यक्ष का चुनाव लड़ने का रास्ता खुला है. मौजूदा निकाय चुनाव में 7 जगहों पर ऐसे प्रत्याशी मैदान में हैं. इनमें कुछ ऐसे भी हैं जो पार्षद का चुनाव हार चुके हैं या लड़े ही नहीं. गहलोत सरकार के समय लागू हुए इस 'हाइब्रिड फॉर्मूले' पर उस वक्त सचिन पायलट ने आपत्ति जताई थी. सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार ने भी यह प्रावधान बरकरार रखा.
Rajasthan News: राजस्थान में बिना पार्षद बने भी निकाय प्रमुख बनने का रास्ता खुला है. यानी कोई व्यक्ति पार्षद का चुनाव लड़े बिना भी मेयर, सभापति या नगर पालिका अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ सकता है. मौजूदा निकाय चुनावों में राज्य की 7 जगहों पर ऐसे प्रत्याशी मेयर, चेयरमैन और पालिकाध्यक्ष पद के लिए मैदान में उतरे हैं.
साल 2019 में बदला निकाय प्रमुख के चुनाव का नियम
दरअसल, कांग्रेस के कार्यकाल में साल 2019 में राजस्थान नगर पालिका निर्वाचन नियम, 1994 में संशोधन कर गैर-पार्षदों को भी निकाय प्रमुख के पद के लिए चुनाव लड़ने का प्रावधान किया गया था. इस समय इसको 'हाइब्रिड फॉर्मूला' कहा गया था. इससे पहले मेयर, सभापति और नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए केवल निर्वाचित पार्षद ही चुनाव लड़ सकते थे. साल 2019 में नियम बदलने के बाद गैर-पार्षदों के लिए भी निकाय प्रमुख बनने का रास्ता खुल गया था, जो अब भी लागू है.
चुनाव हारे, फिर भी मेयर-चेयरमैन पद की दावेदारी
राजस्थान के कई निकायों में चुनाव हारने के बाद भी कुछ नेता और प्रत्याशी मेयर व चेयरमैन पद में चुनाव लड़ने की दौड़ में हैं. अलवर नगर निगम में वार्ड 36 से हारी कांग्रेस प्रत्याशी रिक्ल गर्ग ने निर्दलीय के तौर पर मेयर पद के लिए नामांकन भरा है. बहरोड़ नगर परिषद में वीरेंद्र यादव ने चेयरमैन पद के लिए निर्दलीय नामांकन दाखिल किया है, जबकि उन्होंने पार्षद का चुनाव नहीं लड़ा था.
धौलपुर नगर परिषद में चुनाव हार चुके नरेंद्र जाट ने चेयरमैन पद के लिए पर्चा भरा है. जैसलमेर नगर परिषद में हारे प्रत्याशी निर्मल रैयानी ने कांग्रेस से चेयरमैन पद के लिए नामांकन दाखिल किया है. वहीं, मथानिया नगर पालिका में चुनाव हार चुकीं इंद्रा देवी को भाजपा ने पालिकाध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया है. मांडण नगर पालिका में वार्ड 3 से हारे कांग्रेस प्रत्याशी पताराम और पिलानी नगर पालिका में चुनाव हार चुके सुनील शर्मा ने भी पालिकाध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरा है.
अशोक गहलोत सरकार में लागू हुआ था 'हाइब्रिड फॉर्मूला'
पूर्व अशोक गहलोत सरकार ने अक्टूबर साल 2019 में 'हाइब्रिड फॉर्मूला' लागू किया था. इसके तहत गैर-पार्षदों को भी निकाय प्रमुख पद के लिए चुनाव लड़ने का प्रावधान किया गया था. वहीं, कुछ समय बाद ही राज्य में निकाय चुनाव हुए थे. उस समय सचिन पायलट सरकार में डिप्टी सीएम के साथ ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज और पीडब्ल्यूडी मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे.
सचिन पायलट ने जताई थी आपत्ति
इधर, सचिन पायलट ने उस वक्त इस फैसले का विरोध करते हुए कहा था कि गैर-पार्षदों को निकाय प्रमुख बनाने के प्रावधान पर कैबिनेट में उनसे चर्चा नहीं की गई. पायलट ने इसे 'बैकडोर एंट्री' को बढ़ावा देने वाला फैसला बताते इस पर आपत्ति जताई थी.
सत्ता में आने के बाद बीजेपी ने रखा प्रावधान बरकरार
भाजपा ने विपक्ष में रहते हुए अशोक गहलोत सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद इसे बरकरार रखा.