SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

कोटा में पत्नी और मासूम बेटे की हत्या, हाईकोर्ट ने फांसी की सजा की रद्द, अब उम्रभर काटेगा सजा

Kota Murder Case: राजस्थान हाईकोर्ट ने कोटा में पत्नी और 6 माह के बेटे की हत्या के मामले में दोषी पिंटू डागर की फांसी की सजा रद्द कर दी है. कोर्ट ने उसे 75 साल की उम्र तक जेल में रखने का आदेश दिया. जस्टिस महेंद्र गोयल की खंडपीठ ने आरोपी की अपील और राज्य सरकार के डेथ रेफरेंस पर यह आदेश दिया.

Written By Ansh Raj
Published: Oct 07, 2026, 06:30 AM IST | Updated: Oct 07, 2026, 06:32 AM IST
Image Credit: Kota Murder Case
Join

Rajasthan Crime: राजस्थान के कोटा में करीब पांच साल पहले हुए पत्नी और छह महीने के बेटे के दोहरे हत्याकांड मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अभियुक्त पिंटू डागर को निचली अदालत से मिली फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है. कोर्ट ने आदेश दिया कि अभियुक्त को बिना किसी छूट के 75 साल की उम्र पूरी होने तक जेल में रखा जाए. जस्टिस महेंद्र गोयल और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने यह आदेश पिंटू डागर की अपील और राज्य सरकार की ओर से पेश किए गए डेथ रेफरेंस पर सुनवाई करते हुए दिया.

अचानक हुई कहासुनी के बाद हत्या
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में घटना की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा. कोर्ट ने कहा कि यह मामला पहले से बनाई गई किसी सोची-समझी साजिश का परिणाम नहीं था. घटना अचानक हुई कहासुनी के बाद गुस्से में की गई हत्या का नतीजा थी. कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों और अभियुक्त के पिछले व्यवहार को देखते हुए फांसी की सजा को उचित नहीं माना.

गोद में था छह महीने का बच्चा
मामला 1 जून 2021 का है. अभियोजन के अनुसार, कोटा में पिंटू डागर ने अपनी पत्नी और छह महीने के बेटे पर कुल्हाड़ी से हमला किया था. घटना के दौरान छह महीने का बच्चा उसकी गोद में था और उसे भी जानलेवा चोट लगी थी. इस घटना में पत्नी और मासूम बच्चे की मौत हो गई थी. इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच कर अभियुक्त के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र पेश किया था.

एडीजे कोर्ट ने सुनाई थी फांसी की सजा
मामले की सुनवाई स्थानीय एडीजे कोर्ट में हुई. कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की परिस्थितियों के आधार पर पिंटू डागर को पत्नी और बेटे की हत्या का दोषी माना. इसके बाद 23 जनवरी को एडीजे कोर्ट ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी. निचली अदालत के इस फैसले के बाद पिंटू डागर ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की.

राज्य सरकार ने पेश किया था डेथ रेफरेंस
फांसी की सजा की पुष्टि के लिए राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में डेथ रेफरेंस भी पेश किया गया था. हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अभियुक्त की अपील और डेथ रेफरेंस दोनों पर सुनवाई की. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने घटना की परिस्थितियों, अपराध की प्रकृति और अभियुक्त के जेल में बिताए समय के दौरान उसके आचरण को ध्यान में रखा.

जेल में व्यवहार शांत, सुधार की गुंजाइश
हाईकोर्ट ने कहा कि अभियुक्त पिछले करीब पांच साल से जेल में है और इस दौरान उसका व्यवहार शांत रहा है. कोर्ट ने यह भी माना कि अभियुक्त में सुधार की गुंजाइश मौजूद है. इन परिस्थितियों को देखते हुए खंडपीठ ने फांसी की सजा को बदलकर उम्रकैद कर दिया. साथ ही स्पष्ट किया कि अभियुक्त को 75 साल की उम्र तक बिना किसी छूट के जेल में रखा जाएगा.

 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

अंश राज Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर उनकी पैनी नजर रहती है. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर से जुड़ी खबरों में उनकी खास दिलचस्पी है. नई चीजों को सीखने की फिराक में रहते हैं. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनावों और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बड़े बयान तक, अंश राज खबरों की नब्ज पर नजर रखते हैं. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करना और किसी भी स्टोरी को ज्यादा प्रभावी और रोचक अंदाज में पेश करना उनकी खासियत है. खबर को सिर्फ लिखना नहीं, बल्कि उसे बेहतर तरीके से पैकेज कर दर्शकों तक पहुंचाना उनके काम का अहम हिस्सा है.  डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव रखने वाले अंश राज इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है. खबरों की गंध को सबसे पहले पहचानना, उसकी तह तक पहुंचना और उसे सबसे पहले, सबसे तेज और सबसे बेहतर तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना... यही अंश राज की पहचान है.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES