दिल्ली-NCR की जहरीली हवा का राजस्थान तक असर! 5 जिलों में GRAP लागू, जानिए क्या-क्या रहेगा बंद
दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण के चलते GRAP के पहले चरण के नियम राजस्थान के NCR क्षेत्र में शामिल पांच जिलों अलवर, भरतपुर, डीग, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ में भी लागू किए गए हैं. इसके तहत सड़कों की सफाई और पानी का छिड़काव, खुले में कचरा जलाने पर रोक, निर्माण स्थलों पर निगरानी और वाहनों के PUC सर्टिफिकेट की सख्त जांच होगी.
दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण लागू है. वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 244 तक पहुंचने के बाद GRAP Stage-1 लागू किया गया था. इसके तहत राजस्थान के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में शामिल पांच जिलों में भी प्रदूषण नियंत्रण के उपाय लागू किए जाएंगे.
सांसों पर संकट!
दीपावली और बदलते मौसम के बीच सांसों पर संकट का खतरा मंडराने लगा है. दिल्ली एनसीआर के बाद अब राजस्थान में प्रदूषण की रोकथाम के लिए सख्ती बरती आ जा रही है. एनसीआर में आने वाले राजस्थान के जिलों में ग्रेप 1 लागू किया गया है.राजस्थान के अलवर, भरतपुर, डीग, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ जिले NCR क्षेत्र में शामिल हैं. कोटपूतली-बहरोड़ में केवल तहसील स्तर पर यह व्यवस्था लागू होगी.
धूल नियंत्रण से लेकर वाहनों की जांच तक सख्ती
GRAP के पहले चरण में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं. इसके तहत सड़कों की नियमित सफाई, धूल नियंत्रण के उपाय और निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल पर निगरानी रखी जाएगी.
इसके अलावा वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए PUC (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) प्रमाणपत्र की जांच सख्ती से की जाएगी. नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई होगी। वहीं डीजल जनरेटर सेट (DG Sets) के इस्तेमाल पर भी शुरुआती प्रतिबंध लागू किए जाएंगे.
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ग्रेप-1 के मुख्य नियम और पाबंदियां
सड़कों की सफाई और छिड़काव: सड़कों की मशीनीकृत सफाई (Mechanical sweeping) की जाती है और धूल को उड़ने से रोकने के लिए पानी का छिड़काव बढ़ाया जाता है.
खुले में कचरा जलाने पर रोक: खुले में कचरा या कूड़ा जलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध होता है.
होटल और रेस्तरां में कोयले/लकड़ी पर रोक: होटल, ढाबों और रेस्तरां के तंदूरों में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर पाबंदी रहती है.
निर्माण और विध्वंस (C&D) स्थल: निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होता है और निरीक्षण किया जाता है.
वाहनों की जांच: प्रदूषण फैलाने वाले और काला धुआं छोड़ने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है और पीयूसी (PUC) की जांच तेज की जाती है.
डीजल जनरेटर (DG Sets): बैकअप के रूप में डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर नियम और पाबंदियां लागू होती हैं.
सभी संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी तय
ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान को दिल्ली-NCR के पूरे क्षेत्र में संबंधित एजेंसियों की ओर से लागू, मॉनिटर और रिव्यू किया जाएगा. इसका उद्देश्य वायु गुणवत्ता को और खराब होने से रोकना है. राजस्थान के NCR क्षेत्र वाले जिलों में भी इन निर्देशों की पालना सुनिश्चित करनी होगी. दीपावली पर आतिशबाजी और पटाखे से वायु प्रदूषण का खतरा भी मंडरा रहा है.