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राजस्थान के सरकारी स्कूलों का चौंकाने वाला आंकड़ा: 90 हजार बच्चों को सर्जरी का इंतजार, 2 साल पहले हुआ था सर्वे

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 90 हजार बच्चों की गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं दो साल पहले हुए डिजिटल सर्वे में सामने आई थीं. 75 लाख बच्चों के सर्वे के बाद जरूरतमंद बच्चों की पहचान तो हो गई, लेकिन अब तक उपचार और सर्जरी की प्रक्रिया शुरू नहीं होने से परिजन इंतजार कर रहे हैं. शिक्षक संघ ने सरकार से जल्द स्वास्थ्य जांच और आवश्यक सर्जरी कराने की मांग की है.

राजस्थान के सरकारी स्कूलों का चौंकाने वाला आंकड़ा:  90 हजार बच्चों को सर्जरी का इंतजार, 2 साल पहले हुआ था सर्वे
Image Credit: Rajasthan News

Rajasthan News: राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 90 हजार बच्चों को आज भी स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से राहत मिलने का इंतजार है. शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग ने दो साल पहले प्रदेश के करीब 75 लाख बच्चों का डिजिटल सर्वे करवाया था. सर्वे में ऐसे बच्चे सामने आए, जिन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के चलते सर्जरी की आवश्यकता है लेकिन सर्वे के बाद इन बच्चों के उपचार को लेकर आगे की कार्रवाई का इंतजार बना हुआ है.

75 लाख बच्चों का डिजिटल हेल्थ सर्वे 
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा के साथ उनके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से दो साल पहले शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त रूप से डिजिटल सर्वे करवाया था. इस पेपरलेस सर्वे के तहत प्रदेश के करीब 72 हजार सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 75 लाख बच्चों का स्वास्थ्य संबंधी डाटा जुटाया गया.

10 सवालों से सामने आईं स्वास्थ्य समस्याएं
सर्वे में बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े 10 सवाल शामिल किए गए थे. इसके जरिए बच्चों की स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान करने का प्रयास किया गया. सर्वे के नतीजों में करीब 90 हजार बच्चे ऐसे सामने आए, जिन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं और सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है.

राजस्थान के 90 हजार स्कूली बच्चों को सर्जरी का इंतजार 
दो साल पहले शिक्षा ने कराया था डिजिटल सर्वे.
प्रदेश के 72 हजार सरकारी स्कूलों के 75 लाख बच्चों का जुटाया था स्वास्थ्य डाटा.
पेपरलेस सर्वे में बच्चों से जुड़े 10 स्वास्थ्य संबंधी सवाल किए गए शामिल.
सर्वे में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे बच्चे आए सामने.
करीब 90 हजार बच्चों को सर्जरी की आवश्यकता होने की हुई पहचान. 
सर्वे के दो साल बाद भी बच्चों के उपचार का इंतजार.

हाथ-पैर से लेकर जन्मजात बीमारियों तक
इनमें कुछ बच्चे हाथ-पैर से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो कुछ बच्चों को कटे-फटे होंठ जैसी जन्मजात समस्याओं के उपचार की जरूरत है. सर्वे के जरिए इतने बड़े स्तर पर जरूरतमंद बच्चों की पहचान तो कर ली गई लेकिन अब इनके उपचार और सर्जरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

शिक्षक संघ ने जल्द उपचार की मांग उठाई
दो साल बीतने के बाद भी हजारों बच्चों के परिजनों को आगे की कार्रवाई का इंतजार है. राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ ने सरकार से मांग की है कि सर्वे में चिह्नित बच्चों की स्वास्थ्य जांच और आवश्यक सर्जरी की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए.

अब सरकार के अगले कदम का इंतजार
अब इंतजार है जरूरतमंद बच्चों की पहचान हो चुकी है, तो उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए अगला कदम कब उठाया जाएगा. विपिन शर्मा ने कहा कि सरकार को जल्द ही कोई निर्णय लेकर इन बच्चों को सर्जरी करवा कर राहत उपलब्ध करवानी चाहिए. 

Report- Dinesh Tiwari

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About the Author

Sneha Aggarwal

Sneha Aggarwal

मैं स्नेहा अग्रवाल जी राजस्थान न्यूज में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं और राजस्थान से जुड़ी हर बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी न्यूज़ पर पकड़ रखती हूं. क्राइम और कल्चर की खबरों में दिलचस्पी है. मुझे डिजिटल मीडिया का करीब 4 साल का साल का अनुभव है. इससे पहले मैं ZeeBihar में अपनी सेवाएं दे चुकी हूं. 4 साल के जर्नलिज्म करियर में लोकल, क्राइम, हेल्थ, एंटरटेनमेंट, वायरल और लाइफस्टाइल बीट पर काम किया है. मैंने यहां पर राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, ऑपेरशन सिंदूर समेत कई बड़े ईवेंट्स कवर किए हैं.
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