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कचरा मिक्स करके कूड़ागाड़ी में डालने वालों पर हो सख्ती: क्या राजस्थान में लागू हो चालान सिस्टम?

Jaipur News: राजस्थान में गीला और सूखा कचरा मिक्स करने वालों पर सख्ती की जरूरत बढ़ रही है. नियमों के तहत घर से ही कचरा अलग करने की व्यवस्था है. जयपुर समेत शहरों में चालान, निगरानी और प्रभावी तरीके से कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाया जा सकता है.

Written By Sandhya Yadav
Published: Sep 26, 2026, 05:18 PM IST | Updated: Sep 26, 2026, 05:21 PM IST
Image Credit: घर से ही गीला और सूखा कचरा अलग करना जरूरी.
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Jaipur News: जयपुर समेत राजस्थान के कई शहरों में घरों से निकलने वाला गीला और सूखा कचरा आज भी एक ही थैले में डालकर कचरा गाड़ियों को सौंप दिया जाता है. नियमों में स्रोत पर कचरा अलग करने की व्यवस्था होने के बावजूद व्यवहार में इसका पालन पूरी तरह नहीं हो पा रहा है. ऐसे में अब केवल जागरूकता अभियान चलाने के बजाय नियम तोड़ने वालों पर प्रभावी जुर्माने और निगरानी की व्यवस्था लागू करने की जरूरत महसूस होती है.

यहां एक महत्वपूर्ण बदलाव हो चुका है. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 को अब ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 ने बदल दिया है. नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हैं और इनके तहत स्रोत पर कचरे को चार अलग धाराओं में रखना अनिवार्य किया गया है. इनमें गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाला कचरा शामिल है.

नियम साफ, लेकिन पालन में बड़ी चुनौती
नए नियमों का मकसद कचरे को घर से ही अलग करना है, ताकि उसे दोबारा उपयोग, पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित किया जा सके. इसके बावजूद यदि गीला और सूखा कचरा एक साथ कचरा गाड़ी में डाल दिया जाए तो आगे की पूरी व्यवस्था प्रभावित होती है.

ऐसे में राजस्थान के शहरों में भी यह सवाल महत्वपूर्ण है कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई कितनी प्रभावी है. केवल कचरा गाड़ी में अलग-अलग डिब्बे रखने या लोगों से अपील करने से व्यवस्था पूरी तरह नहीं बदल सकती. इसके साथ नियमित जांच, चालान और दोबारा गलती करने वालों पर अधिक जुर्माने की व्यवस्था भी जरूरी हो सकती है.

चंडीगढ़ में घर से ही शुरू हुई सख्ती
चंडीगढ़ में कचरा अलग नहीं देने पर कार्रवाई का उदाहरण पहले से सामने रहा है. वर्ष 2019 में नगर निगम ने घरों से अलग किया हुआ कचरा लेने की व्यवस्था लागू करते हुए गैर-अलग कचरा देने वालों पर 200 से 2,000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया था. कचरा अलग नहीं होने पर उसे नहीं उठाने के निर्देश भी दिए गए थे. एक कार्रवाई में 40 लोगों को 200-200 रुपये के चालान किए गए और राशि पानी के बिल में जोड़ने की व्यवस्था भी बताई गई थी. यह उदाहरण बताता है कि कचरा अलग करने के नियम को केवल अपील तक सीमित रखने के बजाय उसे रोजमर्रा की जिम्मेदारी बनाया जा सकता है.

इंदौर ने मिश्रित कचरा स्वीकार करना ही बंद किया
इंदौर का उदाहरण भी महत्वपूर्ण है. नीति आयोग की सामग्री के अनुसार वहां घरों से कचरा अलग करने की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कचरा संग्रह करने वाले वाहनों ने गैर-अलग कचरा स्वीकार करना बंद कर दिया था. बाद में शहर ने कचरे को कई अलग श्रेणियों में बांटकर संग्रह की व्यवस्था विकसित की. 2026 में भी इंदौर अपने कचरा प्रबंधन ढांचे को नए नियमों के अनुरूप मजबूत कर रहा है. वहां स्रोत पर छह श्रेणियों में कचरा अलग करने की व्यवस्था है.

बेंगलुरु में बार-बार गलती पर बढ़ता जुर्माना
बेंगलुरु में भी स्रोत पर कचरा अलग करने को लेकर जुर्माने की व्यवस्था की गई है. 2026 में सामने आई व्यवस्था के अनुसार पहली बार कचरा अलग नहीं करने पर 500 रुपये और दोबारा गलती पर 1,000 रुपये का जुर्माना बताया गया है. इस तरह की व्यवस्था में पहली गलती पर दंड और बार-बार नियम तोड़ने पर अधिक जुर्माना लगाने का तरीका अपनाया जाता है.

मुंबई और दिल्ली में भी जुर्माने का प्रावधान
मुंबई में गैर-अलग कचरा देने पर व्यक्तिगत कचरा उत्पादक के लिए 200 रुपये और बड़े कचरा उत्पादक के लिए 1,000 रुपये का प्रथम अपराध जुर्माना निर्धारित है. दिल्ली में भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन उपनियमों के तहत नियमों का पालन नहीं करने पर आवासीय कल्याण समितियों के लिए 10,000 रुपये और बड़े संस्थानों तथा कुछ अन्य श्रेणियों के लिए अधिक जुर्माने का प्रावधान है.

राजस्थान में भी जागरूकता के साथ सख्ती जरूरी
राजस्थान के लिए इन शहरों से सबसे बड़ी सीख यह है कि कचरा अलग करने की जिम्मेदारी सिर्फ सफाई कर्मचारियों या नगर निकायों की नहीं हो सकती. घर से निकलते समय ही कचरा अलग होगा, तभी आगे उसका वैज्ञानिक प्रसंस्करण संभव होगा. इसलिए जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर समेत राजस्थान के दूसरे शहरों में भी पहले साफ सूचना, पर्याप्त अलग-अलग संग्रह व्यवस्था और नियमित निगरानी के बाद नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना लगाया जा सकता है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि अलग किया गया कचरा संग्रह के बाद फिर से आपस में न मिलाया जाए.

नए केंद्रीय नियम अब चार तरह के कचरे को स्रोत पर अलग करने की साफ व्यवस्था देते हैं और कचरा संग्रह से लेकर प्रसंस्करण तथा निस्तारण तक निगरानी की व्यवस्था पर जोर देते हैं. राजस्थान में भी यदि जागरूकता के साथ लगातार जांच, जवाबदेही और उचित जुर्माने की व्यवस्था लागू होती है, तो कचरा मिलाकर देने की आदत पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है.

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