कुंए सूखे, बांध खाली: राजस्थान के इन 16,400 गांवों में पानी के लिए हाहाकार, डरावनी है भूजल की रिपोर्ट
Jaipur News: राजस्थान में इस मानसून सामान्य से 22 फीसदी कम बारिश हुई है. इससे भूजल और बांधों में पानी की स्थिति चिंताजनक हो गई है. 215 बांध खाली हैं और 27 जिलों में भूजल दोहन अतिगंभीर स्थिति में है.
Jaipur News: कमजोर मानसून के बाद राजस्थान में सूखे और जल संकट की स्थिति बन सकती है. इस बार प्रदेश में सामान्य से 22 फीसदी कम बारिश हुई है. इसका असर भूजल और बांधों में मौजूद पानी पर दिखाई दे रहा है. दूरदराज गांवों और ढाणियों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही है. मरुधरा के कई इलाकों में पेयजल संकट गहरा सकता है.
सामान्य से 22 फीसदी कम बारिश
राजस्थान में मानसून के दौरान 1 जून से 30 सितंबर तक औसतन 435.6 MM बारिश होती है. इस सीजन में कुल औसत 340.2 MM बारिश दर्ज हुई. यानी सामान्य के मुकाबले 22 फीसदी कम बारिश हुई है. कमजोर बारिश का असर अब पानी के स्रोतों पर दिखाई देने लगा है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदेश के 16 जिलों के 16,400 गांव और 52 शहर पेयजल संकट से जूझ रहे हैं. सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष वित्तीय पैकेज की घोषणा हो सकती है. प्रभावित क्षेत्रों में बाड़मेर के 2,460 गांव, जोधपुर के 1,838 गांव, नागौर के 1,589 गांव और जयपुर के 1,400 गांव शामिल हैं. बालोतरा के 1,216, जालोर के 1,117, अजमेर के 1,134, पाली के 1,030, फलोदी के 1,064, जैसलमेर के 961, चूरू के 934, बीकानेर के 919, ब्यावर के 787 और सिरोही के 530 गांव अकाल की चपेट में बताए गए हैं.
भूजल की स्थिति ने बढ़ाई चिंता
राजस्थान में भूजल को लेकर स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है. भूजल विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक जितने भूजल का इस्तेमाल हो रहा है, उसके मुकाबले भविष्य के लिए महज 5.40 फीसदी भूजल बचा है. पुराने 33 जिलों में से 27 जिले भूजल के अतिगंभीर दोहन की स्थिति में हैं. केवल 4 जिलों में भूजल का दोहन 100 फीसदी से कम है.
प्रदेश में सालाना 17.1 बिलियन क्यूबिक मीटर यानी BCM भूजल का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि भविष्य के लिए केवल 0.93 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी बचा है. जैसलमेर में भूजल दोहन 321 फीसदी तक पहुंच गया है. इसके बाद जोधपुर में 255 फीसदी, दौसा में 232 फीसदी, झुंझुनू में 228 फीसदी और सीकर में 191 फीसदी भूजल दोहन हो रहा है. भूजल विभाग के चीफ इंजीनियर सूरजभान सिंह के अनुसार, यदि स्थिति ऐसी ही बनी रही तो आने वाले दिनों में तस्वीर और गंभीर हो सकती है.
बांधों में भी घटा पानी
राजस्थान के बांधों की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है. पिछले साल अक्टूबर तक प्रदेश के 693 बांधों में 90 फीसदी से ज्यादा पानी था. इस बार इन बांधों में केवल 61 फीसदी पानी बचा है. जल संसाधन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार 215 बांध पूरी तरह खाली हैं और इनमें एक बूंद भी पानी नहीं बचा. केवल 99 बांध पूरी तरह भरे हुए हैं, जबकि 379 बांधों में आंशिक रूप से पानी है.
पिछले साल की तुलना में बांधों में करीब 30 फीसदी पानी कम है. कम बारिश के कारण बांधों में पानी की आवक भी घट गई है. अब आने वाले दिनों में बांधों में नई आवक होने की संभावना भी बेहद कम बताई जा रही है. बारिश, भूजल और बांधों की स्थिति को देखते हुए राजस्थान के कई हिस्सों में जल संकट की चुनौती बढ़ सकती है.