न्यू प्रकाश ज्वैलर्स लूट-हत्या केस: ‘पुलिस मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती’... 7 साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला
Rajasthan News: झुंझुनूं के न्यू प्रकाश ज्वैलर्स लूट-हत्या मामले में करीब 7 साल बाद फैसला आया. कोर्ट ने 5 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि एक को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया. दुकान मालिक जतिन सोनी की गोली लगने से मौत हुई थी.
Rajasthan Crime News: झुंझुनूं जिले के बहुचर्चित न्यू प्रकाश ज्वैलर्स लूट एवं हत्या मामले में करीब सात साल बाद अदालत का फैसला आया है. एडीजे कोर्ट संख्या-2 के न्यायाधीश कालूराम ने मामले में पांच आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जबकि एक आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया. 15 सितंबर 2019 को दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने पूरे झुंझुनूं को हिला दिया था.
ज्वैलर्स की दुकान में घुसे थे बदमाश
बदमाश हथियारों के साथ ज्वैलर्स की दुकान में घुसे थे. उन्होंने लूट की और भागते समय दुकान मालिक जतिन सोनी उर्फ बाइसराम को गोली मार दी. गोली लगने के बाद जतिन गंभीर रूप से घायल हुए और करीब 25 दिन तक जिंदगी से जूझने के बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
बेटे की मौत के बाद पिता ने भी खाया जहर
मामले की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. बेटे की मौत और आरोपियों को जमानत मिलने के बाद तनाव में आए जतिन के पिता चंद्रप्रकाश सोनी ने भी जहर खा लिया. करीब 13 दिन तक उनका इलाज चला और इसके बाद उनकी भी मौत हो गई. एक वारदात ने परिवार से पहले बेटा और फिर पिता छीन लिया. परिवार पूरी तरह टूटकर बिखर गया.
बदमाश ने दिया था अपना आईडी कार्ड
इस वारदात का एक बेहद चर्चित पहलू यह भी रहा कि लूट के दौरान एक बदमाश ने अपना आईडी कार्ड दुकान के कर्मचारी को देते हुए कहा था- ‘पुलिस को दे देना, पुलिस मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती.’ बदमाशों ने दुकान में मौजूद लोगों को धमकाया और ज्वैलरी तथा अन्य सामान बैग में भरने के लिए कहा. दुकान के कर्मचारी से डीवीआर भी लेने का प्रयास किया गया, ताकि वारदात से जुड़े साक्ष्य खत्म किए जा सकें.
भागते समय जतिन को मारी गोली
इसी दौरान दुकान मालिक जतिन सोनी ने मौका पाकर गेट खोला और बाहर भागने लगे. तब एक बदमाश ने उनका पीछा किया और पिस्तौल से गोली चला दी. गोली लगने से जतिन सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए.
पुलिस जांच में सामने आया आरोपियों का रिकॉर्ड
मामले की जांच में तत्कालीन कोतवाली थाना प्रभारी गोपाल सिंह ढाका की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही. पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए काफी मशक्कत की. मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे केस ऑफिसर स्कीम में लिया गया.
पुलिस जांच में सामने आया कि मामले में शामिल आरोपियों में कई का आपराधिक रिकॉर्ड गंभीर था. दीपक पहल को हार्डकोर अपराधी और शार्प शूटर बताया गया. वहीं विनोद कुमार हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा के दौरान पैरोल पर बाहर आया था और पैरोल से फरार बताया गया. इसी तरह योगेश चारणवासी को भी हार्डकोर बदमाश बताया गया. यानी मामले में तीन आरोपियों के हार्डकोर अपराधी होने के कारण पुलिस ने इस प्रकरण को केस ऑफिसर स्कीम में लेकर जांच और कार्रवाई को आगे बढ़ाया.
ट्रायल में 39 गवाहों के बयान
सात साल तक चले ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 39 गवाहों के बयान करवाए गए. इसके अलावा 210 दस्तावेजी साक्ष्य और 34 आर्टिकल अदालत में प्रदर्शित किए गए. राज्य सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक नंदकिशोर शर्मा ने मामले में पैरवी की.
पांच आरोपियों को उम्रकैद की सजा
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. अदालत ने दीपक पहल निवासी जींद, हरियाणा, विनोद कुमार निवासी जागसी, सोनीपत, अंकित कुमार उर्फ मीठू निवासी आबूसर, प्रताप सिंह निवासी चुड़ैला का बास और योगेश चारणवासी निवासी चारणवासी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. वहीं प्रमोद उर्फ धोलिया निवासी चारणवासी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया.
आरोपियों पर लगाया गया अर्थदंड
अदालत ने सजा के साथ अर्थदंड भी लगाया है. दीपक पहल, योगेश चारणवासी और विनोद कुमार पर अलग-अलग धाराओं में प्रत्येक पर 1 लाख 44 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया. वहीं अंकित कुमार उर्फ मीठू और प्रताप सिंह पर प्रत्येक पर 1 लाख 32 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है.
सात साल बाद आया अदालत का फैसला
इस पूरे मामले का सबसे भावुक पहलू जतिन सोनी और उनके पिता चंद्रप्रकाश की मौत रही. पहले दिनदहाड़े दुकान में लूट, फिर बेटे को गोली लगना और 25 दिन बाद उसकी मौत के बाद आरोपियों की जमानत और सदमे में पिता का जहर खा लेना- इन घटनाओं ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया. करीब सात साल बाद अदालत के फैसले में पांच आरोपियों को उम्रकैद मिली है. लंबे समय से चल रहे इस मामले में अब न्यायालय ने अपना फैसला सुना दिया है, जबकि एक आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया गया है.