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डोटासरा-जूली की बॉन्डिंग, गहलोत के साथ अलग अंदाज… क्या आलाकमान बदल रहा है अपनी प्राथमिकताएं ?

दिवाली मिलन की तस्वीरों ने इस सवाल को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है. 2020 की बगावत, 2022 का जयपुर घटनाक्रम और 2026 में राहुल गांधी की ओर से डोटासरा-जूली की तारीफ, इन तीनों राजनीतिक पड़ावों को जोड़कर देखें तो राजस्थान कांग्रेस में नेतृत्व की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है. तस्वीरें राजनीतिक संकेत दे सकती हैं, लेकिन कांग्रेस आलाकमान की वास्तविक प्राथमिकताएं आने वाले संगठनात्मक फैसलों, राजनीतिक जिम्मेदारियों और चुनावी रणनीति से ही तय होगी.

डोटासरा-जूली की बॉन्डिंग, गहलोत के साथ अलग अंदाज… क्या आलाकमान बदल रहा है अपनी प्राथमिकताएं ?
Image Credit: दिवाली मिलन की तस्वीरों में राजस्थान कांग्रेस की सियासत

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत राजस्थान कांग्रेस के तमाम नेता इस समारोह में पहुंचे। लेकिन सामने आई तस्वीरों में गांधी परिवार के साथ नेताओं की मुलाकातों का अंदाज अब राजनीतिक चर्चाओं में ह

तस्वीरों में गोविंद सिंह डोटासरा और टीकाराम जूली राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी के साथ जिस सहजता और गर्मजोशी से नजर आ रहे हैं, उसकी तुलना अशोक गहलोत के साथ सामने आई तस्वीरों से की जा रही है. खास तौर पर सोनिया गांधी के साथ गहलोत की तस्वीर को लेकर चर्चाएं हैं. सवाल उठ रहा है कि क्या राजस्थान कांग्रेस में पुराने राजनीतिक समीकरणों के बीच अब नए नेतृत्व की स्वीकार्यता और मजबूत हो रही है? क्या कांग्रेस आलाकमान राजस्थान में अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं को नए सिरे से तय कर रहा है ? ये सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राजस्थान कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर संघर्ष की कहानी केवल आज की नहीं है. इसके पीछे 2020 की सचिन पायलट की बगावत, 2022 में मुख्यमंत्री बदलने की कोशिश और जयपुर में कांग्रेस हाईकमान के पर्यवेक्षकों के सामने गहलोत समर्थक विधायकों के शक्ति प्रदर्शन का पूरा घटनाक्रम जुड़ा हुआ है.

राहुल गांधी पहले ही कर चुके हैं डोटासरा-जूली की तारीफ
इस राजनीतिक चर्चा की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी 1 जून 2026 का राहुल गांधी का राजस्थान दौरा है. पुष्कर में कांग्रेस के चिंतन एवं प्रशिक्षण शिविर में पहुंचे राहुल गांधी ने किशनगढ़ एयरपोर्ट पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की खुलकर तारीफ की थी. राहुल गांधी ने दोनों के बीच बेहतर तालमेल को दूसरे राज्यों के लिए उदाहरण बताया था. उन्होंने डोटासरा और जूली की जोड़ी को ‘जय-वीरू’ की जोड़ी बताते हुए कहा था कि राजस्थान कांग्रेस में पीसीसी अध्यक्ष और सीएलपी नेता मिलकर अच्छा काम कर रहे हैं. राहुल की यह टिप्पणी उस समय भी राजनीतिक संदेश के रूप में देखी गई थी.खास बात यह थी कि इस दौरान अशोक गहलोत और सचिन पायलट भी मौजूद थे। ऐसे में राहुल गांधी की सार्वजनिक तारीफ को राजस्थान कांग्रेस के वर्तमान संगठनात्मक नेतृत्व के प्रति विश्वास के संकेत के रूप में देखा गया.अब दिल्ली के दीपावली समारोह की तस्वीरों ने इस चर्चा को एक बार फिर हवा दे दी है। डोटासरा और जूली की गांधी परिवार के साथ सहजता को पार्टी के भीतर मजबूत राजनीतिक संवाद के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.

Rajasthan Congress Politics

सड़क से सदन तक साथ, डोटासरा-जूली की बॉन्डिंग की चर्चा
डोटासरा और टीकाराम जूली की राजनीतिक बॉन्डिंग केवल दिल्ली की तस्वीरों तक सीमित नहीं है. प्रदेश में संगठनात्मक कार्यक्रमों, राजनीतिक आंदोलनों और विधानसभा से जुड़े मुद्दों पर दोनों नेता लगातार साथ दिखाई देते रहे हैं. डोटासरा जहां प्रदेश कांग्रेस संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच सक्रियता बनाए रखने की भूमिका निभा रहे हैं, वहीं टीकाराम जूली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में सरकार को घेरने में जुटे हैं. दोनों के बीच जिम्मेदारियों का यह तालमेल कांग्रेस के भीतर एक साझा नेतृत्व की छवि पेश करता है.राहुल गांधी ने भी पुष्कर में दोनों नेताओं के तालमेल की तारीफ करते हुए इसे दूसरे राज्यों के लिए उदाहरण बताया था. ऐसे में डोटासरा-जूली की जोड़ी को राजस्थान कांग्रेस के मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व के मजबूत चेहरे के रूप में देखा जाने लगा है.

गहलोत के साथ अलग राजनीतिक अध्याय, 2020 की बगावत से 2022 के जयपुर घटनाक्रम तक
राजस्थान कांग्रेस में गांधी परिवार और अशोक गहलोत के रिश्तों की चर्चा होती है तो 2020 और 2022 के घटनाक्रम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.जुलाई 2020 में सचिन पायलट की बगावत ने गहलोत सरकार को संकट में डाल दिया था। पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ अलग हो गए थे और सरकार पर संकट गहरा गया था. उस समय गहलोत ने सरकार बचाने के लिए पूरी राजनीतिक ताकत लगा दी. हाईकमान ने हस्तक्षेप किया, पायलट खेमे की वापसी हुई, लेकिन दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक अविश्वास कायम रहा.2020 के घटनाक्रम के बाद राजस्थान कांग्रेस में गहलोत और पायलट के दो शक्ति केंद्र बन गए। कांग्रेस हाईकमान लगातार दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता रहा, लेकिन मुख्यमंत्री पद और नेतृत्व को लेकर विवाद समाप्त नहीं हुआ.इसके बाद सितंबर 2022 में कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव ने राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाओं को फिर तेज कर दिया.

जयपुर में अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे का दौरा: मुख्यमंत्री बदलने की रणनीति पर लगा ब्रेक?
सितंबर 2022 में अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष पद के सबसे मजबूत दावेदार थे। पार्टी में चर्चा थी कि अगर गहलोत राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं तो राजस्थान में मुख्यमंत्री बदला जा सकता है. सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना भी राजनीतिक चर्चाओं में प्रमुख थी.25 सितंबर 2022 को कांग्रेस हाईकमान ने मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन को पर्यवेक्षक बनाकर जयपुर भेजा. दोनों नेताओं को कांग्रेस विधायक दल की बैठक आयोजित कर मुख्यमंत्री के उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ानी थी. लेकिन बैठक से पहले ही गहलोत समर्थक विधायकों ने संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल के आवास पर समानांतर बैठक कर ली। इसके बाद विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को इस्तीफे सौंपने की बात कही.गहलोत समर्थकों की मांग थी कि मुख्यमंत्री का चयन कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के बाद हो और नया मुख्यमंत्री 2020 के संकट में गहलोत के साथ खड़े रहे विधायकों में से ही चुना जाए। इस घटनाक्रम ने हाईकमान की नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को रोक दिया.अजय माकन ने समानांतर बैठक और शर्तों को अनुशासनहीनता बताया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायक दल की बैठक तय होने के बावजूद अलग बैठक करना पार्टी की परंपरा के खिलाफ है. माकन और खड़गे ने दिल्ली लौटकर सोनिया गांधी को घटनाक्रम की जानकारी दी. सोनिया गांधी ने विस्तृत रिपोर्ट मांगी.

Ashok Gehlot Rahul Gandhi

सोनिया गांधी की नाराजगी की चर्चा और गहलोत का कांग्रेस अध्यक्ष पद से पीछे हटना
जयपुर घटनाक्रम के बाद सोनिया गांधी की नाराजगी की चर्चाएं तेज हो गईं. कांग्रेस के भीतर ये माना जाने लगा कि राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर गहलोत खेमे के शक्ति प्रदर्शन ने हाईकमान को असहज स्थिति में डाल दिया है.29 सितंबर 2022 को अशोक गहलोत ने सोनिया गांधी से मुलाकात की। बैठक के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि जयपुर घटनाक्रम के लिए उन्होंने सोनिया गांधी से माफी मांगी है और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. उन्होंने मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का फैसला भी सोनिया गांधी पर छोड़ दिया था.यह घटनाक्रम गहलोत की राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण मोड़ माना गया. एक तरफ कांग्रेस अध्यक्ष बनने की उनकी संभावनाएं समाप्त हुईं, दूसरी तरफ राजस्थान में मुख्यमंत्री बदलने की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ सकी.यहीं से गहलोत और सोनिया गांधी के राजनीतिक रिश्तों में कथित दूरी की चर्चा को सबसे अधिक आधार मिला। हालांकि, दोनों के व्यक्तिगत संबंधों में स्थायी दरार आने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन 2022 का घटनाक्रम हाईकमान और गहलोत के बीच राजनीतिक असहजता का बड़ा उदाहरण जरूर बना.

क्या राहुल गांधी अब राजस्थान में नए नेतृत्व मॉडल पर भरोसा कर रहे हैं ?
2026 में राजस्थान कांग्रेस के राजनीतिक समीकरणों को देखें तो राहुल गांधी की ओर से डोटासरा और टीकाराम जूली की सार्वजनिक प्रशंसा महत्वपूर्ण है. संगठनात्मक नेतृत्व और विधानसभा में विपक्ष की भूमिका को एक साथ मजबूत करने की रणनीति के रूप में इस जोड़ी को देखा जा रहा है.दिवाली मिलन समारोह में गांधी परिवार के साथ डोटासरा और जूली की तस्वीरें इस चर्चा को और आगे बढ़ाती हैं. लेकिन इस समारोह में अशोक गहलोत की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण है. गहलोत ने कार्यक्रम में प्रेम, भाईचारे और एकजुटता का संदेश दिया. इसलिए इस आयोजन को किसी नेता की उपेक्षा या दूसरे नेता के राजनीतिक प्रमोशन के रूप में सीधे देखना जल्दबाजी होगी. फिर भी राजस्थान कांग्रेस में नेतृत्व की बहस अब नए सिरे से सामने आ रही है.

  • क्या डोटासरा-जूली की जोड़ी राजस्थान कांग्रेस के वर्तमान संगठनात्मक नेतृत्व का प्रमुख चेहरा बन रही है?
  • क्या राहुल गांधी प्रदेश में साझा नेतृत्व और संगठनात्मक एकजुटता को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं?
  • क्या अशोक गहलोत की भूमिका अब मुख्यमंत्री पद के दावेदार या प्रत्यक्ष सत्ता केंद्र से आगे बढ़कर वरिष्ठ रणनीतिकार की हो सकती है?
  • क्या 2022 के जयपुर घटनाक्रम का राजनीतिक प्रभाव आज भी गहलोत और हाईकमान के रिश्तों में चर्चा का विषय बना हुआ है?

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राजस्थान कांग्रेस में आगे क्या ?
राजस्थान कांग्रेस के सामने आने वाले राजनीतिक और संगठनात्मक चुनावों की चुनौती है. पार्टी को एक तरफ भाजपा सरकार के खिलाफ मजबूत विपक्ष तैयार करना है, वहीं दूसरी तरफ संगठनात्मक एकजुटता और नेतृत्व के सवालों को भी संभालना है. डोटासरा और टीकाराम जूली की जोड़ी को राहुल गांधी की ओर से मिली सार्वजनिक प्रशंसा निश्चित रूप से राजनीतिक महत्व रखती है. लेकिन अशोक गहलोत का अनुभव, प्रदेश में उनका राजनीतिक प्रभाव और कांग्रेस की चुनावी रणनीति में उनकी भूमिका भी अभी महत्वपूर्ण है. राजस्थान कांग्रेस की सियासत में अब सवाल केवल यह नहीं है कि कौन गांधी परिवार के करीब है, बल्कि यह भी है कि आने वाले समय में आलाकमान किस नेतृत्व मॉडल पर भरोसा जताता है, गहलोत के अनुभव और राजनीतिक प्रभाव पर या डोटासरा-जूली के साझा संगठनात्मक नेतृत्व पर.

 

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About the Author

Ashutosh Sharma

Ashutosh Sharma

आशुतोष शर्मा वर्ष 2011 से मुख्यधारा की मीडिया में सक्रिय एक वरिष्ठ पत्रकार हैं. डेढ़ दशक से अधिक के अपने समृद्ध पत्रकारिता करियर में उन्होंने इंडिया न्यूज़,ज़ी न्यूज़ और न्यूज़ नेशन जैसे देश के प्रमुख समाचार संस्थानों के साथ काम किया है. वर्तमान में वे ज़ी राजस्थान न्यूज़ में सीनियर स्पेशल कॉरेस्पॉन्डेंट के रूप में कार्यरत हैं और राजधानी जयपुर से राज्य के महत्वपूर्ण विषयों को कवर कर रहे हैं.उनकी मुख्य विशेषज्ञता राजस्थान की राजनीति,प्रशासनिक फैसलों,चुनाव और जनहित के मुद्दों के साथ-साथ अपराध और कानून-व्यवस्था की ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग में है. पुलिस मुख्यालय (PHQ), जयपुर पुलिस कमिश्नरेट और विभिन्न जांच एजेंसियों से जुड़े बड़े व चर्चित मामलों की एक्सक्लूसिव कवरेज उनकी पत्रकारिता की प्रमुख पहचान रही है. ब्रेकअप न्यूज़,गहन राजनीतिक विश्लेषण और एक्सक्लूसिव क्राइम स्टोरीज़ के ज़रिए आशुतोष शर्मा ने राजस्थान मीडिया जगत में अपनी एक विश्वसनीय और प्रभावशाली पहचान बनाई है.
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