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राजस्थान में सर्दी की शुरुआत के साथ ही कई शहरों में वायु प्रदूषण बढ़ने लगा है. प्रदेश के कई शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) खराब श्रेणी में पहुंच गया है. 6 नवंबर 2026 को शाम 4 बजे जारी AQI बुलेटिन के अनुसार, सवाई माधोपुर में हवा की स्थिति सबसे चिंताजनक नजर आई. यहां AQI 306 दर्ज किया गया, जो बहुत खराब श्रेणी में आता है. इसके अलावा बीकानेर, सीकर, नागौर, अलवर और जयपुर सहित कई शहरों में भी प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है.
राजस्थान में सवाई माधोपुर की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित दर्ज की गई. यहां AQI 306 रहा. इसे बहुत खराब श्रेणी में रखा गया है. यहां प्रदूषण में PM2.5 प्रमुख प्रदूषक रहा. इस स्तर पर लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने से लोगों को सांस संबंधी बीमारियां होने का खतरा रहता है.
AQI बुलेटिन के मुताबिक, राजस्थान के कई शहरों में वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में दर्ज की गई. इनमें सीकर में AQI 227, नागौर में 225, अलवर में 224, झुंझुनूं में 224, जयपुर में 207, जैसलमेर में 210, करौली में 215 और श्रीगंगानगर में 213 दर्ज किया गया. इन सभी शहरों में AQI 201 से 300 के बीच होने के कारण हवा खराब श्रेणी में रही.
वहीं, बीकानेर में स्थिति भी चिंताजनक रही. यहां AQI 273 दर्ज किया गया. यह राजस्थान के शहरों में सबसे अधिक खराब श्रेणी वाला आंकड़ा है, सवाई माधोपुर का AQI इससे अधिक रहा. बीकानेर में PM10 प्रमुख प्रदूषक दर्ज किया गया.
प्रदेश के कुछ शहरों में हवा की गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में दर्ज की गई. इनमें टोंक का AQI 196, जोधपुर का 192, हनुमानगढ़ का 186, पाली का 184, डीग का 185 और भरतपुर का 179 रहा. इसके अलावा कोटा में AQI 145, बूंदी में 140, भीलवाड़ा में 130, उदयपुर में 129, चित्तौड़गढ़ में 142, झालावाड़ में 149 और बांसवाड़ा में 102 दर्ज किया गया.
बाड़मेर में AQI 107, चूरू में 231, दौसा में 232 और जालौर में 197 रहा. वहीं, प्रतापगढ़ में 105, सिरोही में 129, राजसमंद में 85 और डूंगरपुर में 77 AQI दर्ज किया गया.
AQI के स्वास्थ्य संबंधी मानकों के अनुसार, 201 से 300 के बीच हवा खराब श्रेणी में आती है. इस स्थिति में लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से ज्यादातर लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है. वहीं, 301 से 400 के बीच AQI होने पर लंबे समय तक संपर्क में रहने से सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ता है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से अस्थमा, फेफड़ों या दिल की बीमारी से जूझ रहे लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए.