राजस्थान में कृषि विभाग ने खाद-बीज और पेस्टिसाइड्स की जांच किए जाने की प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव किया है. अब इन आदानों के सैम्पल लेने के बाद जांच की प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय रहेगी. इसे अधिक पारदर्शी बनाया गया है. इसके लिए कृषि विभाग ने डाक विभाग के साथ भी एमओयू किया है. बता दें कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत राज्य में कृषि विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है.
कृषि विभाग ने बीज, उर्वरक और कीटनाशकों के नमूनों की जांच प्रक्रिया को पूरी तरह से फेसलेस, कॉन्टैक्टलेस और तकनीक आधारित बनाने का निर्णय लिया है. इसके तहत कृषि विभाग ने डाक विभाग के साथ 3 वर्ष के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता साइन किया है. नई व्यवस्था के लागू होने से नमूनों के संग्रहण, परिवहन और प्रयोगशाला परीक्षण में होने वाले मानवीय हस्तक्षेप को समाप्त किया जाएगा. यानी जो कृषि निरीक्षक खाद, बीज या पेस्टिसाइड के नमूने लेंगे, उन्हें ही जांच वाली प्रयोगशाला के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलेगी. इससे मिलावटखोरों पर नकेल कसेगी और किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले कृषि आदान मिल सकेंगे.
नई जांच प्रक्रिया में बदलाव क्या ?
कृषि आदानों (बीज, खाद, कीटनाशक) के सैंपल जांच की प्रक्रिया हुई कॉन्टैक्टलेस
निरीक्षक मौके पर ही ऐप के माध्यम से लेंगे डिजिटल सैंपल
सैंपल संग्रहण स्थल की होगी जियो-टैगिंग और सुरक्षित QR कोड पैकिंग
ऑटोमेटिक सिस्टम तय करेगा कि कौन सा सैंपल किस लैब में जाएगा
ना निरीक्षक को लैब का पता होगा और ना लैब को डीलर या निर्माता की पहचान होगी
स्पीड पोस्ट और बिजनेस पोस्ट से सैंपल्स का सुरक्षित परिवहन होगा
जयपुर में नमूनों की पहचान को मास्क करने के बाद प्रयोगशालाओं में भेजा जाएगा
डाक विभाग द्वारा कृषि विभाग को 'Book Now Pay Later' की सुविधा दी गई
घटिया व अमानक कृषि सामग्री से मुक्ति मिलेगी, किसानों को अच्छे आदान मिलेंगे
सैंपल की होगी जियो टैगिंग
दरअसल वर्तमान व्यवस्था में नमूनों की पैकेजिंग, परिवहन और लैब आवंटन के स्तर पर गड़बड़ी की आशंका बनी रहती है. नई प्रणाली में AgriQMS मोबाइल ऐप की मदद से निरीक्षक सैंपल लेंगे. नमूना लेते समय उस स्थान की जीपीएस आधारित जियो-टैगिंग की जाएगी और तस्वीरें ऐप पर अपलोड होंगी. इसके बाद सैंपल को टेम्पर-प्रूफ पैकिंग में बंद कर उस पर QR कोड लगाया जाएगा. इससे दोहरी गोपनीयता रहेगी. AgriQMS प्रणाली रैंडम आधार पर खुद तय करेगी कि सैंपल किस अधिकृत प्रयोगशाला में जाएगा. निरीक्षक अपनी पसंद से लैब का चुनाव नहीं कर सकेंगे. वहीं दूसरी ओर, लैब को भी यह जानकारी नहीं होगी कि सैंपल किस व्यापारी या कंपनी का है.
कृषि मंत्री ने कहा-किसान हित सर्वोच्च प्राथमिकता
समझौते के तहत प्रदेशभर से एकत्रित नमूनों को जयपुर स्थित केंद्र में भेजा जाएगा, जहां डाक विभाग अपनी स्पीड पोस्ट और बिजनेस पोस्ट सेवाओं के माध्यम से नमूनों को सुरक्षित तरीके से प्रयोगशालाओं तक पहुंचाएगा. कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा और कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता किसानों को प्रमाणिक कृषि सामग्री उपलब्ध कराना है. इससे न केवल किसानों के आर्थिक हितों की रक्षा होगी, बल्कि ईमानदार व्यापारियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा.