राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में MBBS फर्स्ट ईयर के विद्यार्थियों के साथ रैगिंग शिकायत के मामलों ने चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) के 18 अक्टूबर को जारी बयान के अनुसार, 10 से 17 अक्टूबर 2026 के बीच राज्य के छह मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग की छह शिकायतें सामने आईं. संगठन ने राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने और सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.
मामले में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के हस्तक्षेप की भी जानकारी सामने आई है. भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज से जुड़े मामले में आयोग ने कॉलेज प्रशासन से 24 घंटे के भीतर जवाब और कार्रवाई रिपोर्ट मांगी. साथ ही संबंधित CCTV फुटेज सुरक्षित रखने तथा एंटी-रैगिंग व्यवस्था से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाने की रिपोर्ट है.
छह मेडिकल कॉलेजों में शिकायतें
रिपोर्टों के अनुसार, शिकायतों में भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज, राजकीय मेडिकल कॉलेज कोटा, डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज जोधपुर, राजकीय मेडिकल कॉलेज चित्तौड़गढ़, सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज बीकानेर और ESIC मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल जयपुर का नाम सामने आया है. हालांकि, सभी छह कॉलेजों में सामने आई शिकायतों की प्रकृति और प्रत्येक मामले में हुई कार्रवाई का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है.
भीलवाड़ा में जूनियर छात्रों को धमकाने के आरोप
भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज से जुड़े मामले में वरिष्ठ विद्यार्थियों पर प्रथम वर्ष के छात्रों को बाल कटवाने के लिए मजबूर करने, शारीरिक रूप से डराने और परीक्षा में फेल कराने या बैकलॉग लगवाने की धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं. शिकायत में अभिभावकों को डराने के आरोप भी शामिल हैं.
मामले की गंभीरता को देखते हुए NMC के एंटी-रैगिंग सेल ने कॉलेज प्रशासन से जवाब मांगा. आयोग ने CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के साथ एंटी-रैगिंग समितियों की बैठकों, निरीक्षणों और पूर्व कार्रवाई से संबंधित रिकॉर्ड भी मांगे जाने के निर्देश दिए.
चित्तौड़गढ़ में भी शिकायत की रिपोर्ट
चित्तौड़गढ़ मेडिकल कॉलेज में प्रथम वर्ष की छात्राओं के कथित रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न से जुड़ी शिकायत की भी रिपोर्ट सामने आई है. इस मामले में भी जांच और कार्रवाई से संबंधित जानकारी मांगे जाने की बात कही गई है. हालांकि, शिकायतों में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है.
UDF ने सरकार से मांगा हस्तक्षेप
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से सभी शिकायतों की समयबद्ध जांच कराने की मांग की है. संगठन का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले नए विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है. शिकायतकर्ताओं को किसी भी तरह की धमकी या शैक्षणिक प्रताड़ना से बचाने, साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की जरूरत है.
एंटी-रैगिंग व्यवस्था पर उठे सवाल
एक सप्ताह में छह शिकायतें सामने आने से मेडिकल कॉलेजों में एंटी-रैगिंग समितियों, हॉस्टल निगरानी और शिकायत निवारण व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित कॉलेज प्रशासन जांच में क्या तथ्य सामने रखता है और चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा NMC की ओर से आगे क्या कार्रवाई की जाती है.