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न सड़क, न बिजली, न अस्पताल, फिर भी वोट डालने का हौसला कम नहीं. जाखम बांध के पानी के बीच बसे कर्मी गांव के ग्रामीणों ने पंचायतीराज चुनाव में पहले नाव से 3 किलोमीटर का सफर तय किया, फिर जंगल के रास्ते 10 किलोमीटर पैदल चलकर मतदान केंद्र पहुंचे और अपने मताधिकार का प्रयोग किया. सुविधाओं के अभाव में जीते इस गांव ने लोकतंत्र के पर्व में अपनी जिम्मेदारी निभाकर मिसाल पेश की. प्रतापगढ़ जिले की धमोतर पंचायत समिति क्षेत्र का कर्मी गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है.
250 की आबादी वाला गांव, सुविधाओं के लिए संघर्ष
जाखम बांध के पेट में बसे इस गांव की करीब 250 की आबादी को सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है. इसके बावजूद पंचायतीराज चुनाव में ग्रामीणों में मतदान को लेकर गजब का उत्साह देखने को मिला. महिला और पुरुष मतदाता नाव के जरिए लंबा सफर तय कर मतदान केंद्र पहुंचे और वोट डाला. कर्मी गांव पहले ग्राम पंचायत ग्यासपुर के अंतर्गत आता था, लेकिन नई ग्राम पंचायत अनूपपुर के गठन के बाद अब इसमें शामिल हो गया है.
3 KM नाव और 10 KM पैदल चलकर पहुंचते हैं मतदान केंद्र
गांव से मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को पहले जाखम बांध के पानी में करीब 3 किलोमीटर नाव से सफर करना पड़ता है. इसके बाद जंगल के रास्तों से होते हुए लगभग 10 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है. इस तरह करीब 13 किलोमीटर का सफर तय कर ग्रामीण मतदान केंद्र पहुंचते हैं. यह सफर सिर्फ मतदान के दिन की कहानी नहीं है, यहां के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी इसी तरह चलती है.
गांव में सड़क नहीं होने के कारण बच्चों को पढ़ाई के लिए भी नाव का सहारा लेना पड़ता है. बच्चे नाव से करीब 3 किलोमीटर का सफर तय कर जाखम के घने जंगलों से होते हुए स्कूल पहुंचते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा पाने के लिए बच्चों को रोजाना जोखिम भरा सफर करना पड़ता है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है. स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल भी कुछ ऐसा ही है.
अस्पताल 40-50 KM दूर, बिजली और नेटवर्क भी नहीं
गांव में अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र नहीं है. बीमार होने पर ग्रामीणों को पहले नाव से सफर कर उप स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना पड़ता है. वहां चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने पर उपचार के लिए प्रतापगढ़ जिला चिकित्सालय जाना पड़ता है, जो गांव से करीब 40 से 50 किलोमीटर दूर है. ऐसे में आपातकालीन स्थिति में मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. गांव में बिजली की सुविधा भी नहीं है. रात होते ही ग्रामीण चिमनी जलाकर या आग के सहारे रोशनी करते हैं. मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलने से संपर्क करना भी मुश्किल हो जाता है.
राशन के लिए भी नाव का सहारा, रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल
राशन सामग्री लेने के लिए भी ग्रामीणों को नाव से अनूपपुर जाना पड़ता है, जहां राशन डीलर से खाद्य सामग्री मिलती है. ग्रामीणों का कहना है कि जाखम बांध के पानी के बीच बसे होने के कारण गांव तक सड़क और अन्य सुविधाएं पहुंचाना मुश्किल है.
Report- Hitesh Upadhyay