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CA बनकर भी नहीं भाया संसार: कौन हैं अंकित जैन? लाल किले में लेंगे दीक्षा

राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के अचनेरा गांव में रविवार को बाल ब्रह्मचारी अंकित जैन का भव्य वरघोड़ा निकाला गया. चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनने और नौकरी करने के बाद उन्होंने सांसारिक सुख-सुविधाओं का त्याग कर संयम का मार्ग अपनाने का फैसला किया है. 25 अक्टूबर को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में उनकी दीक्षा होगी. विदाई के दौरान अंकित जैन ने माता-पिता के चरण धोकर आशीर्वाद लिया, तो परिवार की आंखें नम हो गईं. दीक्षा समारोह में अंकित जैन के साथ अलग-अलग राज्यों के पांच अन्य दीक्षार्थी भी संयम जीवन अपनाएंगे.

Written By Sneha Aggarwal
Published: Oct 11, 2026, 06:53 PM IST | Updated: Oct 11, 2026, 06:58 PM IST
Image Credit: Zee Media
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Pratapgarh News: राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के अचनेरा गांव में रविवार को बाल ब्रह्मचारी अंकित जैन का भव्य वरघोड़ा निकाला गया. चार्टर्ड अकाउंटेंट की उपाधि हासिल करने और कुछ समय नौकरी करने के बाद अंकित जैन ने सांसारिक सुख-सुविधाओं का त्याग कर संयम का मार्ग अपनाने का निर्णय लिया है. 25 अक्टूबर को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में उनकी दीक्षा होगी.

जन्मभूमि से निकला वरघोड़ा 
जन्मभूमि से विदाई के दौरान धार्मिक आस्था, त्याग और पारिवारिक भावनाओं का ऐसा संगम देखने को मिला कि वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं. वरघोड़े की शुरुआत अचनेरा स्थित जैन मंदिर से हुई. यात्रा बरखेड़ी बस स्टैंड होते हुए विद्यालय परिसर पहुंची, जहां जैन समाज के लोगों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया. विद्यालय परिसर में धार्मिक आयोजन और प्रवचनों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ.

माता-पिता के चरण धोकर लिया आशीर्वाद
इस दौरान सबसे भावुक पल तब आया, जब अंकित जैन ने संयम के मार्ग पर आगे बढ़ने से पहले अपने माता-पिता के चरण धोकर उनका आशीर्वाद लिया और चरण स्पर्श किए. बेटे को सांसारिक जीवन से विदा कर आध्यात्मिक मार्ग पर भेजते समय माता-पिता के साथ भाई-भाभी की आंखें भी नम हो गईं.

CA की पढ़ाई और नौकरी के बाद चुना वैराग्य का मार्ग
परिवार के सदस्यों की आंखों से छलके आंसुओं ने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया. एक ओर बेटे से बिछड़ने का दर्द था, तो दूसरी ओर उसके त्याग और आध्यात्मिक निर्णय पर गर्व का भाव दिखाई दिया. अंकित जैन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अचनेरा गांव में पूरी की. इसके बाद इंदौर में चार्टर्ड अकाउंटेंट की पढ़ाई कर सीए की उपाधि हासिल की और कुछ समय नौकरी भी की.

दीक्षा से पहले मंदिर में हुए धार्मिक अनुष्ठान
हालांकि, वैराग्य की भावना प्रबल होने पर उन्होंने सांसारिक जीवन छोड़कर संयम के मार्ग पर चलने का निर्णय लिया. दीक्षा से पहले परिवार की ओर से मंदिर में भगवान का अभिषेक, शांतिधारा और संगीतमय विधान सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए गए. भजन संध्या में श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों के माध्यम से अपनी आस्था व्यक्त की.

25 अक्टूबर को दिल्ली में होगी दीक्षा
25 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित होने वाले दीक्षा समारोह में अंकित जैन के साथ अलग-अलग राज्यों के पांच अन्य दीक्षार्थी भी संयम जीवन अपनाएंगे. अचनेरा में निकला यह वरघोड़ा धार्मिक आस्था, त्याग और पारिवारिक संवेदनाओं का प्रतीक बना, जिस गांव की गलियों में अंकित जैन ने बचपन बिताया, उसी जन्मभूमि से संयम के नए सफर पर उनकी विदाई का दृश्य लोगों के मन में लंबे समय तक यादगार रहेगा.

Report- Hitesh Upadhyay

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About the Author

मैं स्नेहा अग्रवाल जी राजस्थान न्यूज में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं और राजस्थान से जुड़ी हर बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी न्यूज़ पर पकड़ रखती हूं. क्राइम और कल्चर की खबरों में दिलचस्पी है. मुझे डिजिटल मीडिया का करीब 4 साल का साल का अनुभव है. इससे पहले मैं ZeeBihar में अपनी सेवाएं दे चुकी हूं. 4 साल के जर्नलिज्म करियर में लोकल, क्राइम, हेल्थ, एंटरटेनमेंट, वायरल और लाइफस्टाइल बीट पर काम किया है. मैंने यहां पर राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, ऑपेरशन सिंदूर समेत कई बड़े ईवेंट्स कवर किए हैं.
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