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जोधपुर बोरवेल रेस्क्यू: 32 घंटे बाद 'देसी जुगाड़' से हटा 550 फीट पर अटका पत्थर, 620 फीट नीचे फंसे भोमाराम की बची उम्मीद!

Rajasthan News: जोधपुर के नौसर में 9 वर्षीय भोमाराम को बोरवेल से निकालने का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. करीब 32 घंटे बाद देसी जुगाड़ से 550 फीट गहराई पर फंसा भारी पत्थर हटाया गया. बच्चा करीब 620 फीट नीचे फंसा है. NDRF-SDRF और विशेषज्ञ माधोराम सुथार की टीम लोहे के खास जाल से उसे निकालने में जुटी है.

Written By SAGAR CHAUDHARY
Published: Oct 16, 2026, 10:42 PM IST | Updated: Oct 16, 2026, 10:44 PM IST
Image Credit: Jodhpur Bhomaram Borewell Rescue
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Jodhpur Borewell Rescue: जोधपुर में बोरवेल में गिरे 9 वर्षीय भोमाराम को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. करीब 32 घंटे की मशक्कत के बाद बच्चे से 15-20 फीट ऊपर फंसे भारी पत्थर को देसी जुगाड़ से हटा दिया गया है. भोमाराम करीब 620 फीट की गहराई में फंसा हुआ है. एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों के साथ जालौर के बागोड़ा से आए बोरवेल रेस्क्यू विशेषज्ञ माधोराम सुथार और उनकी टीम बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने में जुटी हैं.

पत्थर हटाने के लिए बनाया खास उपकरण
रेस्क्यू के दौरान भोमाराम से कुछ दूरी ऊपर एक भारी पत्थर फंसा हुआ था. इसकी वजह से बचाव अभियान में परेशानी आ रही थी. पत्थर के कारण कैमरे से अंदर का नजारा देखने और बच्चे तक पहुंचने में भी दिक्कत हो रही थी. ऐसे में माधोराम सुथार और उनकी टीम ने पत्थर हटाने के लिए लोहे का एक खास उपकरण तैयार किया. करीब 550 फीट की गहराई पर रास्ता रोक रहे पत्थर को इसी देसी तकनीक की मदद से हटाया गया.

भारी मशीनों के बजाय देसी जुगाड़ का सहारा
रेस्क्यू के दौरान बोरवेल के आसपास की मिट्टी धंसने का खतरा बना हुआ है. इसी वजह से प्रशासन की अनुमति से भारी मशीनों के बजाय देसी जुगाड़ तकनीक का इस्तेमाल किया गया. इसका मकसद खुदाई के दौरान होने वाले कंपन को कम रखना था, ताकि मिट्टी खिसकने और हालात बिगड़ने का खतरा कम हो.

लोहे की जाली से बच्चे को निकालने की कोशिश
पत्थर हटने के बाद अब बच्चे को बाहर निकालने की कोशिश तेज कर दी गई है. माधोराम और उनकी टीम ने लोहे की सरियों से एक खास जाल तैयार किया है. इसी उपकरण की मदद से भोमाराम तक पहुंचने और उसे सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है. अब कैमरे की मदद से बोरवेल के अंदर की स्थिति पर नजर रखी जाएगी, ताकि बचाव दल आगे की कार्रवाई कर सके.

कैसे काम करता है यह देसी जुगाड़
इस देसी जुगाड़ में लोहे से बना खास उपकरण बोरवेल के अंदर रस्सी या पाइप की मदद से नीचे उतारा जाता है. इसे पत्थर के पास पहुंचाकर इस तरह इस्तेमाल किया जाता है कि रास्ता रोक रहे पत्थर को हटाया जा सके और आसपास की मिट्टी पर कम दबाव पड़े. पत्थर हटने के बाद लोहे की सरियों से तैयार जाल को नीचे पहुंचाकर बच्चे तक पहुंचने और उसे सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की जाती है. इस पूरी प्रक्रिया में बचाव दल कैमरे से बोरवेल के अंदर की स्थिति पर नजर रखता है और गहराई व हालात के हिसाब से उपकरण का इस्तेमाल करता है.

Reporter - Rakesh Kumar Bhardwaj

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About the Author

सागर चौधरी, अप्रैल 2024 से वे ज़ी न्यूज़ संस्थान का हिस्सा हैं और अपनी मेहनत व काम करने की क्षमता से लगातार टीम में योगदान दे रहे हैं.सागर चौधरी का संबंध हरियाणा के फरीदाबाद से है, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की और मीडिया क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की.
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