यूरिया-डीएपी के साथ जबरन अटैचमेंट किया, तो अब खैर नहीं, कंपनियों पर होगी कार्रवाई
Rajasthan News: कोटा-बूंदी समेत कई क्षेत्रों के किसानों ने यूरिया और डीएपी के साथ नैनो यूरिया, जिंक, सल्फर, बायो-स्टिमुलेंट और कीटनाशक जैसे उत्पाद जबरन दिए जाने की शिकायत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से की थी. किसानों की शिकायत पर बिरला ने केंद्रीय उर्वरक विभाग के सचिव से बात की. सचिव रजत कुमार मिश्रा ने भरोसा दिलाया कि जबरन अटैचमेंट देने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और किसानों की अन्य समस्याओं का भी समयबद्ध समाधान किया जाएगा.
Action Against Forced Bundling With Urea and DAP: कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र समेत अलग-अलग इलाकों के किसानों ने यूरिया और डीएपी खाद के साथ जबरन अतिरिक्त उत्पाद खरीदने के लिए दबाव बनाए जाने की शिकायत की है. किसानों का कहना है कि कई कंपनियां खाद के साथ नैनो यूरिया, जिंक, सल्फर, बायो-स्टिमुलेंट, कीटनाशक और अन्य उत्पाद लेने के लिए मजबूर कर रही हैं. इससे किसानों पर खाद की निर्धारित कीमत के अलावा अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है.
ओम बिरला ने केंद्रीय सचिव से की बात
किसानों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को केंद्रीय उर्वरक विभाग के सचिव रजत कुमार मिश्रा से बातचीत की. बिरला ने किसानों की ओर से उठाई गई समस्याओं की जानकारी सचिव को दी और इनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा. उन्होंने कहा कि किसानों को यूरिया और डीएपी के साथ जबरन अतिरिक्त उत्पाद देना नीतिसंगत नहीं है.
इस पर केंद्रीय उर्वरक विभाग के सचिव रजत कुमार मिश्रा ने बिरला को आश्वस्त किया कि यूरिया और डीएपी के साथ जबरन अटैचमेंट देने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने किसानों से जुड़ी अन्य समस्याओं का भी समयबद्ध समाधान करने की बात कही.
नैनो यूरिया से लेकर कीटनाशक तक लेने का दबाव
किसानों की शिकायत के मुताबिक, खाद की जरूरत के साथ उन्हें दूसरे उत्पाद भी खरीदने के लिए कहा जाता है. इनमें नैनो यूरिया, जिंक, सल्फर, बायो-स्टिमुलेंट और कीटनाशक शामिल हैं. किसानों ने ऐसी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ थर्ड पार्टी ब्रांडिंग के लाइसेंस निरस्त करने की मांग भी उठाई है.
खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग
किसानों ने खाद सब्सिडी सीधे उनके खातों में डीबीटी के जरिए देने का सुझाव दिया है. इसके अलावा जैविक और प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए अलग प्रोत्साहन राशि, कीटनाशकों की कीमत और गुणवत्ता पर सरकारी निगरानी बढ़ाने तथा खाद वितरण की डिजिटल व्यवस्था में सुधार की मांग की गई है.
किसानों का सुझाव है कि डिजिटल व्यवस्था ऐसी हो, जिससे मुख्य खाद के साथ दूसरे उत्पादों को जबरन जोड़ने की गुंजाइश न रहे. तहसील स्तर पर फ्लाइंग स्क्वाड और हेल्पलाइन बनाने तथा खाद दुकानों पर रेट लिस्ट लगाना अनिवार्य करने की मांग भी की गई है. किसानों ने रबी की बुवाई के समय यूरिया और डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग उठाई है.