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Jaipur News: जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में टाइगर ‘शिवाजी’ के हमले में महिला श्रमिक की मौत के 10 दिन बाद भी सुरक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा है. हादसे के बाद कर्मचारियों पर निलंबन और APO की कार्रवाई जरूर की गई, लेकिन वन्यजीवों की निगरानी से जुड़े बुनियादी इंतजाम अब भी सवालों के घेरे में हैं. टाइगर और लायन सफारी फिलहाल बंद है, जबकि सीसीटीवी कैमरों की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है.
10 दिन बाद भी कैमरों की स्थिति खराब
सूत्रों के मुताबिक हादसे के 10 दिन गुजरने के बाद भी सभी CCTV कैमरे दुरुस्त नहीं किए जा सके हैं. पार्क में 80 से अधिक CCTV कैमरे लगाए गए हैं, लेकिन घटना के समय बड़ी संख्या में कैमरे खराब थे. जिस एन्क्लोजर में महिला श्रमिक पर बाघ ने हमला किया था, वहां लगे सभी छह कैमरे बंद थे. यही वजह रही कि घटना का CCTV फुटेज भी रिकॉर्ड नहीं हो सका. ऐसे में सवाल उठता है कि जब निगरानी के लिए लगाए गए कैमरे ही काम नहीं कर रहे हैं, तो वन्यजीवों की प्रभावी मॉनिटरिंग आखिर कैसे होगी.
250 वन्यजीव, सिर्फ 5 केयरटेकर
नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में करीब 40 एन्क्लोजर हैं, जिनमें 29 प्रजातियों के लगभग 250 वन्यजीव मौजूद हैं. इनकी देखभाल और निगरानी के लिए 12 से 15 प्रशिक्षित केयरटेकर्स की जरूरत बताई जा रही है. इसके बावजूद वर्तमान व्यवस्था महज पांच केयरटेकर्स के भरोसे चल रही है. इनमें दो दिहाड़ी मजदूर भी शामिल हैं. कर्मचारियों की संख्या और प्रशिक्षण को लेकर भी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.
अधिकारियों की मॉनिटरिंग पर भी सवाल
नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के लिए अलग DCF और ACF की नियुक्ति है, लेकिन अधिकारियों की सिटिंग रामनिवास बाग स्थित जयपुर प्रादेशिक डिविजन कार्यालय में होने की बात सामने आ रही है. ऐसे में पार्क में मौके पर निगरानी और व्यवस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं. हादसे के बाद निचले स्तर के कर्मचारियों पर निलंबन और APO जैसी कार्रवाई हुई, लेकिन SOP के पालन और सुरक्षा व्यवस्था के लिए जिम्मेदार बड़े अधिकारियों की जवाबदेही अभी तय नहीं हुई है.
जांच अधिकारी बदले, रिपोर्ट का इंतजार
हादसे की जांच के लिए अधिकारी बदले जाने के बावजूद 10 दिन बाद भी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है. जी मीडिया की खबर के बाद जांच अधिकारी में बदलाव किया गया था. पहले मौजूदा ACF जितेंद्र सिंह शेखावत को जांच सौंपे जाने पर सवाल उठाए गए थे. इसके बाद वन विभाग ने जांच की जिम्मेदारी CCF अनूप केआर को सौंप दी. हालांकि अब भी रिपोर्ट का इंतजार है.
सफारी बंद, सिस्टम पर बड़े सवाल
टाइगर और लायन सफारी बंद होने के बावजूद सुरक्षा इंतजामों में ठोस बदलाव नहीं दिखना चिंता का विषय है. तय मानकों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था माकूल नहीं होने के सवाल उठ रहे हैं. यदि निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा इंतजाम इसी तरह कमजोर रहे, तो पर्यटकों की सुरक्षा और वन्यजीवों की निगरानी दोनों पर असर पड़ सकता है.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वन विभाग कब इस व्यवस्था को गंभीरता से लेगा और सुरक्षा मानकों को पूरी तरह लागू करने के लिए ठोस कदम उठाएगा.